5 नवंबर 2026
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जंतर-मंतर प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर तलब किया

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जंतर-मंतर प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर तलब किया

सारांश

जंतर-मंतर पर अनाधिकृत प्रवेश मामले में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दूसरी बार तलब किया है। पहले समन पर पेश न होने वाले दोनों नेता 21 अक्टूबर को तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे और लिखित वचनपत्र देने के बाद शांति बनाए रखने का वादा किया था।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 नवंबर 2026 को राजौरी गार्डन क्राइम ब्रांच में पूछताछ के लिए तलब किया।
दोनों नेता अक्टूबर में भेजे गए पहले समन पर पेश नहीं हुए थे और अतिरिक्त समय माँगा था।
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर अनाधिकृत प्रवेश के बाद दोनों करीब एक सप्ताह तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में रहे।
21 अक्टूबर को एसईएम ऋतु राज ने ₹50,000-₹50,000 के मुचलके और लिखित वचनपत्र पर दोनों को रिहा किया।
प्रदर्शन मतदाता सूची के एसआईआर में कथित अनियमितताओं और सीईसी ज्ञानेश कुमार के विरोध में किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने 5 नवंबर 2026 को जंतर-मंतर अनाधिकृत प्रवेश मामले में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए तलब किया है। दोनों नेताओं को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में दोपहर तक हाजिर होने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब उन्हें समन भेजा गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

13 अक्टूबर की घटना इस पूरे विवाद की जड़ है, जब सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत 11 अन्य लोग जंतर-मंतर में अनाधिकृत रूप से दाखिल हुए थे। जंतर-मंतर को प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया है।

दिल्ली पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था। अजिंक्य शिंदे को जमानत बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका करीब एक सप्ताह तक तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में रहे।

पहले के समन पर नहीं हुए पेश

अक्टूबर में ही क्राइम ब्रांच ने दास और रांका को समन भेजा था, लेकिन दोनों उस समन पर पेश नहीं हुए। बाद में उन्होंने पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय की माँग की। उनसे जुड़े मामले अक्टूबर में ही क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित किए जा चुके थे।

रिहाई की शर्तें और लिखित वचनपत्र

21 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ऋतु राज ने दोनों कार्यकर्ताओं को ₹50,000-₹50,000 के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड भरवाकर रिहा करने का आदेश दिया था। एसईएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत यह फैसला सुनाया।

दोनों नेताओं ने लिखित वचनपत्र में शांति बनाए रखने, जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान न करने और न्यायपालिका तथा एसईएम कोर्ट में पूरा भरोसा जताने का वादा किया।

प्रदर्शन क्यों हुआ था

सीजेपी सदस्य मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी की थी। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को लेकर विभिन्न राजनीतिक और नागरिक समूहों में व्यापक बहस जारी है।

आगे क्या होगा

अब जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को दोबारा तलब किया गया है, उनके 5 नवंबर को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने की उम्मीद है। जाँच पूरी होने तक अनाधिकृत प्रवेश और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामले क्राइम ब्रांच की निगरानी में रहेंगे। इस मामले का अगला मोड़ इस बात पर निर्भर करेगा कि पूछताछ में क्या सामने आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह पूरी बहस केवल प्रदर्शनकारियों की कानूनी जवाबदेही तक सिमट कर रह जाएगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने क्यों तलब किया?
दोनों को जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को हुए अनाधिकृत प्रवेश और विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में तलब किया गया है। यह दूसरा समन है क्योंकि वे अक्टूबर के पहले समन पर पेश नहीं हुए थे।
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में अब तक क्या हुआ?
13 अक्टूबर को सीजेपी के सदस्य जंतर-मंतर में घुसे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। सौरव दास और आशुतोष रांका करीब एक सप्ताह तिहाड़ जेल में रहे और 21 अक्टूबर को ₹50,000-₹50,000 के मुचलके व लिखित वचनपत्र पर रिहा किए गए।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) का प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
सीजेपी सदस्य मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी की थी।
एसईएम कोर्ट ने दास और रांका को किन शर्तों पर रिहा किया?
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत दोनों को ₹50,000-₹50,000 के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहा किया। दोनों ने शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन का आह्वान न करने का लिखित वचन दिया।
क्या जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन अब प्रतिबंधित है?
प्रशासन ने जंतर-मंतर को अधिकृत विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है, इसलिए वहाँ प्रदर्शन करना अब अनाधिकृत माना जाता है। इसी आधार पर 13 अक्टूबर को सीजेपी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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