पश्चिम बंगाल में सीधी भूमि खरीद नीति: CM सुवेंदु अधिकारी का उद्योग-अनुकूल बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार, 11 जुलाई को राज्य में नए उद्योग स्थापित करने हेतु सरकार द्वारा भूस्वामियों से सीधे ज़मीन खरीदने की नीति की घोषणा की। यह ऐलान हुगली जिले के डंकुनी में एक होजरी निर्माण इकाई के शिलान्यास समारोह के दौरान किया गया, जो राज्य में औद्योगिक निवेश को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सीधी भूमि खरीद नीति क्या है
मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्वयं भूस्वामियों से ज़मीन खरीदेगी और फिर उसे उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा, 'हमने सीधे भूमि खरीद की नीति तैयार कर ली है। राज्य सरकार ने पहले ही राज्य के अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों में सीधे भूमि खरीद की नीति शुरू कर दी थी और फिर उन्हें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को कांटेदार बाड़ लगाने के लिए सौंप दिया था। उद्योग के मामले में भी यही नीति अपनाई जाएगी।'
उन्होंने संभावित निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'हम नहीं चाहते कि उद्योग के लिए भूमि की उपलब्धता को लेकर वैसा तनाव फिर से पैदा हो, जैसा पहले सिंगूर और नंदीग्राम में हुआ था। मैं यहाँ उद्योग या व्यवसाय करने के इच्छुक लोगों को आश्वस्त करता हूँ कि आपको भूमि प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं होगी। हम सीधे भूमि खरीदेंगे और आपको देंगे।'
सिंगूर-नंदीग्राम की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए विवाद और आंदोलन ने दो दशक पहले पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बुरी तरह प्रभावित किया था। उन घटनाओं ने राज्य की छवि को निवेशकों के बीच नकारात्मक रूप से प्रभावित किया था। नई नीति इसी ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, ताकि भूमि विवाद की पुनरावृत्ति न हो।
कानून-व्यवस्था और निवेश वातावरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए निवेश को आकर्षित करने के लिए राज्य में स्थिर कानून-व्यवस्था सबसे ज़रूरी शर्त है। उन्होंने कहा, 'हम स्थिर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करके और रिश्वतखोरी एवं जबरन वसूली की पुरानी संस्कृति को पूरी तरह से समाप्त करके उद्योगपतियों के लिए उपयुक्त निवेश वातावरण सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।' उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार पर भारी कर्ज़ विरासत में छोड़ने का आरोप भी लगाया।
राजकोषीय चुनौती और राजस्व की ज़रूरत
अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ऋण और ब्याज चुकाने में प्रतिवर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च कर रही है। उन्होंने कहा, 'अगर यह पैसा उपलब्ध होता तो इसका उपयोग अधिक विकास कार्यों के लिए किया जा सकता था। पश्चिम बंगाल में जितने अधिक उद्योग और कारखाने स्थापित होंगे और जितना अधिक निवेश होगा, उतना ही अधिक राजस्व सरकारी खजाने में आएगा।'
रोज़गार और उद्यमिता पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बेरोज़गारी की समस्या केवल सरकारी नौकरियों से हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण आवश्यक है और नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराएगी। आने वाले समय में यह नीति पश्चिम बंगाल को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में पुनः स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक परीक्षा साबित होगी।