21 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर मामला: सौरव दास और आशुतोष रांका को लिखित माफी व शपथ पत्र के बाद जमानत

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जंतर-मंतर मामला: सौरव दास और आशुतोष रांका को लिखित माफी व शपथ पत्र के बाद जमानत

सारांश

जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले में सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत ने लिखित माफी, शपथ पत्र और ₹50,000 बांड की शर्तों पर रिहा किया। दिल्ली पुलिस की हिरासत विस्तार की माँग नामंजूर, अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को।

मुख्य बातें

सौरव दास और आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर 2026 को न्यायिक हिरासत से रिहा किया गया।
एसईएम ऋतु राज ने ₹50,000 के व्यक्तिगत और जमानत बांड तथा लिखित शपथ पत्र पर रिहाई का आदेश दिया।
दोनों ने आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर के गैर-अधिसूचित होने तक वहाँ कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा।
दिल्ली पुलिस की तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत की माँग अदालत ने अस्वीकार की।
कार्यकर्ताओं के वकील ने एक पार्टी सदस्य की कथित टिप्पणी के लिए अदालत से बिना शर्त माफी माँगी।
मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 , दोपहर 3 बजे निर्धारित।

नई दिल्ली में जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और कार्यकर्ता आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर 2026 को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया गया। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत ने दोनों से लिखित माफीनामा और शपथ पत्र लेने के बाद ₹50,000 के व्यक्तिगत एवं जमानत बांड पर उनकी रिहाई का निर्देश दिया।

अदालत की शर्तें और लिखित आश्वासन

एसईएम न्यायाधीश ऋतु राज के समक्ष दोनों कार्यकर्ताओं ने लिखित आश्वासन दिया कि जब तक जंतर-मंतर स्थल को कानून के अनुसार गैर-अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वे वहाँ किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे और शांति बनाए रखेंगे।

अपने बयान में दोनों ने कहा, 'हम शांति, कानून व्यवस्था और जन शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। जब तक जंतर-मंतर को कानून के अनुसार अधिसूचना से मुक्त नहीं कर दिया जाता, तब तक हम वहाँ किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।' दोनों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन 'संविधान की सीमाओं के भीतर' ही होगा।

अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 135(3) के तहत पाया कि शांति भंग को रोकने के लिए आवश्यक तत्काल उपाय इन लिखित वचनपत्रों के निष्पादन के माध्यम से पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

दिल्ली पुलिस की हिरासत विस्तार की माँग खारिज

एसईएम का यह रिहाई आदेश दिल्ली पुलिस की उस माँग के बाद आया, जिसमें दोनों की न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। पुलिस ने तर्क दिया था कि दोनों कार्यकर्ताओं के बाद के बयानों और आचरण के मद्देनजर शांति भंग की आशंकाएँ बनी हुई हैं।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं ने इसी तरह की गतिविधियों से दूर रहने की अपनी इच्छा के संदर्भ में अदालत और मीडिया के समक्ष विरोधाभासी रुख अपनाया था। अदालत ने इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए भी लिखित वचनपत्रों को पर्याप्त उपाय माना।

वकील की बिना शर्त माफी

कार्यवाही के दौरान कार्यकर्ताओं के वकील ने अदालत से बिना शर्त माफी माँगी। यह माफी उस टिप्पणी के लिए माँगी गई जो कथित तौर पर सीजेपी के एक सदस्य द्वारा उस समय की गई थी जब दोनों नेताओं को पहले तिहाड़ जेल ले जाया जा रहा था। दोनों कार्यकर्ताओं ने एसईएम न्यायालय सहित न्यायपालिका और उसके सभी अंगों में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया।

आगे की कार्यवाही

अदालत ने दोनों को सुनवाई की हर तारीख पर उपस्थित होने और अपने बांड एवं स्वैच्छिक वचनबद्धताओं की शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। जाँच अधिकारी को अगली सुनवाई में जमानतदारों की सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया गया है।

जाँच कानून के अनुसार जारी रहेगी और मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई है — जो यह तय करेगी कि जमानत की शर्तें दोनों कार्यकर्ताओं के भविष्य के व्यवहार पर किस हद तक प्रभावी रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वास्तव में प्रदर्शन का अधिकार प्रशासनिक अधिसूचना की शर्त पर टाँग देती है — जो एक बारीक लेकिन उल्लेखनीय संवैधानिक प्रश्न उठाती है। दिल्ली पुलिस का 'विरोधाभासी रुख' वाला तर्क अदालत में नहीं चला, जो इंगित करता है कि नागरिक समाज कार्यकर्ताओं की निवारक हिरासत के लिए ऊँचा मानदंड बना हुआ है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरव दास और आशुतोष रांका को किस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
दोनों को जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले में न्यायिक हिरासत में लिया गया था। यह मामला जंतर-मंतर स्थल पर कथित अनधिकृत विरोध प्रदर्शन से संबंधित है।
एसईएम अदालत ने जमानत देने के लिए क्या शर्तें रखीं?
एसईएम ऋतु राज ने ₹50,000 के व्यक्तिगत और जमानत बांड के साथ लिखित माफीनामा और शपथ पत्र की शर्त पर जमानत दी। दोनों ने यह भी आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर के गैर-अधिसूचित होने तक वहाँ कोई विरोध नहीं करेंगे।
दिल्ली पुलिस की हिरासत विस्तार की माँग क्यों खारिज हुई?
अदालत ने पाया कि बीएनएसएस की धारा 135(3) के तहत शांति भंग को रोकने के लिए लिखित वचनपत्र पर्याप्त उपाय हैं। पुलिस के 'विरोधाभासी रुख' और 'शांति भंग की आशंका' के तर्क अदालत में पर्याप्त नहीं माने गए।
मामले में आगे की सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे निर्धारित है। जाँच अधिकारी को उस सुनवाई में जमानतदारों की सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया है।
कार्यकर्ताओं के वकील ने अदालत से माफी क्यों माँगी?
कार्यवाही के दौरान वकील ने उस टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी माँगी जो कथित तौर पर सीजेपी के एक सदस्य द्वारा तब की गई थी जब दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल ले जाया जा रहा था। यह माफी एसईएम न्यायालय सहित न्यायपालिका के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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