पश्चिम बंगाल पाठ्यक्रम से सिंगूर-नंदीग्राम अध्याय हटाने के संकेत, भाजपा विधायक सजल घोष का बयान

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पश्चिम बंगाल पाठ्यक्रम से सिंगूर-नंदीग्राम अध्याय हटाने के संकेत, भाजपा विधायक सजल घोष का बयान

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही पाठ्यपुस्तकें विवाद में आ गईं। भाजपा विधायक सजल घोष ने संकेत दिया कि सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन के अध्याय हटाए जा सकते हैं — वही अध्याय जो ममता बनर्जी ने 2011 में जोड़े थे। इतिहास को पाठ्यक्रम में लाने और हटाने का यह खेल बताता है कि बंगाल की राजनीति में कक्षा की किताबें भी सत्ता का औज़ार बन चुकी हैं।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक सजल घोष (बारानगर, उत्तर 24 परगना) ने 16 मई को संकेत दिया कि राज्य बोर्ड पाठ्यक्रम से सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन के अध्याय हटाए जा सकते हैं।
घोष ने तर्क दिया कि अध्याय में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी का उल्लेख है, जो कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में ED की गिरफ्तारी के बाद करीब तीन वर्ष जेल में रहे।
राज्य शिक्षा विभाग का कामकाज फिलहाल मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं देख रहे हैं; मंत्री की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
2007 में शुरू हुए सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलनों को 2011 में वाम मोर्चा के 34 वर्षीय शासन के पतन की प्रमुख वजह माना जाता है।
ममता बनर्जी सरकार ने 2011 में सत्ता में आने के बाद इन आंदोलनों के अध्याय पाठ्यक्रम में जोड़े थे।

पश्चिम बंगाल में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के सत्ता संभालते ही शिक्षा नीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बारानगर विधानसभा सीट (उत्तर 24 परगना) से हाल ही में निर्वाचित भाजपा विधायक सजल घोष ने शनिवार, 16 मई को संकेत दिया कि राज्य बोर्ड के स्कूली पाठ्यक्रम से सिंगूर और नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े अध्यायों को हटाया जा सकता है। ये अध्याय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व में चले उन आंदोलनों पर आधारित हैं जिन्होंने 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन के अंत में निर्णायक भूमिका निभाई थी।

विधायक का बयान और तर्क

सजल घोष, जो कोलकाता नगर निगम में भाजपा पार्षद भी हैं, शनिवार दोपहर एक काउंसलिंग कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'शैक्षणिक जगत के विभिन्न वर्गों से स्कूल पाठ्यक्रम में तत्काल बदलाव की मांग उठी है। नई राज्य सरकार निश्चित रूप से इस मामले पर विचार करेगी।'

घोष ने दावा किया कि सिंगूर भूमि आंदोलन से जुड़े अध्याय में पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी की भूमिका का भी उल्लेख है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस पूर्व मंत्री ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी के बाद करीब तीन वर्ष जेल में बिताए हों, उनका नाम स्कूली पाठ्यपुस्तक में कैसे बना रह सकता है।

शिक्षा विभाग की स्थिति

घोष ने यह भी बताया कि फिलहाल नए राज्य शिक्षा विभाग के मंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और विभाग का कामकाज मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं देख रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नई सरकार ने अभी तक पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं किया है।

सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स की छोटी कार परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध और पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम में इंडोनेशिया स्थित सलीम समूह की प्रस्तावित केमिकल हब परियोजना के खिलाफ ये आंदोलन 2007 में शुरू हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के विरुद्ध तब विपक्ष की नेता रहीं ममता बनर्जी ने इन आंदोलनों का नेतृत्व किया था।

इन आंदोलनों को 2011 में पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा के पतन की प्रमुख वजहों में माना जाता है। 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी सरकार ने इन आंदोलनों से जुड़े अध्यायों को राज्य बोर्ड के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया था — जो अब विवाद के केंद्र में हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि पाठ्यक्रम से ऐतिहासिक आंदोलनों के अध्याय हटाना शैक्षणिक स्वायत्तता के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नई सरकार का अगला कदम यह तय करेगा कि यह संकेत महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी है या पाठ्यक्रम में वास्तविक बदलाव की शुरुआत।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पश्चिम बंगाल इसका अपवाद नहीं है। ममता बनर्जी ने 2011 में जो अध्याय जोड़े थे, वे भी राजनीतिक आख्यान को मज़बूत करने का हिस्सा थे। असली सवाल यह है कि क्या एक विधायक के बयान को सरकारी नीति की दिशा माना जाए, या यह सिर्फ राजनीतिक संकेत है। शिक्षाविदों और नागरिक समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि पाठ्यक्रम में बदलाव शैक्षणिक आधार पर हो, न कि सत्ता-परिवर्तन की प्रतिक्रिया में।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन के अध्याय पश्चिम बंगाल के पाठ्यक्रम में कब और क्यों जोड़े गए थे?
2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी सरकार ने इन अध्यायों को राज्य बोर्ड के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया था। ये आंदोलन 2007 में वाम मोर्चा सरकार के भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध हुए थे और 2011 में 34 वर्षीय वाम शासन के अंत की प्रमुख वजह बने।
भाजपा विधायक सजल घोष ने अध्याय हटाने का तर्क क्या दिया?
सजल घोष ने कहा कि अध्याय में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी का उल्लेख है, जो कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में ED की गिरफ्तारी के बाद करीब तीन वर्ष जेल में रहे। उनका तर्क है कि ऐसे व्यक्ति का नाम स्कूली किताब में नहीं होना चाहिए।
क्या पश्चिम बंगाल सरकार ने पाठ्यक्रम बदलाव की आधिकारिक घोषणा की है?
नहीं, यह अभी तक केवल भाजपा विधायक सजल घोष का व्यक्तिगत बयान है। राज्य शिक्षा विभाग का कामकाज मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी देख रहे हैं और शिक्षा मंत्री की आधिकारिक नियुक्ति अभी नहीं हुई है।
सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन क्या थे?
सिंगूर (हुगली) में टाटा मोटर्स की छोटी कार परियोजना और नंदीग्राम (पूर्वी मिदनापुर) में सलीम समूह की केमिकल हब परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध 2007 में ये आंदोलन शुरू हुए थे। तब विपक्ष की नेता ममता बनर्जी ने इनका नेतृत्व किया था।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि सरकार वास्तव में ये अध्याय हटाती है, तो यह पाठ्यक्रम निर्माण की स्वायत्तता पर सवाल खड़े करेगा। आलोचकों का कहना है कि ऐतिहासिक आंदोलनों को राजनीतिक कारणों से पाठ्यपुस्तकों से हटाना शैक्षणिक दृष्टि से हानिकारक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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