आयरलैंड में ईरानी प्रभाव अभियान का पर्दाफाश: एक अध्ययन का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- ईरान से जुड़ा एक सूचना अभियान आयरलैंड को लक्षित कर रहा है।
- कुछ नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान हुई है।
- ये अकाउंट्स संभवतः स्टॉर्म-2035 अभियान का हिस्सा हैं।
- अमेरिका-इजरायल की आलोचना के लिए एआई प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया गया।
- रूस से जुड़ी गतिविधियां भी व्यापक रूप से फैली हुई हैं।
डबलिन, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयरलैंड में कार्यरत इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डायलॉग द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि ईरान से संबंधित एक सूचना अभियान संभवतः आयरलैंड को लक्षित कर रहा है।
इस अध्ययन के दौरान कुछ नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स का पता चला, जो ईरान, रूस और चीन से जुड़े बताए जा रहे हैं और वे आयरलैंड के बारे में पोस्ट साझा कर रहे थे।
यह भी पता चला है कि ये अकाउंट्स संभवतः “स्टॉर्म-2035” नामक एक गुप्त प्रभाव अभियान का हिस्सा हो सकते हैं, जो ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से संबंधित है। यह जानकारी द आयरिश टाइम्स में पत्रकार और शोधकर्ता सियारन ओ’कॉनर द्वारा साझा की गई।
इन अकाउंट्स की प्रोफाइल लोकेशन डाटा से पता चला कि इन्हें ईरान से एक्सेस किया गया था।
इसके अतिरिक्त, यह भी खुलासा हुआ कि एआई प्लेटफॉर्म्स का उपयोग अमेरिका-इजरायल की आलोचना और ईरान-फिलिस्तीन के समर्थन में सामग्री उत्पन्न करने के लिए किया गया था।
ओ’कॉनर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में यूके और उत्तर अमेरिका के कुछ सार्वजनिक व्यक्तियों ने आयरलैंड पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने आयरलैंड के एक दैनिक समाचार पत्र में कहा, “वे आयरलैंड की घटनाओं को गलत और डरावने तरीके से प्रस्तुत करके अपने एजेंडों को आगे बढ़ाते हैं, हमारे सार्वजनिक संस्थानों को निशाना बनाते हैं और आयरलैंड को एक सख्त पुलिस राज्य के रूप में दर्शाते हैं।”
ओ’कॉनर ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष चार एक्स अकाउंट्स मिले थे, जो आयरिश नागरिकों के रूप में प्रकट हो रहे थे। उन्होंने कहा कि इनमें से किसी के असली होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
इन अकाउंट्स का संचालन करने वाले लोग खुद को हाल ही में इस्लाम अपनाने वाला बताते थे और यह दावा करते थे कि वे “एकजुट आयरलैंड” का सपना देखते हैं।
ओ’कॉनर ने यह भी बताया कि रूस से जुड़ी गतिविधियां “बहुत व्यापक” थीं। वहां एक ऐसा नेटवर्क मौजूद है जो राज्य मीडिया की सामग्री को आगे बढ़ाता है, जिसमें अक्सर यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंधित मीडिया भी शामिल होती है।
यह सामग्री फिर ऐसे आउटलेट्स और वेबसाइट्स के माध्यम से फैलती है, जो खुद को असली समाचार साइट्स के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता और उन पर भी कोई प्रतिबंध नहीं होता।
अंत में, अध्ययन में यह भी पाया गया कि आयरलैंड में माइग्रेशन को कई राज्य-समर्थित समूहों ने एक पृष्ठभूमि के रूप में इस्तेमाल किया। इसके माध्यम से वे यह दावा करने की कोशिश कर रहे हैं कि पश्चिमी सरकारें कमजोर हैं, यूरोपीय संघ की संप्रभुता घट रही है, और लोकतांत्रिक संस्थाएं विफल हो रही हैं। यह शोध चीन से जुड़ी गतिविधियों के संदर्भ में सबसे दिलचस्प पाया गया।