बीएसएफ को सीमा भूमि सौंपने की सुवेंदु सरकार की त्रिस्तरीय योजना, 45 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

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बीएसएफ को सीमा भूमि सौंपने की सुवेंदु सरकार की त्रिस्तरीय योजना, 45 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

सारांश

सत्ता में आते ही सुवेंदु अधिकारी सरकार ने वह काम हाथ में लिया जो TMC सरकार ने वर्षों टाला — बांग्लादेश सीमा पर बाड़ के लिए बीएसएफ को जमीन देना। तीन चरणों और 45 दिन की समयसीमा के साथ यह BJP का पहला बड़ा प्रशासनिक कदम है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही बांग्लादेश सीमा पर बाड़ के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपने की त्रिस्तरीय रणनीति लागू की।
पहले चरण में सरकारी भूमि तत्काल हस्तांतरित होगी; दूसरे में बाजार मूल्य से अधिक मुआवजे पर निजी भूमि अधिग्रहण; तीसरे में अतिक्रमित भूमि खाली कराना।
पूरी प्रक्रिया मंत्रिमंडल के निर्णय की तारीख से 45 दिनों के भीतर पूरी होनी है।
पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को प्रधान समन्वयक नियुक्त किया गया है।
यह मुद्दा पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की अनिच्छा के कारण लंबे समय से लंबित था।
गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार में वादा किया था कि यह BJP सरकार का पहला निर्णय होगा।

पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि हस्तांतरित करने की एक त्रिस्तरीय रणनीति लागू की है। राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया मंत्रिमंडल के निर्णय की तारीख से 45 दिनों के भीतर पूरी की जानी है।

तीन चरणों में भूमि हस्तांतरण की योजना

सूत्रों ने बताया कि रणनीति के पहले चरण में बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित सरकारी भूमि को तत्काल प्रभाव से बीएसएफ को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बाड़बंदी का प्रारंभिक कार्य बिना देरी के शुरू हो सके।

दूसरे चरण के तहत सीमा के पास स्थित निजी भूमि को भूस्वामियों से मौजूदा बाजार मूल्य से अधिक उचित मुआवजा देकर अधिग्रहित किया जाएगा और तत्पश्चात वह भूमि बीएसएफ को सौंपी जाएगी।

तीसरे चरण में बिना बाड़ वाली सीमाओं के आसपास अतिक्रमित भूमि को खाली कराकर बीएसएफ के हवाले किया जाएगा, जिससे भूमि हस्तांतरण की यह समग्र प्रक्रिया पूरी होगी।

समन्वय की ज़िम्मेदारी

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को विकास कार्यों के लिए प्रधान समन्वयक नियुक्त किया गया है। उन्हें इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने और बीएसएफ को भूमि का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

चुनावी वादे से सीधा जुड़ाव

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हालिया विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में यह प्रमुख संकल्प था कि बिना बाड़ वाली सीमाओं पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपी जाएगी। यह मुद्दा पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की अनिच्छा के कारण लंबे समय से अटका हुआ था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य में आयोजित रैलियों में स्पष्ट वादा किया था कि BJP की सरकार बनने पर बीएसएफ को भूमि सौंपने का निर्णय उसका पहला फैसला होगा।

आगे की राह

सूत्रों के अनुसार, पहले चरण की प्रक्रिया 15 मई 2026 तक शुरू हो चुकी है और प्रत्येक चरण के लिए निश्चित समय-सीमा तय की गई है। यह कदम पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य के बीच नए सहयोग का संकेत है, जो वर्षों की गतिरोध की स्थिति के बाद आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — विशेषकर निजी भूमि अधिग्रहण में, जो ऐतिहासिक रूप से विवादों और देरी का केंद्र रही है। 45 दिन की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, जबकि पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएँ पहले भी कानूनी अड़चनों में फँसती रही हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि TMC सरकार की 'अनिच्छा' का एक पहलू स्थानीय भूस्वामियों और समुदायों का विरोध भी था — जिसे नई सरकार को अभी भी संबोधित करना होगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुवेंदु अधिकारी सरकार की बीएसएफ भूमि हस्तांतरण रणनीति क्या है?
यह एक त्रिस्तरीय योजना है जिसमें पहले सरकारी भूमि तत्काल बीएसएफ को सौंपना, फिर बाजार मूल्य से अधिक मुआवजे पर निजी भूमि अधिग्रहण, और अंत में अतिक्रमित भूमि खाली कराकर बीएसएफ को देना शामिल है। पूरी प्रक्रिया मंत्रिमंडल के निर्णय से 45 दिनों के भीतर पूरी होनी है।
बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का यह मुद्दा इतने समय से क्यों लंबित था?
पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की अनिच्छा के कारण बिना बाड़ वाली सीमाओं पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपने का काम वर्षों से रुका हुआ था। BJP ने इसे अपने चुनाव घोषणापत्र में प्रमुख वादे के रूप में शामिल किया था।
इस प्रक्रिया की देखरेख कौन करेगा?
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को विकास कार्यों के लिए प्रधान समन्वयक नियुक्त किया गया है। वे पूरी भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की निगरानी करेंगी और बीएसएफ को सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करेंगी।
निजी भूमि मालिकों को क्या मुआवजा मिलेगा?
रणनीति के दूसरे चरण के तहत सीमा के निकट निजी भूमि के मालिकों को मौजूदा बाजार मूल्य से अधिक उचित मुआवजा दिया जाएगा। इसके बाद अधिग्रहित भूमि बीएसएफ को हस्तांतरित की जाएगी।
अमित शाह ने इस मुद्दे पर क्या वादा किया था?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले रैलियों में वादा किया था कि BJP सरकार बनने पर बीएसएफ को भूमि सौंपना उसका पहला निर्णय होगा। सुवेंदु अधिकारी सरकार ने सत्ता संभालते ही इस दिशा में कदम उठा दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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