नौसाद सिद्दीकी का पीएम मोदी पर पलटवार: 'देश इस हालत में क्यों पहुंचा, जवाब दें'
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौसाद सिद्दीकी ने 14 मई 2026 को कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया आह्वान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश इस स्थिति में क्यों पहुंचा, इसका जवाब पीएम को देना चाहिए। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद उठे विभिन्न मुद्दों — सीमा सुरक्षा, अवैध निर्माण, शिक्षा और राष्ट्रगान की अनिवार्यता — पर सिद्दीकी ने विस्तार से अपना पक्ष रखा।
पीएम मोदी के आह्वान पर तीखा सवाल
सिद्दीकी ने कहा, 'पीएम बोल रहे हैं कि देश आगे जा रहा है, लेकिन देश तो पीछे जाता दिखाई दे रहा है।' उन्होंने रुपए की गिरती कीमत का हवाला देते हुए मोदी सरकार से सीधे सवाल किया कि इस आर्थिक स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान विपक्ष की बढ़ती आक्रामकता को दर्शाते हैं।
बीएसएफ को जमीन देने पर समर्थन
बॉर्डर सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन दिए जाने के मामले पर सिद्दीकी ने असामान्य रूप से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह जरूरी कदम है और उन्होंने स्वयं विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था। उनके अनुसार, पिछली सरकार के दौरान केंद्र और राज्य एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे, जिससे मामला अटका रहा और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई: प्रक्रिया का सवाल
अवैध निर्माण पर चल रही कार्रवाई के बारे में सिद्दीकी ने कहा कि वे खुद अवैध निर्माण के विरोध में हैं, लेकिन 'आज अवैध बताकर कल तोड़ दिया जाए, ऐसा नहीं होना चाहिए।' उन्होंने तर्क दिया कि एक इमारत में कई परिवार रहते हैं और उन्हें कानूनी नोटिस व पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
'वंदे मातरम' अनिवार्यता पर राजनीतिक आरोप
पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 'वंदे मातरम' की सभी पंक्तियाँ अनिवार्य किए जाने पर सिद्दीकी ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कदम हिंदू वोटों को साधने की कोशिश है। उनके अनुसार, जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं या जो बंद पड़े हैं, उन पर भी ध्यान देना चाहिए था — 'सिर्फ हिंदुत्व पर बात करते हैं, शिक्षा व्यवस्था पर नहीं।'
ममता बनर्जी के हाई कोर्ट जाने पर प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कलकत्ता उच्च न्यायालय जाने को सिद्दीकी ने 'सिर्फ दिखावा' करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे पहले ममता बनर्जी सर्वोच्च न्यायालय में एसआईआर मामले को लेकर गई थीं — यह उसी रणनीति की पुनरावृत्ति है। यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में गहराते दलीय विभाजन को रेखांकित करता है।