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पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण पर सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, किसानों के हितों की होगी रक्षा

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पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण पर सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, किसानों के हितों की होगी रक्षा

सारांश

पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया — उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण होगा, लेकिन जबरदस्ती नहीं। साथ ही ₹635 करोड़ के BGBS खर्च की जाँच के आदेश देकर उन्होंने पूर्ववर्ती ममता सरकार पर सीधा निशाना साधा।

मुख्य बातें

सीएम सुवेंदु अधिकारी ने 12 जून 2026 को कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून के दायरे में, बिना जबरदस्ती के किया जाएगा।
निवेशकों की पृष्ठभूमि जाँच के लिए उद्योग सचिव वंदना यादव के नेतृत्व में विशेष समिति गठित।
बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (BGBS) में एक निजी कंपनी को ₹635 करोड़ भुगतान की जाँच के आदेश।
छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों से रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने का लक्ष्य।
बड़े निवेश से बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य और रेल संपर्क का विस्तार होगा।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 12 जून 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य में औद्योगिक भूमि अधिग्रहण के मामले में पूरी तरह संतुलित और कानून-सम्मत नीति अपनाएगी — जिसमें न तो निवेशकों के हितों से समझौता होगा और न ही किसानों के अधिकारों पर कोई आँच आएगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में निवेश के कई प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं।

भूमि अधिग्रहण पर सरकार का रुख

मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि उद्योगों के लिए जमीन हासिल करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की जबरदस्ती या बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में भूमि अधिग्रहण के लिए स्पष्ट कानूनी ढाँचा मौजूद है और सरकार उसी के दायरे में रहकर प्रक्रिया अपनाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण का इतिहास राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है — नंदीग्राम और सिंगूर जैसे विवाद इसकी मिसाल हैं।

निवेश प्रस्तावों की होगी कड़ी जाँच

सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि राज्य में निवेश के कई प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं। हालाँकि, सरकार निवेशकों की पृष्ठभूमि की जाँच करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके खिलाफ धन शोधन या अन्य गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े आरोप न हों। उन्होंने बताया कि उद्योग एवं वाणिज्य सचिव वंदना यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई है, जो निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करेगी।

रोजगार और बुनियादी ढाँचे पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे बेरोजगारी कम होगी और राज्य से बाहर गए श्रमिक भी वापस लौट सकेंगे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में कुशल और अकुशल श्रमिक रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े निवेश से बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य सुविधाओं और रेल संपर्क का भी विस्तार होगा।

पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (BGBS) के आयोजन के लिए एक निजी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को ₹635 करोड़ का भुगतान किया गया था, जिसकी जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि आखिर किन मदों में इतनी बड़ी राशि खर्च की गई।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार की यह नीति पश्चिम बंगाल में औद्योगिकीकरण की नई दिशा तय करेगी। निवेशकों की जाँच प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण की पारदर्शी नीति के साथ, अब देखना होगा कि वंदना यादव की अगुवाई वाली समीक्षा समिति किस गति से प्रस्तावों को मंजूरी देती है और राज्य में वास्तविक निवेश कब धरातल पर उतरता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुनर्वास ढाँचे और सहमति प्रक्रिया का स्पष्ट खाका सामने न आए। BGBS जाँच का ऐलान राजनीतिक रूप से प्रभावी है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि जाँच एजेंसी स्वतंत्र रूप से काम करती है या नहीं। वंदना यादव की समिति पर निवेश की गुणवत्ता तय करने का दबाव होगा — क्योंकि अतीत में कई राज्यों के 'निवेशक-अनुकूल' समिट वास्तविक रोजगार देने में विफल रहे हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम सुवेंदु अधिकारी की भूमि अधिग्रहण नीति क्या है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण मौजूदा कानूनी ढाँचे के तहत और बिना किसी जबरदस्ती के किया जाएगा। किसानों के अधिकारों की रक्षा करते हुए औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (BGBS) में ₹635 करोड़ की जाँच क्यों हो रही है?
सीएम अधिकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने BGBS के आयोजन के लिए एक निजी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को ₹635 करोड़ का भुगतान किया था। यह पता लगाने के लिए कि इतनी बड़ी राशि किन मदों में खर्च हुई, जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।
निवेशकों की पृष्ठभूमि जाँच कौन करेगा?
उद्योग एवं वाणिज्य सचिव वंदना यादव के नेतृत्व में एक विशेष समिति गठित की गई है जो निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करेगी। यह समिति सुनिश्चित करेगी कि निवेशकों पर धन शोधन या अन्य गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप न हों।
नई औद्योगिक नीति से पश्चिम बंगाल के श्रमिकों को क्या फायदा होगा?
मुख्यमंत्री अधिकारी के अनुसार, छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे बेरोजगारी कम होगी और राज्य से रोजगार के लिए बाहर गए श्रमिक वापस लौट सकेंगे।
पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण इतना संवेदनशील मुद्दा क्यों है?
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और सिंगूर जैसे विवादों ने भूमि अधिग्रहण को राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना दिया है। इन्हीं मुद्दों ने 2011 में वाम मोर्चे की सत्ता समाप्ति में भूमिका निभाई थी, इसलिए किसी भी नई सरकार के लिए इस पर संतुलित रुख अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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