नसीम सिद्दीकी का भाजपा पर चुनावी वादों का आरोप: क्या है सच?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा का वादा: महिलाओं को 3,000 रुपए प्रति माह देने का वादा।
- नसीम सिद्दीकी का आरोप: भाजपा चुनावी वादे नहीं निभा रही है।
- यूसीसी का विवाद: सांप्रदायिक एजेंडे का हिस्सा।
- बॉम्बे हाईकोर्ट: योजना को रोकने का आदेश।
- राजनीतिक विमर्श: चुनावी माहौल में तेज हो रही बयानबाजी।
मुंबई, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीख के समीप आते ही राजनीतिक विमर्श तेज हो गया है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को प्रतिमाह 3,000 रुपए देने का वादा किया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (एसपी) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने शनिवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि वह अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं कर रही है।
नसीम सिद्दीकी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "यह एक पूरी तरह से राजनीतिक घोषणा पत्र है। भाजपा जो वादे करती है, वह कभी भी उन्हें पूरा नहीं करती। उन्होंने महिलाओं को 3,000 रुपए देने का वादा किया है। इससे पहले, महाराष्ट्र में 1,500 रुपए लाडली बहनों को देने का वादा किया गया था और 2024 में कहा गया था कि यदि हम सत्ता में आएंगे तो इसे 3,000 रुपए करेंगे। किंतु वर्तमान में 80 लाख महिलाओं के नाम योजना से हटा दिए गए हैं। उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। यह एक झूठी सरकार है।"
उन्होंने यूसीसी लागू करने के बयान पर कहा कि इसका उद्देश्य सांप्रदायिकता को बढ़ावा देना है। वह पूरे देश में इसे लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। एसआईआर हो या यूजीसी—पहले एक बार तो तय कर लें कि उन्हें क्या करना है। एक ओर वह गौ-हत्या रोकने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके राज्य में गौ-हत्या हो रही है। भारत, मीट एक्सपोर्ट में दुनिया में दूसरे नंबर पर है, जिसमें 2014 के बाद 50 प्रतिशत का उछाल आया है। इस प्रकार, उनके कार्य और कथन में बहुत भिन्नता है, जिस पर लोगों को विश्वास नहीं करना चाहिए। मुझे विश्वास है कि पश्चिम बंगाल के लोग ममता सरकार को एक बार फिर अवसर देंगे।
उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा योजना रोकने के संदर्भ में टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा, "सरकार जनता के पैसे को टैक्स में बर्बाद कर रही है। हम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हैं। सरकार को मुफ्त की रेवड़ियों का वितरण बंद करना चाहिए। यदि कोई आपातकालीन स्थिति आती है, जैसे किसानों पर संकट, बारिश या ओले, तो उस समय मदद की जानी चाहिए, लेकिन मदद के नाम पर लोगों की आदत बिगाड़ने वाली प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए, क्योंकि इससे देश पीछे जाएगा।"
उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा के हालिया बयान पर कहा, "जब मुलायम सिंह के दौर में गोली चली थी, तब कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि बाबरी मस्जिद सुरक्षित रहेगी, लेकिन उनके कारसेवकों ने उस नियम का उल्लंघन किया। मुझे लगता है कि उस समय की परिस्थितियों में मुलायम सिंह का निर्णय उचित था।"