13 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर पर फिर हिरासत: सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास गिरफ्तार, 12 अक्टूबर के प्रदर्शन में 4 एफआईआर दर्ज

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जंतर-मंतर पर फिर हिरासत: सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास गिरफ्तार, 12 अक्टूबर के प्रदर्शन में 4 एफआईआर दर्ज

सारांश

जंतर-मंतर पर एक बार फिर कार्रवाई — CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास हिरासत में, 12 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर 4 थानों में एफआईआर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर इंडिया ब्लॉक का विरोध जारी है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर से CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
12 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर बीएनएसएस धारा 163 के उल्लंघन में कुल 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
एफआईआर में 2 तिलक मार्ग थाने , 1 मंदिर मार्ग थाने और 1 बाराखंभा थाने में दर्ज हैं।
हिरासत में रांका ने कहा — 'ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा जंतर-मंतर पर भी होगा।' विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के SIR के खिलाफ जारी है।

नई दिल्ली में 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास प्रमुख रूप से शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन को लेकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के उल्लंघन सहित अन्य धाराओं में कुल 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

हिरासत की कार्रवाई और एफआईआर का ब्यौरा

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन चार एफआईआर में से 2 एफआईआर तिलक मार्ग थाने में, 1 मंदिर मार्ग थाने में और 1 बाराखंभा थाने में दर्ज की गई हैं। पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस इलाके में पहले से ही बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, जिसका उल्लंघन प्रदर्शन के दौरान किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक और कई सामाजिक संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

हिरासत में लिए गए नेताओं का बयान

हिरासत में लिए गए सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें आशुतोष रांका भी उनके साथ नज़र आए। वीडियो में रांका कहते दिखे कि 'ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तो जंतर-मंतर पर भी होगा।' वीडियो में सौरव दास के हाथ में संविधान की प्रति भी दिखी। पुलिस बस में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी 'भारत माता की जय' और 'जय भीम, जय भीम' के नारे लगाते सुने गए।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के एसआईआर (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों में गहरा असंतोष है। इसी विरोध की कड़ी में 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।

यह पहली बार नहीं है जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया हो। राजधानी में संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा आमतौर पर बड़े विरोध प्रदर्शनों से पहले लागू की जाती है, और पुलिस का यह कदम उसी कानूनी ढाँचे के तहत बताया जा रहा है।

आगे क्या होगा

हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की कानूनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध पर दमन बताया है। दर्ज की गई चारों एफआईआर में जाँच जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भारत में संवैधानिक विरोध का प्रतीकात्मक केंद्र रहा है, पर बार-बार निषेधाज्ञा और हिरासत की कार्रवाई एक गहरे सवाल को जन्म देती है — क्या प्रशासनिक आदेश लोकतांत्रिक असहमति की सीमा तय कर रहे हैं? मतदाता सूची SIR जैसा तकनीकी चुनावी मुद्दा जब सड़क पर उतरता है, तो यह संकेत है कि विपक्ष को संस्थागत चैनलों पर भरोसा कम हो रहा है। बीएनएसएस की धारा 163 का प्रयोग एहतियाती उपकरण के रूप में उचित हो सकता है, लेकिन चार थानों में एक साथ चार एफआईआर यह दर्शाता है कि राज्य इस प्रदर्शन को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मान रहा है, जबकि विपक्ष इसे संवैधानिक अधिकार बता रहा है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आशुतोष रांका और सौरव दास को क्यों हिरासत में लिया गया?
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, इलाके में पहले से बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, जिसका उल्लंघन करने पर यह कार्रवाई की गई।
12 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर कितनी और कहाँ एफआईआर दर्ज हुई हैं?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कुल 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं — 2 तिलक मार्ग थाने में, 1 मंदिर मार्ग थाने में और 1 बाराखंभा थाने में। ये एफआईआर बीएनएसएस की धारा 163 के उल्लंघन और अन्य धाराओं के तहत दर्ज हैं।
यह प्रदर्शन किस मुद्दे को लेकर हो रहा है?
इंडिया ब्लॉक और कई संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में विरोध मार्च आयोजित किया गया था।
हिरासत में लिए गए नेताओं ने क्या कहा?
सौरव दास द्वारा जारी वीडियो में आशुतोष रांका को यह कहते सुना गया कि 'ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तो जंतर-मंतर पर भी होगा।' सौरव दास के हाथ में संविधान की प्रति थी। पुलिस बस में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी 'भारत माता की जय' और 'जय भीम' के नारे लगाते दिखे।
बीएनएसएस की धारा 163 क्या है और इसे क्यों लागू किया गया था?
बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 163 प्रशासन को किसी इलाके में निषेधाज्ञा लागू करने का अधिकार देती है, जब सार्वजनिक शांति या सुरक्षा को खतरा हो। पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में यह आदेश पहले से लागू था और प्रदर्शनकारियों द्वारा इसके उल्लंघन के चलते हिरासत और एफआईआर की कार्रवाई की गई।
राष्ट्र प्रेस
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