दिल्ली हाईकोर्ट की 'जेन-जी' टिप्पणी के बाद सीजेपी नेताओं सौरव दास व आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट में 22 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणियों के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत ने उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया था, जिसके विरुद्ध दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
कोर्ट में उम्र और 'जेन-जी' पर चर्चा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि सौरव दास की उम्र 27 वर्ष और आशुतोष रांका की उम्र 31 वर्ष है। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, 'तो ये जेन-जी नहीं हैं।' न्यायाधीश ने यह भी जानना चाहा कि 'मिलेनियल्स' और 'जेन-जी' की आयु सीमा क्या मानी जाती है।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ
अदालत ने कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न होती है, तो प्रदर्शनकारी की पहचान, उसकी भूमिका और उसकी मंशा—ये सभी पहलू प्रासंगिक हो जाते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया, 'विरोध करने का अधिकार निर्विवाद है, लेकिन जब मजिस्ट्रेट शांति भंग की आशंका पर विचार करता है, तो ये सवाल अहम हो जाते हैं।'
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे और छात्र शामिल थे, किंतु अब प्रदर्शन का मुद्दा बदल गया है। लोग वही हैं, परंतु उनकी माँगें और उद्देश्य बदल गए हैं। इसलिए संगठन की असली पहचान और उसके वास्तविक मकसद पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बार-बार प्रदर्शन पर कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी समूह के सदस्य बार-बार भिन्न-भिन्न मुद्दों पर सड़कों पर उतरते हैं, तो उनके प्रदर्शन के उद्देश्य की पड़ताल ज़रूरी हो जाती है। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उसके सामने सीमित प्रश्न यह है कि बॉन्ड देने की शर्त लागू करने की माँग उचित है या नहीं—इन व्यापक मुद्दों पर सुनवाई अभी नहीं हो रही।
याचिका वापस लेने का निर्णय
कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इस प्रकार एसईएम कोर्ट के न्यायिक हिरासत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली गई।
मामले की पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया था। आरोप है कि दोनों ने जंतर-मंतर पर लगे बैरिकेड्स का गेट फाँदकर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया। 14 अक्टूबर को उन्हें पाँच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, और 19 अक्टूबर को यह अवधि दो और दिनों के लिए बढ़ा दी गई। अब जबकि हाईकोर्ट से राहत की कोशिश विफल रही, मामला निचली अदालत के स्तर पर ही आगे बढ़ेगा।