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ममता बनर्जी का TMC समीक्षा बैठक में कड़ा संदेश: 'पार्टी छोड़नी हो तो अभी छोड़ें'

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ममता बनर्जी का TMC समीक्षा बैठक में कड़ा संदेश: 'पार्टी छोड़नी हो तो अभी छोड़ें'

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद ममता बनर्जी ने TMC की समीक्षा बैठक में दो-टूक कहा — जो साथ नहीं देना चाहते, वे अभी जा सकते हैं। 7 दिनों में जनसंपर्क रिपोर्ट, कालीघाट में विस्थापितों की सूची और चंद्रिमा भट्टाचार्य को कानूनी निगरानी — यह हार के बाद पुनर्निर्माण का पहला खाका है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने TMC समीक्षा बैठक में कहा कि पार्टी छोड़ने के इच्छुक नेता-कार्यकर्ता तुरंत ऐसा कर सकते हैं।
पार्टी नेतृत्व को 7 दिनों के भीतर क्षेत्र-आधारित जनसंपर्क कार्यक्रम की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
पूर्व मंत्री और वकील चंद्रिमा भट्टाचार्य को चुनाव-पश्चात कथित हिंसा में विस्थापितों को कानूनी सहायता की निगरानी का जिम्मा।
जिला नेताओं को विस्थापितों की सूची कालीघाट कार्यालय में सीधे ममता को सौंपने का निर्देश।
ममता ने स्पष्ट किया कि संगठनात्मक मामलों में अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा; नेताओं को शिकायत मीडिया में नहीं, पार्टी के भीतर रखनी होगी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में शुक्रवार, 15 मई 2026 को असंतुष्ट नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया — जो पार्टी में बने रहने के इच्छुक नहीं हैं, वे तुरंत इसे छोड़ सकते हैं। बैठक में उपस्थित एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी।

बैठक में क्या हुआ

बैठक में उपस्थित सूत्र के अनुसार, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि जो नेता और कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस छोड़ने की सोच रहे हैं, वे बिना किसी रोक-टोक के ऐसा कर सकते हैं — और वह उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि संकट की इस घड़ी में पार्टी के साथ खड़े रहने वाले लोग ही पार्टी की 'अनमोल संपत्ति' बनेंगे और उन्हीं के साथ मिलकर वह TMC का पुनर्निर्माण करेंगी।

संगठनात्मक पुनर्गठन के निर्देश

ममता बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को सात दिनों के भीतर क्षेत्र-आधारित जनसंपर्क कार्यक्रम फिर से शुरू करने की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने ब्लॉक, नगर और क्षेत्र स्तर पर बैठकें शुरू करने को कहा, ताकि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी अपनी ज़मीनी उपस्थिति फिर से मज़बूत कर सके।

उन्होंने जिला नेताओं से चुनाव के बाद कथित तौर पर विस्थापित हुए लोगों की सूची सीधे दक्षिण कोलकाता स्थित उनके कालीघाट आवास-सह-कार्यालय में उन्हें सौंपने को कहा।

कानूनी सहायता की व्यवस्था

पश्चिम बंगाल की पूर्व वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और वकील चंद्रिमा भट्टाचार्य को चुनाव के बाद कथित हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों को कानूनी सहायता दिलाने की प्रक्रिया की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। यह कदम संकेत देता है कि पार्टी चुनाव-पश्चात हिंसा के मामलों को गंभीरता से उठाने की तैयारी में है।

अनुशासन पर कड़ा रुख

ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक मामलों में अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा। उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि किसी भी शिकायत की स्थिति में सार्वजनिक बयान देने या मीडिया से बात करने के बजाय पार्टी के आंतरिक मंच का उपयोग किया जाए। यह निर्देश उस पृष्ठभूमि में आया है जब चुनावी हार के बाद कई नेता खुलकर बोल रहे थे।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC के भीतर बिखराव की खबरें सामने आ रही हैं। ममता बनर्जी का यह कदम पार्टी को एकजुट करने और विपक्षी भूमिका में प्रभावी संगठन खड़ा करने की दिशा में पहला ठोस संकेत माना जा रहा है। अगले सात दिनों में जनसंपर्क रिपोर्ट और जिला-स्तरीय सूचियाँ पार्टी की पुनर्निर्माण रणनीति की दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दरअसल एक क्लासिक नेतृत्व पुनर्स्थापन की कोशिश है — जो नेता हार के बाद बागी हुए, उन्हें सार्वजनिक रूप से चुनौती देकर बाकी को एकजुट करना। असली सवाल यह है कि क्या TMC विपक्ष में रहते हुए वह संगठनात्मक अनुशासन बनाए रख सकती है, जो सत्ता में रहते हुए भी अक्सर कमज़ोर दिखी। चुनाव-पश्चात हिंसा के आरोपों पर कानूनी मोर्चा खोलना पार्टी को सहानुभूति दिला सकता है, लेकिन यह तभी प्रभावी होगा जब जमीनी जनसंपर्क वास्तव में सात दिनों में शुरू हो — महज़ कागज़ी रिपोर्ट न बने।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने TMC समीक्षा बैठक में क्या कहा?
बैठक में उपस्थित सूत्र के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा कि जो नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे तुरंत ऐसा कर सकते हैं और वह उन्हें रोकने का प्रयास नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि संकट में साथ रहने वाले लोग पार्टी की 'अनमोल संपत्ति' बनेंगे।
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद TMC में क्या संकट है?
विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के कई नेता बागी हो गए और सार्वजनिक बयानबाज़ी शुरू हो गई। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी ने समीक्षा बैठक बुलाकर पार्टी में अनुशासन और एकजुटता का संदेश दिया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य को क्या जिम्मेदारी दी गई है?
पूर्व वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और वकील चंद्रिमा भट्टाचार्य को चुनाव के बाद कथित हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों को कानूनी सहायता दिलाने की प्रक्रिया की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है।
TMC के पुनर्निर्माण की अगली योजना क्या है?
ममता बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को 7 दिनों के भीतर क्षेत्र-आधारित जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू करने की रिपोर्ट सौंपने और ब्लॉक, नगर व क्षेत्र स्तर पर बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। विस्थापितों की सूची सीधे कालीघाट कार्यालय में जमा करानी होगी।
क्या TMC में अब ममता बनर्जी का एकछत्र नियंत्रण रहेगा?
बैठक में ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि संगठनात्मक मामलों में अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा। उन्होंने नेताओं को निर्देश दिया कि शिकायतें मीडिया के बजाय पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाई जाएं।
राष्ट्र प्रेस
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