21 अक्टूबर 2026
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दिल्ली: एसईएम कोर्ट ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया

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दिल्ली: एसईएम कोर्ट ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया

सारांश

दिल्ली की एसईएम कोर्ट ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया — दिल्ली पुलिस की तीन दिन हिरासत विस्तार की माँग खारिज। दोनों ने हाईकोर्ट में दायर याचिका भी वापस ली। मामला विरोध के अधिकार और सार्वजनिक शांति के बीच तनाव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

एसईएम कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2026 को सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया।
दिल्ली पुलिस ने 3 दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज किया।
दोनों नेताओं को 2 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद कोर्ट में पेश किया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका एसईएम कोर्ट से राहत मिलने के बाद वापस ली गई।
हाईकोर्ट ने सुनवाई में कहा कि शांति भंग की आशंका होने पर संगठन की पहचान और उद्देश्य जाँचना उचित है।

विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश सुनाया। दोनों नेताओं को दो दिन की न्यायिक हिरासत के बाद एसईएम कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था, जहाँ कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की हिरासत विस्तार की माँग खारिज करते हुए रिहाई का आदेश दिया।

मामले का घटनाक्रम

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ाया जाए। हालाँकि एसईएम कोर्ट ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया और रिहाई का आदेश जारी किया। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका वापस

सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत के विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एसईएम कोर्ट ने उन्हें पहले 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसके बाद दोनों हाईकोर्ट पहुँचे थे। बुधवार को एसईएम कोर्ट से राहत मिलने के बाद दोनों ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियाँ

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि सौरव दास 27 वर्ष और आशुतोष रांका 31 वर्ष के हैं। इस पर न्यायाधीश ने टिप्पणी की, 'तो ये जेन-जी नहीं हैं।' जज ने यह भी जानना चाहा कि 'मिलेनियल्स' और 'जेन-जी' की आयु सीमा क्या होती है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका हो, तो व्यक्ति की पहचान, उसकी गतिविधियाँ और उसकी मंशा — ये सभी सवाल प्रासंगिक हो जाते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विरोध करने का अधिकार निर्विवाद है, परन्तु जब मजिस्ट्रेट शांति भंग की संभावना पर विचार करता है, तो संगठन की पहचान और उद्देश्य भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

प्रदर्शन के स्वरूप पर कोर्ट की दृष्टि

कोर्ट ने यह भी कहा कि शुरुआत में यह छात्रों का प्रदर्शन था जिसमें बच्चे और विद्यार्थी शामिल थे, लेकिन अब प्रदर्शन का मुद्दा और उद्देश्य बदल चुका है। लोग वही हैं, किंतु उनकी माँग और संगठनात्मक पहचान बदली हुई है। इसी संदर्भ में कोर्ट ने संगठन के वास्तविक मकसद को समझना आवश्यक बताया।

आगे क्या

एसईएम कोर्ट के रिहाई आदेश के बाद अब यह देखना होगा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है। सीजेपी की ओर से भी अपनी आगामी गतिविधियों को लेकर कोई आधिकारिक बयान अपेक्षित है। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच की बहस को एक बार फिर सतह पर ले आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसईएम कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को क्यों रिहा किया?
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2026 को दोनों नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया क्योंकि दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत विस्तार का अनुरोध कोर्ट को स्वीकार्य नहीं लगा। दोनों को दो दिन की न्यायिक हिरासत के बाद कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था।
सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक राजनीतिक दल है जिसके प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका हैं। इस मामले में पार्टी के इन दोनों नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका क्यों वापस ली गई?
सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को जब एसईएम कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दे दिया, तो याचिका का उद्देश्य पूरा हो गया और दोनों ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या टिप्पणी की?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जब शांति भंग की आशंका हो तो व्यक्ति की पहचान, उसका संगठन और उसकी मंशा महत्वपूर्ण हो जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विरोध का अधिकार निर्विवाद है, लेकिन जब प्रदर्शन का उद्देश्य बदल जाए तो संगठनात्मक पहचान की जाँच करना उचित है।
दिल्ली पुलिस ने और कितने दिन हिरासत माँगी थी?
दिल्ली पुलिस ने एसईएम कोर्ट से सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को तीन और दिनों के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने यह अनुरोध अस्वीकार करते हुए दोनों की रिहाई का आदेश सुनाया।
राष्ट्र प्रेस
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