पश्चिम बंगाल: BSF को 27 किमी सीमा भूमि सौंपी, CM अधिकारी बोले — 2 सप्ताह में पूरी होगी प्रक्रिया

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पश्चिम बंगाल: BSF को 27 किमी सीमा भूमि सौंपी, CM अधिकारी बोले — 2 सप्ताह में पूरी होगी प्रक्रिया

सारांश

पश्चिम बंगाल में नई सरकार ने वह काम शुरू किया जो वर्षों से अटका था — BSF को 27 किमी सीमा भूमि सौंपकर बाड़ निर्माण की राह खोली। CM अधिकारी ने सीधे TMC सरकार पर निशाना साधा और दो सप्ताह में पूरी प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिलाया।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 20 मई 2026 को BSF को 27 किलोमीटर सीमा भूमि आधिकारिक रूप से सौंपी।
CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा — अगले दो सप्ताह में समूची आवश्यक भूमि BSF को सौंप दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल में 600 किलोमीटर सीमा अब भी बिना बाड़ के; कुल राज्य सीमा 2,000 किलोमीटर से अधिक ।
CM ने आरोप लगाया — पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC सरकार ने जानबूझकर 555 किलोमीटर भूमि BSF को नहीं सौंपी।
भूमि-हस्तांतरण की धनराशि केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी।
BSF और राज्य अधिकारियों के बीच नियमित समन्वय बैठकें शुरू की जाएंगी।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 20 मई 2026 को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 27 किलोमीटर भूमि आधिकारिक रूप से सौंप दी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय, कोलकाता में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया की शुरुआत मात्र है और अगले दो सप्ताह के भीतर समूची आवश्यक भूमि BSF को सौंप दी जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री अधिकारी ने बताया कि भारत-बांग्लादेश की कुल अंतरराष्ट्रीय सीमा 4,000 किलोमीटर से कुछ अधिक है, जिसमें से 2,000 किलोमीटर से अधिक पश्चिम बंगाल में पड़ती है। राज्य की लगभग 1,600 किलोमीटर सीमा पर पहले से कंटीली बाड़ लगी है, जबकि शेष 600 किलोमीटर अब भी बिना बाड़ के है। केंद्र सरकार इस भूमि-हस्तांतरण के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराएगी।

पिछली सरकार पर आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने जानबूझकर BSF को भूमि सौंपने से परहेज किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'तुष्टीकरण की संकीर्ण राजनीति' के एजेंडे के तहत किया गया। अधिकारी के अनुसार, यदि पिछली सरकार में इच्छाशक्ति होती, तो वह कम-से-कम 555 किलोमीटर भूमि BSF को आसानी से सौंप सकती थी।

BSF-राज्य समन्वय

मुख्यमंत्री ने बताया कि नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से BSF और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच समन्वय बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की जा चुकी है। उन्होंने घोषणा की कि अब से ये बैठकें नियमित रूप से होती रहेंगी ताकि सीमा प्रबंधन में कोई अवरोध न आए।

सुरक्षा चिंताएँ

मुख्यमंत्री अधिकारी ने यह भी कहा कि उनके अनुसार राज्य में कानून-व्यवस्था भंग, तथाकथित 'लव जिहाद', जबरन धर्म परिवर्तन और महिलाओं के विरुद्ध अपराध जैसी घटनाओं में बांग्लादेश से आए कथित अवैध घुसपैठियों की भूमिका देखी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने पिछली राज्य सरकार से बार-बार अनुरोध किया था कि राज्य में गिरफ्तार अवैध घुसपैठियों को BSF को सौंपा जाए, परंतु उस पर कार्रवाई नहीं हुई।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री के अनुसार, शेष बची 600 किलोमीटर में से आवश्यक भूमि अगले दो सप्ताह में BSF को सौंपी जाएगी, जिसके बाद बाड़ निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा। यह कदम पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा को नए सिरे से मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

27 किलोमीटर बनाम 600 किलोमीटर का अनुपात बताता है कि असली परीक्षा अभी बाकी है। मुख्यमंत्री का 'दो सप्ताह' का वादा महत्त्वाकांक्षी है; भूमि-अधिग्रहण, स्थानीय आपत्तियाँ और वन-क्षेत्र जैसी जटिलताएँ अक्सर ऐसी समयसीमाओं को चुनौती देती हैं। सीमा सुरक्षा को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से अलग रखकर देखें तो असली सवाल यह है कि बाड़ निर्माण की गति और गुणवत्ता क्या होगी — और उसकी निगरानी कौन करेगा।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल सरकार ने BSF को कितनी भूमि सौंपी है?
20 मई 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार ने BSF को 27 किलोमीटर सीमा भूमि आधिकारिक रूप से सौंपी। CM सुवेंदु अधिकारी के अनुसार यह प्रक्रिया की शुरुआत है और अगले दो सप्ताह में शेष आवश्यक भूमि भी सौंप दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल में कितनी सीमा अभी भी बिना बाड़ के है?
राज्य की कुल 2,000 किलोमीटर से अधिक भारत-बांग्लादेश सीमा में से लगभग 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लगी है, जबकि शेष 600 किलोमीटर अब भी बिना बाड़ के है। इसी खुली सीमा पर बाड़ लगाने के लिए BSF को भूमि सौंपी जा रही है।
पिछली TMC सरकार ने BSF को भूमि क्यों नहीं सौंपी?
CM अधिकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC सरकार ने 'तुष्टीकरण की राजनीति' के चलते जानबूझकर BSF को भूमि सौंपने से परहेज किया। हालाँकि, यह TMC का पक्ष नहीं है — यह CM अधिकारी का आरोप है।
BSF को सीमा भूमि सौंपने का खर्च कौन उठाएगा?
CM अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस भूमि-हस्तांतरण और बाड़ निर्माण के लिए केंद्र सरकार धनराशि उपलब्ध कराएगी। राज्य सरकार की भूमिका भूमि चिह्नित कर BSF को सौंपने की है।
BSF और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच समन्वय कैसे होगा?
नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से BSF और राज्य अधिकारियों के बीच समन्वय बैठकों की एक श्रृंखला पहले ही आयोजित हो चुकी है। CM अधिकारी ने घोषणा की कि अब से ये बैठकें नियमित रूप से होती रहेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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