सीजेपी नेताओं की जमानत पर शायना एनसी का पलटवार: '₹50,000 की बॉन्ड शर्त जीत नहीं, कोर्ट की चेतावनी है'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत द्वारा दी गई जमानत को किसी भी रूप में जीत मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जमानत कोर्ट की एक कड़ी शर्त है, न कि राहत का कारण।
जमानत पर शायना एनसी की तीखी प्रतिक्रिया
शायना एनसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कानून सबके लिए बराबर है।' उनके अनुसार, अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत देते हुए एक साल तक शांति बनाए रखने की सख्त शर्त लगाई है। उन्होंने बताया कि यह दूसरा मौका है जब इन दोनों ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया।
शायना एनसी ने कहा कि जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं कि अदालत ने इन्हें क्लीन चिट दी — बल्कि ₹50,000 की राशि जमा कर शांति का वादा करना इस बात का संकेत है कि खुद न्यायालय को भी इनसे अशांति फैलाने की आशंका थी। उनके अनुसार, ये प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि 'आदतन कानून तोड़ने वाले' हैं।
राहुल गांधी पर निशाना: 'आरएसएस की एबीसी भी नहीं जानते'
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए शायना एनसी ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं रखते। उन्होंने बताया कि आरएसएस की महिला शाखा 'राष्ट्र सेविका समिति' की स्थापना 1936 में हुई थी और यह संगठन पिछले 87 वर्षों से निरंतर सक्रिय है।
शायना एनसी के अनुसार, आज इस संगठन से 10 लाख महिलाएं जुड़ी हैं और 4,000 शाखाएं देशभर में संचालित हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पार्टी खुद 130 सालों में कोई महिला अध्यक्ष नहीं बना पाई, वह आरएसएस पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं है।
राहुल गांधी की 'भागने' वाली राजनीति पर कटाक्ष
शायना एनसी ने राहुल गांधी पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले अमेठी छोड़ी, फिर वायनाड और अब रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पहले अपनी पार्टी की महिलाओं की स्थिति का जायज़ा लेना चाहिए, इससे पहले कि वे किसी अन्य संगठन में महिला प्रतिनिधित्व पर टिप्पणी करें।
विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर पलटवार
शायना एनसी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये वही दल हैं जो खुद वोट नहीं पा सके और अब 'वोट चोरी' का रोना रो रहे हैं। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई सकारात्मक एजेंडा या ब्लूप्रिंट नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधा सवाल पूछा — जब 'इंडी' गठबंधन की बैठक बुलाकर चुनाव आयोग (ECI) और प्रधानमंत्री पर हमला किया जाता है, तो इसका संदेश क्या है? शायना एनसी के अनुसार, इस प्रकार का नैरेटिव देश में बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात का भ्रम पैदा करता है, जो वास्तविकता से परे और 'फेक' है।
आगे क्या
सीजेपी नेताओं की जमानत की शर्तों और बॉन्ड उल्लंघन के इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। राजनीतिक रूप से यह बयानबाज़ी महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति और विपक्ष के बीच तनाव को और तीखा करती दिख रही है।