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पश्चिम बंगाल में सीधी भूमि खरीद नीति: CM सुवेंदु अधिकारी का उद्योग-अनुकूल बड़ा ऐलान

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पश्चिम बंगाल में सीधी भूमि खरीद नीति: CM सुवेंदु अधिकारी का उद्योग-अनुकूल बड़ा ऐलान

सारांश

सिंगूर और नंदीग्राम की कड़वी यादों से सबक लेते हुए CM सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में उद्योग के लिए सीधी भूमि खरीद नीति का ऐलान किया — सरकार खुद ज़मीन खरीदेगी और निवेशकों को देगी। साथ ही ₹1 लाख करोड़ सालाना कर्ज़ बोझ के बीच राजस्व बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण को अनिवार्य बताया।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 11 जुलाई को हुगली जिले के डंकुनी में सीधी भूमि खरीद नीति की घोषणा की।
राज्य सरकार भूस्वामियों से सीधे ज़मीन खरीदकर उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को उपलब्ध कराएगी।
नीति का उद्देश्य सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि विवादों की पुनरावृत्ति रोकना है।
राज्य सरकार ऋण व ब्याज भुगतान पर प्रतिवर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च कर रही है।
नए उद्यमों को रियायती दरों पर ऋण देने और रिश्वतखोरी-जबरन वसूली समाप्त करने का भी वादा किया गया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार, 11 जुलाई को राज्य में नए उद्योग स्थापित करने हेतु सरकार द्वारा भूस्वामियों से सीधे ज़मीन खरीदने की नीति की घोषणा की। यह ऐलान हुगली जिले के डंकुनी में एक होजरी निर्माण इकाई के शिलान्यास समारोह के दौरान किया गया, जो राज्य में औद्योगिक निवेश को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सीधी भूमि खरीद नीति क्या है

मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्वयं भूस्वामियों से ज़मीन खरीदेगी और फिर उसे उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा, 'हमने सीधे भूमि खरीद की नीति तैयार कर ली है। राज्य सरकार ने पहले ही राज्य के अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों में सीधे भूमि खरीद की नीति शुरू कर दी थी और फिर उन्हें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को कांटेदार बाड़ लगाने के लिए सौंप दिया था। उद्योग के मामले में भी यही नीति अपनाई जाएगी।'

उन्होंने संभावित निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'हम नहीं चाहते कि उद्योग के लिए भूमि की उपलब्धता को लेकर वैसा तनाव फिर से पैदा हो, जैसा पहले सिंगूर और नंदीग्राम में हुआ था। मैं यहाँ उद्योग या व्यवसाय करने के इच्छुक लोगों को आश्वस्त करता हूँ कि आपको भूमि प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं होगी। हम सीधे भूमि खरीदेंगे और आपको देंगे।'

सिंगूर-नंदीग्राम की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए विवाद और आंदोलन ने दो दशक पहले पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बुरी तरह प्रभावित किया था। उन घटनाओं ने राज्य की छवि को निवेशकों के बीच नकारात्मक रूप से प्रभावित किया था। नई नीति इसी ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, ताकि भूमि विवाद की पुनरावृत्ति न हो।

कानून-व्यवस्था और निवेश वातावरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए निवेश को आकर्षित करने के लिए राज्य में स्थिर कानून-व्यवस्था सबसे ज़रूरी शर्त है। उन्होंने कहा, 'हम स्थिर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करके और रिश्वतखोरी एवं जबरन वसूली की पुरानी संस्कृति को पूरी तरह से समाप्त करके उद्योगपतियों के लिए उपयुक्त निवेश वातावरण सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।' उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार पर भारी कर्ज़ विरासत में छोड़ने का आरोप भी लगाया।

राजकोषीय चुनौती और राजस्व की ज़रूरत

अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ऋण और ब्याज चुकाने में प्रतिवर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च कर रही है। उन्होंने कहा, 'अगर यह पैसा उपलब्ध होता तो इसका उपयोग अधिक विकास कार्यों के लिए किया जा सकता था। पश्चिम बंगाल में जितने अधिक उद्योग और कारखाने स्थापित होंगे और जितना अधिक निवेश होगा, उतना ही अधिक राजस्व सरकारी खजाने में आएगा।'

रोज़गार और उद्यमिता पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बेरोज़गारी की समस्या केवल सरकारी नौकरियों से हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण आवश्यक है और नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराएगी। आने वाले समय में यह नीति पश्चिम बंगाल को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में पुनः स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक परीक्षा साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुआवज़े के विवाद और नौकरशाही की जड़ता अक्सर ऐसी नीतियों को कागज़ पर ही सीमित कर देती है। ₹1 लाख करोड़ के सालाना कर्ज़ बोझ के बीच निवेश आकर्षित करना ज़रूरी है, पर रिश्वतखोरी और जबरन वसूली खत्म करने का वादा तब तक विश्वसनीय नहीं होगा जब तक ज़मीन पर ठोस जवाबदेही तंत्र न दिखे। पश्चिम बंगाल को फिर से प्रमुख निवेश गंतव्य बनाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — पर इतिहास बताता है कि घोषणा और क्रियान्वयन के बीच की खाई ही असली परीक्षा है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल की सीधी भूमि खरीद नीति क्या है?
इस नीति के तहत राज्य सरकार स्वयं भूस्वामियों से सीधे ज़मीन खरीदेगी और फिर उसे उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को उपलब्ध कराएगी। इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण को लेकर होने वाले विवादों और तनाव से बचना है।
CM अधिकारी ने सिंगूर और नंदीग्राम का ज़िक्र क्यों किया?
सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए बड़े विवादों ने पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को दशकों तक प्रभावित किया था। CM अधिकारी ने यह स्पष्ट करने के लिए इनका उल्लेख किया कि नई नीति उस इतिहास की पुनरावृत्ति नहीं होने देगी।
पश्चिम बंगाल पर कितना कर्ज़ है और इसका उद्योग नीति से क्या संबंध है?
CM अधिकारी के अनुसार राज्य सरकार ऋण और ब्याज चुकाने में प्रतिवर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च कर रही है। इसी राजकोषीय दबाव को देखते हुए अधिक उद्योग और निवेश से राजस्व बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
नए उद्यमियों को राज्य सरकार क्या सुविधाएँ देगी?
CM अधिकारी ने घोषणा की कि राज्य सरकार नए उद्यमों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराएगी। साथ ही रिश्वतखोरी और जबरन वसूली की संस्कृति समाप्त करके बेहतर निवेश वातावरण बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
यह नीति कहाँ और किस अवसर पर घोषित की गई?
यह घोषणा 11 जुलाई को हुगली जिले के डंकुनी में एक होजरी निर्माण इकाई के शिलान्यास समारोह में की गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए नीति का विवरण साझा किया।
राष्ट्र प्रेस
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