सीजेपी लीगल हेड रत्ना सिंह बोलीं — 'अदालत की कार्यवाही मजाक जैसी', सौरव दास व आशुतोष रांका की हिरासत दो दिन और बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर 2026 को दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद संगठन के पदाधिकारियों और वकीलों ने अदालती कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने खुलकर कहा कि अदालत के भीतर जो हो रहा है, वह 'मजाक जैसा' है और कानून के नजरिए से कोई सार्थक चर्चा नहीं हुई।
हिरासत विस्तार और प्रक्रियागत सवाल
अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अभिक चिमनी ने बताया कि जब वे अदालत पहुँचे, तब तक पाँच दिन की पूर्व-निर्धारित न्यायिक हिरासत की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली सुनवाई में अदालत ने जमानतदारों की ओर से पेश दस्तावेजों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट या वैध नहीं माना था, जिसके बाद वे नए जमानतदारों के दस्तावेज लेकर अदालत पहुँचे।
अधिवक्ता अभिष्त हेल ने कहा कि तकनीकी रूप से अब न्यायिक हिरासत के छह दिन पूरे हो चुके हैं। उनके अनुसार पाँच दिन की हिरासत पूरी होने के बाद मामले पर दोबारा सुनवाई हुई, जिसमें हिरासत को और आगे बढ़ा दिया गया।
रत्ना सिंह की कड़ी प्रतिक्रिया
सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने अदालत की कार्यवाही पर अत्यंत कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि अब इसे अदालत कहना भी चाहिए या नहीं, क्योंकि यहाँ कानून के नजरिए से कोई बात ही नहीं हुई है।' रत्ना सिंह ने पूरे मामले को न्याय व्यवस्था के लिए 'गंभीर चिंता का विषय' करार दिया और जाँच की माँग की।
उन्होंने यह भी कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि किस तरह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलते हुए कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उन्होंने अन्य अदालतों से अपील की कि वे इस मामले में सामने आकर स्थिति पर ध्यान दें।
प्रवक्ता और अन्य वकीलों की आलोचना
सीजेपी की प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने भी हिरासत बढ़ाए जाने को 'निंदनीय' बताया। उन्होंने सवाल किया कि अदालतों में न्याय की प्रक्रिया ऐसी क्यों होनी चाहिए। पसरीचा ने पूछा कि आखिर इन दोनों युवकों ने कौन सा अपराध किया है, जिसके कारण उन्हें इस प्रकार हिरासत में रखा जा रहा है।
अधिवक्ता पुष्प शर्मा ने आरोप लगाया कि अदालत की कार्यवाही में कानूनी पहलुओं के बजाय 'राजनीतिक रूप से सही दिखने' की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'अंदर जो कुछ हो रहा है, वह कानून और न्याय के लिहाज से चौंकाने वाला और बेतुका है।'
आगे की कानूनी राह
सीजेपी के पदाधिकारियों और वकीलों ने संकेत दिया है कि वे हिरासत बढ़ाने के आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी में हैं। यह मामला इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नागरिक स्वतंत्रता, न्यायिक प्रक्रिया और प्रक्रियागत निष्पक्षता से जुड़े व्यापक सवाल उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।