19 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर मामला: सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ी, एसईएम कोर्ट का आदेश

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जंतर-मंतर मामला: सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ी, एसईएम कोर्ट का आदेश

सारांश

जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले में सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को एसईएम कोर्ट से राहत नहीं मिली — तत्काल रिहाई की मांग खारिज होने के बाद न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। अगली सुनवाई दो दिन बाद होनी है।

मुख्य बातें

सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत एसईएम कोर्ट ने 19 अक्टूबर 2026 को दो दिन के लिए और बढ़ाई।
दोनों नेताओं को पहली बार 14 अक्टूबर को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
आरोप है कि दोनों ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश किया और पुलिस कार्य में बाधा डाली।
सीजेपी अधिवक्ता रत्ना सिंह ने तत्काल रिहाई की मांग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा किया जा चुका है, उन्हें छह महीने शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया।

जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर 2026 को दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई है। नई दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के तर्कों को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। दोनों नेताओं पर 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश और पुलिसकर्मियों के कार्य में बाधा डालने के आरोप हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को दोनों नेताओं की पाँच दिन की न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद उन्हें एसईएम कोर्ट में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख और अधिवक्ता रत्ना सिंह ने दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

रत्ना सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आरोप लगाया कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है और सरकारी पक्ष की ओर से केवल अनुमान-आधारित दलीलें पेश की गईं। इसके बावजूद कोर्ट ने हिरासत विस्तार का आदेश दिया।

पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि सीजेपी के कुछ कार्यकर्ता निजी परिसर के रास्ते प्रदर्शन स्थल तक पहुँचे थे। पुलिस का तर्क था कि कानून के बार-बार उल्लंघन और भविष्य में पुनरावृत्ति की आशंका को देखते हुए हिरासत जारी रखना आवश्यक है।

गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पहली बार 14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब दो दिन के इस विस्तार के साथ उनकी हिरासत की कुल अवधि और लंबी हो गई है।

अजिंक्य शिंदे को मिली राहत

इसी मामले में सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे को कोर्ट ने पहले ही व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया है। उन्हें आदेश दिया गया है कि वे छह महीने तक शांति और सदाचार बनाए रखेंगे। शिंदे की रिहाई और दास-रांका की हिरासत के बीच का अंतर सीजेपी पक्ष के लिए एक कानूनी विसंगति की तरह सामने आ रहा है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब सीजेपी और उसकी कानूनी टीम कोर्ट में हिरासत के खिलाफ तर्क मजबूत करने की तैयारी में है। अधिवक्ता रत्ना सिंह ने संकेत दिया है कि वे अगली सुनवाई में और ठोस कानूनी दलीलें पेश करेंगी। दोनों नेताओं को रिहाई के लिए कम से कम दो दिन और प्रतीक्षा करनी होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरव दास और आशुतोष रांका को किस मामले में हिरासत में लिया गया है?
दोनों नेताओं पर 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर में अनधिकृत तरीके से प्रवेश करने और पुलिसकर्मियों के कार्य में बाधा डालने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, सीजेपी के कुछ कार्यकर्ता निजी परिसर के रास्ते प्रदर्शन स्थल तक पहुँचे थे।
न्यायिक हिरासत कब तक बढ़ाई गई है?
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट ने 19 अक्टूबर 2026 को दोनों नेताओं की हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी है। इससे पहले 14 अक्टूबर को पाँच दिन की हिरासत का आदेश दिया गया था।
सीजेपी की कानूनी टीम ने क्या तर्क दिए?
सीजेपी की अधिवक्ता रत्ना सिंह ने कोर्ट में तत्काल रिहाई की मांग की और कहा कि हिरासत बढ़ाने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। उनका आरोप था कि सरकारी पक्ष ने केवल अनुमान-आधारित दलीलें पेश कीं, जो कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं।
अजिंक्य शिंदे को रिहाई कैसे मिली जबकि बाकी दोनों हिरासत में हैं?
सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे को कोर्ट ने व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया और उन्हें छह महीने तक शांति व सदाचार बनाए रखने का निर्देश दिया गया। सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत जारी है, हालाँकि तीनों पर आरोप एक ही मामले से संबंधित हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद होने की संभावना है। उस सुनवाई में ही स्पष्ट होगा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहाई मिलती है या हिरासत और बढ़ाई जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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