22 अक्टूबर 2026
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सीजेपी नेताओं की जमानत पर शायना एनसी का पलटवार: '₹50,000 की बॉन्ड शर्त जीत नहीं, कोर्ट की चेतावनी है'

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सीजेपी नेताओं की जमानत पर शायना एनसी का पलटवार: '₹50,000 की बॉन्ड शर्त जीत नहीं, कोर्ट की चेतावनी है'

सारांश

शायना एनसी ने सीजेपी नेताओं की जमानत को 'जीत' मानने से इनकार करते हुए कहा — ₹50,000 बॉन्ड और शांति की शर्त खुद दर्शाती है कि कोर्ट को भी अशांति की आशंका थी। साथ ही राहुल गांधी को 'आरएसएस की एबीसी' पढ़ने की सलाह दी और विपक्ष पर 'फेक नैरेटिव' का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने 22 अक्टूबर 2026 को सीजेपी नेताओं सौरव दास व आशुतोष रांका की जमानत को 'जीत' नहीं, कोर्ट की सख्त शर्त बताया।
अदालत ने एक साल तक शांति बनाए रखने और ₹50,000 बॉन्ड जमा करने की शर्त लगाई — यह उनका दूसरा बॉन्ड उल्लंघन बताया गया।
शायना एनसी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे आरएसएस की महिला शाखा 'राष्ट्र सेविका समिति' के बारे में भी नहीं जानते, जो 1936 से सक्रिय है और जिससे 10 लाख महिलाएं जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि जो पार्टी 130 सालों में महिला अध्यक्ष नहीं बना पाई, वह आरएसएस पर सवाल न उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और 'इंडी' गठबंधन पर आरोप — बिना ब्लूप्रिंट के 'बांग्लादेश जैसे हालात' का फेक नैरेटिव फैलाने का।

शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत द्वारा दी गई जमानत को किसी भी रूप में जीत मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जमानत कोर्ट की एक कड़ी शर्त है, न कि राहत का कारण।

जमानत पर शायना एनसी की तीखी प्रतिक्रिया

शायना एनसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कानून सबके लिए बराबर है।' उनके अनुसार, अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत देते हुए एक साल तक शांति बनाए रखने की सख्त शर्त लगाई है। उन्होंने बताया कि यह दूसरा मौका है जब इन दोनों ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया।

शायना एनसी ने कहा कि जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं कि अदालत ने इन्हें क्लीन चिट दी — बल्कि ₹50,000 की राशि जमा कर शांति का वादा करना इस बात का संकेत है कि खुद न्यायालय को भी इनसे अशांति फैलाने की आशंका थी। उनके अनुसार, ये प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि 'आदतन कानून तोड़ने वाले' हैं।

राहुल गांधी पर निशाना: 'आरएसएस की एबीसी भी नहीं जानते'

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए शायना एनसी ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं रखते। उन्होंने बताया कि आरएसएस की महिला शाखा 'राष्ट्र सेविका समिति' की स्थापना 1936 में हुई थी और यह संगठन पिछले 87 वर्षों से निरंतर सक्रिय है।

शायना एनसी के अनुसार, आज इस संगठन से 10 लाख महिलाएं जुड़ी हैं और 4,000 शाखाएं देशभर में संचालित हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पार्टी खुद 130 सालों में कोई महिला अध्यक्ष नहीं बना पाई, वह आरएसएस पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं है।

राहुल गांधी की 'भागने' वाली राजनीति पर कटाक्ष

शायना एनसी ने राहुल गांधी पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले अमेठी छोड़ी, फिर वायनाड और अब रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पहले अपनी पार्टी की महिलाओं की स्थिति का जायज़ा लेना चाहिए, इससे पहले कि वे किसी अन्य संगठन में महिला प्रतिनिधित्व पर टिप्पणी करें।

विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर पलटवार

शायना एनसी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये वही दल हैं जो खुद वोट नहीं पा सके और अब 'वोट चोरी' का रोना रो रहे हैं। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई सकारात्मक एजेंडा या ब्लूप्रिंट नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधा सवाल पूछा — जब 'इंडी' गठबंधन की बैठक बुलाकर चुनाव आयोग (ECI) और प्रधानमंत्री पर हमला किया जाता है, तो इसका संदेश क्या है? शायना एनसी के अनुसार, इस प्रकार का नैरेटिव देश में बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात का भ्रम पैदा करता है, जो वास्तविकता से परे और 'फेक' है।

आगे क्या

सीजेपी नेताओं की जमानत की शर्तों और बॉन्ड उल्लंघन के इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। राजनीतिक रूप से यह बयानबाज़ी महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति और विपक्ष के बीच तनाव को और तीखा करती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे मूल सवाल नहीं हटता कि सीजेपी नेताओं को हिरासत और जमानत की नौबत क्यों आई। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस राजनीतिक बयानबाज़ी की परतों के नीचे दबे कानूनी तथ्यों को नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत क्यों मिली?
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत ने ₹50,000 के बॉन्ड और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर जमानत दी। यह कथित तौर पर उनका दूसरा बॉन्ड उल्लंघन बताया जा रहा है।
शायना एनसी ने जमानत को जीत क्यों नहीं माना?
शायना एनसी का तर्क है कि ₹50,000 जमा कर शांति का वादा करना कोई जीत नहीं है — बल्कि यह संकेत है कि अदालत को भी इन व्यक्तियों से अशांति फैलाने की आशंका थी। उन्होंने इन्हें 'आदतन कानून तोड़ने वाला' बताया।
राहुल गांधी और आरएसएस विवाद में शायना एनसी ने क्या कहा?
शायना एनसी ने कहा कि राहुल गांधी आरएसएस की महिला शाखा 'राष्ट्र सेविका समिति' के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं रखते, जो 1936 से सक्रिय है और जिससे 10 लाख महिलाएं और 4,000 शाखाएं जुड़ी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस 130 सालों में महिला अध्यक्ष नहीं बना पाई।
शायना एनसी ने 'इंडी' गठबंधन और मल्लिकार्जुन खड़गे पर क्या आरोप लगाए?
शायना एनसी ने आरोप लगाया कि 'इंडी' गठबंधन के पास कोई सकारात्मक एजेंडा या ब्लूप्रिंट नहीं है और वे देश में 'बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात' का फर्जी नैरेटिव फैला रहे हैं। उन्होंने इसे 'फेक' करार दिया।
राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र बदलने पर शायना एनसी ने क्या कहा?
शायना एनसी ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले अमेठी, फिर वायनाड और अब रायबरेली से चुनाव लड़े — इसे उन्होंने 'भागने' की राजनीति बताया। उनके अनुसार राहुल गांधी को पहले अपनी पार्टी के भीतर महिला प्रतिनिधित्व की स्थिति देखनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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