पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का सीएपीएफ पर गंभीर आरोप: भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं

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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का सीएपीएफ पर गंभीर आरोप: भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं

सारांश

कोलकाता में ममता बनर्जी ने सीएपीएफ पर भाजपा के एजेंट की तरह कार्य करने का आरोप लगाया। उनके बयानों ने चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जानिए इस विवाद का पूरा मामला।

Key Takeaways

  • ममता बनर्जी ने सीएपीएफ पर भाजपा के एजेंट बनने का आरोप लगाया।
  • महिलाओं को पोलिंग बूथ की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।
  • एसआईआर के माध्यम से जनता को परेशान किया जा रहा है।
  • ममता बनर्जी एनआरसी के खिलाफ हैं और इसे लागू नहीं होने देंगी।

कोलकाता, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चुनाव आयोग के बाद अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमला बोला है। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि केंद्रीय बल भी आयोग की तरह ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के एजेंट के रूप में कार्य कर रहा है।

सीएम ममता बनर्जी ने बुधवार को उत्तरी बंगाल में एक के बाद एक तीन रैलियों को संबोधित करते हुए कहा। एक रैली में, उन्होंने राज्य में पहले से तैनात सीएपीएफ कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ हर वोट चुनाव आयोग के खिलाफ प्रतिशोध होगा, जिसने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से जनता को समस्याओं में डाल दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि वह सीएपीएफ का बहुत सम्मान करती हैं, लेकिन अब उन्हें यह महसूस हुआ है कि ये बल पश्चिम बंगाल में भाजपा के एजेंट की तरह कार्य कर रहे हैं और भाजपा के झंडे भी ले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की महिलाओं को मतदान के दिनों में सुबह से ही पोलिंग बूथ की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाने होंगे। अगर आप पश्चिम बंगाल में पांच वर्षों के लिए शांति चाहते हैं, तो आपको एक दिन के लिए बूथ की सुरक्षा करनी होगी और बाहरी लोगों को चुनावी गड़बड़ी से रोकना होगा।

उन्होंने आयोग पर पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को बिना पूर्व सूचना के दूसरे राज्यों में ट्रांसफर और बदलने के लिए भी आलोचना की।

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल की चुनी हुई मुख्यमंत्री हूं, फिर भी मेरे अधिकारियों को बिना मुझे बताए ट्रांसफर कर दिया गया। अब, राज्य में आवश्यक और आपातकालीन प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी कौन लेगा? खाना कौन मुहैया करेगा? बाढ़ या तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं से कौन निपटेगा? अगर भाजपा ऐसे कामों से मुझे कुचलने की सोच रही है, तो यह उनकी गलतफहमी है।"

उन्होंने एसआईआर के संदर्भ में कहा कि यह शर्मनाक है कि पश्चिम बंगाल के नागरिकों को इतने वर्षों बाद अपनी नागरिकता के सबूत देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों को विशेष तौर पर लॉजिकल डिसकम्पेसी नोटिस भेजे गए हैं, और उन्हें यकीन है कि पश्चिम बंगाल में एनआरसी अगला एजेंडा होगा, लेकिन जब तक मैं जीवित हूं, ऐसा नहीं होने दूंगी। मैं एक भी व्यक्ति को डिटेंशन कैंप नहीं भेजूंगी।

Point of View

ममता बनर्जी के आरोप गंभीर हैं और राजनीतिक परिदृश्य की जटिलता को दर्शाते हैं। भाजपा और सीएपीएफ के बीच संबंधों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, साथ ही चुनाव आयोग की भूमिका पर भी। यह मामला लोकतंत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

ममता बनर्जी ने सीएपीएफ पर क्या आरोप लगाया?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि सीएपीएफ भाजपा के एजेंट की तरह कार्य कर रहा है।
बंगाल में मतदान के समय महिलाएं क्या कर सकती हैं?
महिलाओं को मतदान के दिनों में पोलिंग बूथ की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाने की सलाह दी गई है।
एसआईआर का क्या मतलब है?
एसआईआर का मतलब विशेष गहन पुनरीक्षण है, जिससे जनता को समस्याएं होती हैं।
क्या ममता बनर्जी एनआरसी के खिलाफ हैं?
हां, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वे एनआरसी के खिलाफ हैं और इसे लागू नहीं होने देंगी।
क्या भाजपा ममता बनर्जी को कुचलने की कोशिश कर रही है?
ममता बनर्जी ने यह कहा है कि भाजपा उन्हें कुचलने की कोशिश कर रही है, जो गलत है।
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