5 नवंबर 2026
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पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति आज होगी जारी, 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर मुख्यमंत्री सुवेंदु का जोर

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पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति आज होगी जारी, 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर मुख्यमंत्री सुवेंदु का जोर

सारांश

पाँच महीनों की देरी के बाद पश्चिम बंगाल आज नई औद्योगिक नीति जारी करेगा — मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का सबसे बड़ा आर्थिक दाँव। TMC युग में बंद पड़ी प्रोत्साहन नीति की वापसी, बिजली छूट और PF प्रतिपूर्ति के साथ बंगाल औद्योगिक मानचित्र पर नई जगह बनाने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी गुरुवार, 6 नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति औपचारिक रूप से जारी करेंगे।
राज्य मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को नीति के मसौदे को मंजूरी दी थी।
नीति में बिजली शुल्क में छूट , ऋण ब्याज सब्सिडी और PF प्रतिपूर्ति जैसे प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं।
TMC के नेतृत्व वाली ममता बनर्जी सरकार के दौरान बंद की गई निवेशक प्रोत्साहन नीति को नए स्वरूप में पुनः लागू किया जाएगा।
मुख्य फोकस पिछड़े इलाकों में निवेश आकर्षित करने और नौकरशाही की अड़चनें दूर करने पर होगा।
नीति की घोषणा की समय सीमा पहले 15 अगस्त 2026 (स्वतंत्रता दिवस) थी, जिसे कई बार आगे बढ़ाया गया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी गुरुवार, 6 नवंबर 2026 को राज्य की बहुप्रतीक्षित नई औद्योगिक नीति औपचारिक रूप से जारी करेंगे। नई नीति में निवेश प्रस्तावों के लिए अनावश्यक नौकरशाही बाधाओं को हटाकर और त्वरित सरकारी मंजूरी सुनिश्चित करके 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में आसानी) को केंद्र में रखा गया है। राज्य मंत्रिमंडल 28 अक्टूबर को इस नीति के मसौदे को मंजूरी दे चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद गुरुवार दोपहर को नई औद्योगिक नीति की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। नीति का मसौदा मंत्रियों के एक समूह ने तैयार किया है, जिसमें उद्योगपतियों, उद्योग संघों और आर्थिक विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिया गया।

राज्य सचिवालय के एक सूत्र के अनुसार, "औद्योगिक नीति का यह मसौदा उन नीतियों के आधार पर तैयार किया गया है जिन्हें औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों ने अपनाया है।" गौरतलब है कि इस घोषणा की समय सीमा पहले 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में कई बार आगे बढ़ाया गया।

प्रोत्साहन नीति की वापसी

नई औद्योगिक नीति की एक प्रमुख विशेषता यह है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली ममता बनर्जी सरकार के दौरान समाप्त की गई निवेशक प्रोत्साहन नीति को अब अधिक व्यवस्थित और व्यापक स्वरूप में पुनः लागू किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) के सूत्रों के अनुसार, "नई नीति में निवेशकों के हितों, रोजगार सृजन की संभावनाओं और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित जमीन मालिकों जैसे अन्य हितधारकों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।" इसी जटिल संतुलन को साधने में लगे समय के कारण नीति की घोषणा बार बार टलती रही।

प्रस्तावित प्रोत्साहनों का विवरण

राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि नई नीति के तहत निवेशकों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों में तीन प्रमुख घटक हो सकते हैं। पहला — परियोजना के शुरुआती वर्षों में बिजली शुल्क में छूट; दूसरा — उद्यमी द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज का एक निश्चित हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन करना; और तीसरा — कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) में कंपनी के योगदान की प्रतिपूर्ति करना।

सूत्रों ने बताया कि मुख्य ध्यान पिछड़े इलाकों में निवेश आकर्षित करने पर होगा, ताकि वहाँ स्थापित होने वाली औद्योगिक परियोजनाएँ उस क्षेत्र के सामाजिक आर्थिक विकास से सीधे जुड़ सकें।

मुख्यमंत्री का विज़न

इस साल मई 2026 में पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अधिकारी ने घोषणा की थी कि राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए उसी वर्ष एक व्यापक औद्योगिक नीति तैयार की जाएगी। इसके लिए जून 2026 में मंत्रियों के एक समूह को नीति निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

नीति की घोषणा से पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि यह नीति राज्य में निवेश के लिए आदर्श माहौल तैयार करेगी, नौकरशाही की अड़चनें दूर करेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल को औद्योगिक निवेश के मामले में गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना है। नई नीति के क्रियान्वयन की गति और निवेशकों की वास्तविक प्रतिक्रिया ही यह तय करेगी कि बंगाल औद्योगिक मानचित्र पर अपनी खोई हुई जगह पुनः हासिल कर पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक साख का भी परीक्षण है — राज्य को दशकों के औद्योगिक पलायन के बाद वापस मानचित्र पर लाने की चुनौती। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या प्रोत्साहनों की यह सूची वास्तविक निवेश में तब्दील होगी, या यह भी उन घोषणाओं की कतार में जुड़ जाएगी जो बंगाल में बार बार की गई पर ज़मीन पर नहीं उतरीं। नीति के बार बार टलने का इतिहास और मसौदे की जटिलता संकेत देती है कि हितधारकों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं था। अब परीक्षा क्रियान्वयन की है — खासतौर पर तब, जब गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य पहले से ही निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति क्या है?
यह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार द्वारा तैयार एक व्यापक नीति है, जिसे 6 नवंबर 2026 को जारी किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य में निवेश आकर्षित करना, नौकरशाही की अड़चनें दूर करना और रोजगार सृजन बढ़ाना है।
नई नीति में निवेशकों को क्या क्या प्रोत्साहन मिलेंगे?
नीति में बिजली शुल्क में छूट, उद्यमी के ऋण पर ब्याज का एक हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन करना और कर्मचारियों के PF में कंपनी के योगदान की प्रतिपूर्ति जैसे प्रोत्साहन शामिल होने की संभावना है। खास ध्यान पिछड़े इलाकों में निवेश आकर्षित करने पर होगा।
नई औद्योगिक नीति की घोषणा में इतनी देरी क्यों हुई?
शुरुआत में इसे 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस पर जारी करने की योजना थी। WBIDC सूत्रों के अनुसार, निवेशकों, रोजगार और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित जमीन मालिकों के हितों के बीच संतुलन बनाने की जटिलता के कारण समय सीमा बार बार आगे बढ़ानी पड़ी।
ममता बनर्जी सरकार की नीतियों से यह नई नीति कैसे अलग है?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली ममता बनर्जी सरकार के दौरान निवेशक प्रोत्साहन नीति को समाप्त कर दिया गया था। नई सरकार इसे अधिक व्यवस्थित और व्यापक रूप में पुनः लागू कर रही है, जिसमें औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं को आधार बनाया गया है।
नई नीति किसके लिए सबसे अधिक फायदेमंद होगी?
नीति का मुख्य फोकस उन निवेशकों पर है जो पिछड़े इलाकों में उद्योग लगाना चाहते हैं। इसके अलावा, नौकरशाही की प्रक्रिया सरल होने से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी फायदा होने की उम्मीद है, साथ ही स्थानीय रोजगार चाहने वाले युवाओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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