5 नवंबर 2026
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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका

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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका

सारांश

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सीजेपी के सौरभ दास और आशुतोष रांका क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए। पूछताछ के बाद दोनों ने विदेशी फंडिंग के आरोपों को बेबुनियाद बताया और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पर सीधे सवाल दागे।

मुख्य बातें

सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका 5 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच , राजौरी गार्डन के सामने पेश हुए।
दोनों से 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए कथित अनाधिकृत प्रदर्शन और सरकारी आदेशों के उल्लंघन के मामले में पूछताछ की गई।
आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विदेशी फंडिंग थी तो वे सीजेपी से संवाद क्यों कर रहे थे।
सौरभ दास ने विदेशी फंडिंग के आरोपों को 'बेबुनियाद' बताया; 3 जून से साक्ष्य की माँग कर रहे हैं।
दोनों नेताओं ने किसी भी जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने 5 नवंबर 2026 को सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका राजौरी गार्डन स्थित दफ्तर में पेश हुए। दोनों नेताओं से 13 अक्टूबर की घटनाओं — जिनमें जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन, सरकारी आदेशों के कथित उल्लंघन और अनाधिकृत प्रवेश के आरोप शामिल हैं — के संदर्भ में सामान्य जांच के तहत पूछताछ की गई।

पूछताछ और सहयोग का आश्वासन

पूछताछ के बाद सीजेपी सह-संयोजक आशुतोष रांका ने पत्रकारों से कहा कि यह 13 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर एक सामान्य जांच थी। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमने पहले भी कहा है और फिर दोहराते हैं कि हम किसी भी जांच में पूरा सहयोग करेंगे, चाहे वह जांच कोई भी एजेंसी कर रही हो।' रांका ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा फहराना अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर पलटवार

आशुतोष रांका ने विदेशी फंडिंग के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से पूछिए कि अगर इसमें विदेशी फंडिंग शामिल थी, तो वे हमसे हाथ क्यों मिला रहे थे? वे हमसे बातचीत क्यों कर रहे थे? वे हमारे साथ बैठकर चर्चा क्यों कर रहे थे, हमारे साथ चाय और नाश्ता क्यों कर रहे थे?'

रांका ने आगे कहा कि पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और अमेरिका से फंडिंग के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि देश की असली समस्याओं — जैसे मतदान में धांधली के आरोप, परीक्षा पेपर लीक और बेरोज़गारी — पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा, 'आपके पास इसका कोई जवाब नहीं है कि इस देश में वोट क्यों चुराए जा रहे हैं या परीक्षा के पेपर क्यों लीक हो रहे हैं।'

सौरभ दास का रुख: आरोप बेबुनियाद

सीजेपी सह-संयोजक सौरभ दास ने विदेशी फंडिंग के आरोप को 'बेबुनियाद' करार दिया। उन्होंने कहा, '3 जून को हमारी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी और तब से हम लगातार पूछ रहे हैं कि इस तथाकथित आरोप का आधार क्या है? चार-पाँच महीने बीत चुके हैं और कोई ठोस आधार सामने नहीं आया।'

दास ने आरोप लगाया कि एक खास विचारधारा से जुड़े लोग इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए सुनियोजित अभियान चला रहे हैं। उन्होंने इसे 'शर्मनाक' बताते हुए कहा कि युवाओं के नेतृत्व वाले इस संघर्ष के खिलाफ नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुए कथित अनाधिकृत प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की थी। सीजेपी पर सरकारी आदेशों के उल्लंघन और बिना अनुमति प्रवेश के आरोप लगाए गए। यह ऐसे समय में आया है जब देश में नागरिक अधिकार संगठनों पर विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

आगे की राह

दोनों नेताओं ने जांच में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया है। फिलहाल क्राइम ब्रांच की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सरकार ने पहले संवाद क्यों किया? दूसरी तरफ, जांच की निष्पक्षता का दावा तब तक अधूरा है जब तक विदेशी फंडिंग के आरोपों का ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं होता — जो चार महीने बाद भी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सीजेपी नेताओं को क्यों बुलाया गया?
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुए कथित अनाधिकृत प्रदर्शन, सरकारी आदेशों के उल्लंघन और अनाधिकृत प्रवेश के मामलों में सामान्य जांच के तहत सीजेपी के सह-संयोजकों को पूछताछ के लिए बुलाया। दोनों नेता 5 नवंबर 2026 को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच दफ्तर में पेश हुए।
सीजेपी पर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोप क्या हैं?
सीजेपी पर पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और अमेरिका से फंडिंग लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। संगठन ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि 3 जून से वे साक्ष्य की माँग कर रहे हैं, लेकिन चार-पाँच महीनों में कोई ठोस आधार सामने नहीं आया।
आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पर क्या सवाल उठाए?
सीजेपी सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि यदि संगठन में विदेशी फंडिंग थी, तो केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह उनसे बातचीत, चाय-नाश्ता और बैठकें क्यों कर रहे थे। उन्होंने मंत्री से इस विरोधाभास का जवाब माँगा।
सीजेपी ने जांच में सहयोग को लेकर क्या कहा?
दोनों सह-संयोजकों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि सभी जांचें निष्पक्ष तरीके से और सही नीयत से की जाएंगी।
क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कानूनी अपराध है?
सीजेपी सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा फहराना अपराध नहीं माना जाना चाहिए। हालाँकि, मामले में बिना अनुमति प्रदर्शन और सरकारी आदेशों के कथित उल्लंघन के आरोप भी शामिल हैं, जिनकी जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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