पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण पर सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, किसानों के हितों की होगी रक्षा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 12 जून 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य में औद्योगिक भूमि अधिग्रहण के मामले में पूरी तरह संतुलित और कानून-सम्मत नीति अपनाएगी — जिसमें न तो निवेशकों के हितों से समझौता होगा और न ही किसानों के अधिकारों पर कोई आँच आएगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में निवेश के कई प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं।
भूमि अधिग्रहण पर सरकार का रुख
मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि उद्योगों के लिए जमीन हासिल करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की जबरदस्ती या बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में भूमि अधिग्रहण के लिए स्पष्ट कानूनी ढाँचा मौजूद है और सरकार उसी के दायरे में रहकर प्रक्रिया अपनाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण का इतिहास राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है — नंदीग्राम और सिंगूर जैसे विवाद इसकी मिसाल हैं।
निवेश प्रस्तावों की होगी कड़ी जाँच
सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि राज्य में निवेश के कई प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं। हालाँकि, सरकार निवेशकों की पृष्ठभूमि की जाँच करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके खिलाफ धन शोधन या अन्य गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े आरोप न हों। उन्होंने बताया कि उद्योग एवं वाणिज्य सचिव वंदना यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई है, जो निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करेगी।
रोजगार और बुनियादी ढाँचे पर असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे बेरोजगारी कम होगी और राज्य से बाहर गए श्रमिक भी वापस लौट सकेंगे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में कुशल और अकुशल श्रमिक रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े निवेश से बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य सुविधाओं और रेल संपर्क का भी विस्तार होगा।
पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (BGBS) के आयोजन के लिए एक निजी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को ₹635 करोड़ का भुगतान किया गया था, जिसकी जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि आखिर किन मदों में इतनी बड़ी राशि खर्च की गई।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार की यह नीति पश्चिम बंगाल में औद्योगिकीकरण की नई दिशा तय करेगी। निवेशकों की जाँच प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण की पारदर्शी नीति के साथ, अब देखना होगा कि वंदना यादव की अगुवाई वाली समीक्षा समिति किस गति से प्रस्तावों को मंजूरी देती है और राज्य में वास्तविक निवेश कब धरातल पर उतरता है।