22 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर मामला: सीजेपी नेता सौरव दास, रंका और शिंदे ने क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए माँगा अतिरिक्त समय

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जंतर-मंतर मामला: सीजेपी नेता सौरव दास, रंका और शिंदे ने क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए माँगा अतिरिक्त समय

सारांश

जंतर-मंतर में कथित अनधिकृत प्रवेश के मामले में एक सप्ताह तिहाड़ जेल में बिताने के बाद रिहा हुए सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रंका ने रिहाई के अगले ही दिन क्राइम ब्रांच की पूछताछ से अतिरिक्त समय माँगा। अब पुलिस तीनों को नए समन जारी करेगी।

मुख्य बातें

सौरव दास , आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे ने 22 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए अतिरिक्त समय माँगा।
दास और रंका को एक सप्ताह न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से ₹50,000-₹50,000 के मुचलके पर रिहा किया गया।
तीनों पर 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर में कथित अनधिकृत प्रवेश का आरोप है; 11 अन्य भी इस मामले में शामिल हैं।
सीजेपी सदस्य मतदाता सूची एसआईआर में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
रिहाई की शर्त के तहत दोनों ने आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए जाने तक वहाँ प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
मामले की जाँच अब क्राइम ब्रांच कर रही है; नए समन जल्द जारी होंगे।

कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे ने 22 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पूछताछ के लिए पेश होने हेतु अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है। तीनों को गुरुवार दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में बुलाया गया था, लेकिन उनके अनुरोध के बाद पुलिस अब नए समन जारी करेगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 13 अक्टूबर 2026 की उस घटना से जुड़ा है, जब सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे सहित 11 अन्य लोग कथित तौर पर जंतर-मंतर में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर गए थे। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को कानून के तहत अधिकृत विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है।

सीजेपी सदस्य उस समय मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारेबाज़ी की थी।

गिरफ्तारी और रिहाई

दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को उसी दिन हिरासत में ले लिया था। अजिंक्य शिंदे को जमानत बॉन्ड पर तत्काल रिहा कर दिया गया, जबकि सौरव दास और आशुतोष रंका एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे।

बुधवार, 22 अक्टूबर को दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ऋतुराज के समक्ष ₹50,000-₹50,000 के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती बॉन्ड जमा करने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा किया गया।

लिखित आश्वासन की शर्तें

रिहाई के लिए दोनों कार्यकर्ताओं ने एसईएम अदालत के समक्ष लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति बनाए रखेंगे और जब तक जंतर-मंतर को विधिवत प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, वहाँ प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। दोनों ने न्यायपालिका और उसकी सभी संस्थाओं में पूरा विश्वास जताया।

एसईएम अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 135(3) के तहत कहा कि शांति भंग रोकने के लिए आवश्यक तत्काल उपाय, लिखित आश्वासन समर्थित बॉन्ड के माध्यम से पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

क्राइम ब्रांच को सौंपा गया मामला

इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं से जुड़े प्रदर्शन मामलों की जाँच क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी थी, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में हुआ जब दोनों नेता जेल से रिहाई के अगले ही दिन पुलिस के समन का सामना कर रहे थे।

आगे क्या होगा

तीनों नेताओं के समय माँगने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच उन्हें नए समन जारी करेगी। मामले की जाँच जारी है और अगली पेशी की तारीख अभी तय की जानी है। जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश से जुड़े इस मामले के आगे के घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्थान का चुनाव इसकी विधिक वैधता तय करता है। क्राइम ब्रांच को मामला सौंपा जाना और ₹50,000 के मुचलके जैसी शर्तें संकेत देती हैं कि प्रशासन इसे साधारण धरना नहीं मान रहा। असली सवाल यह है कि एसआईआर की अनियमितताओं पर क्या कोई स्वतंत्र जाँच होगी — जो इस पूरे विरोध की मूल वजह थी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर सीजेपी प्रदर्शन मामला क्या है?
यह मामला 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर में कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे सहित 11 अन्य लोगों के कथित अनधिकृत प्रवेश से संबंधित है। सीजेपी सदस्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
सौरव दास और आशुतोष रंका को जेल से कब और किन शर्तों पर रिहा किया गया?
दोनों को 22 अक्टूबर 2026 को एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से रिहा किया गया। रिहाई की शर्त के रूप में ₹50,000-₹50,000 का निजी मुचलका और जमानती बॉन्ड जमा करना पड़ा, साथ ही लिखित आश्वासन देना पड़ा कि वे जंतर-मंतर के अधिकृत होने तक वहाँ प्रदर्शन नहीं करेंगे।
क्राइम ब्रांच को यह मामला क्यों सौंपा गया?
इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं से जुड़े प्रदर्शन मामलों की जाँच क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दी। यह कदम मामले की गंभीरता को दर्शाता है, हालाँकि इसके पीछे की आधिकारिक वजह अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब आगे क्या होगा — तीनों नेताओं को कब पेश होना होगा?
तीनों के अतिरिक्त समय माँगने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच उन्हें नए समन जारी करेगी। नई पेशी की तारीख अभी तय नहीं हुई है और जाँच जारी है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित क्यों नहीं किया गया है?
जंतर-मंतर को कानून के तहत अधिकृत विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है, इसीलिए वहाँ प्रदर्शन करना अनधिकृत माना जाता है। सीजेपी कार्यकर्ताओं पर इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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