पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति: भूमि उपयोग परिवर्तन नियमों में चुनिंदा ढील, सितंबर मध्य तक होगी जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार सितंबर 2026 के मध्य तक नई औद्योगिक नीति जारी करने की तैयारी में है, जिसमें उद्योग स्थापित करने के लिए कानूनी रूप से खरीदी गई जमीन पर भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज कन्वर्जन) नियमों में चुनिंदा ढील देने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। राज्य सचिवालय नबन्ना के सूत्रों के अनुसार, यह कदम निवेशकों और कंपनियों को मौजूदा कानूनी जटिलताओं से राहत दिलाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
मुख्य प्रावधान: क्या बदलेगा
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि अक्सर किसी औद्योगिक परियोजना के लिए एकमुश्त बड़ी जमीन खरीदी जाती है, लेकिन बाद में उसके एक हिस्से में जलाशय या तालाब मौजूद होने का पता चलता है। वर्तमान नियमों के तहत ऐसे जलाशयों का औद्योगिक उपयोग के लिए भूमि उपयोग बदलना एक लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया है। प्रस्तावित ढील लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।
गौरतलब है कि यह छूट केवल विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा (सर्विसेज) क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों तक सीमित रखे जाने का प्रस्ताव है। रियल एस्टेट क्षेत्र को इस छूट का लाभ मिलने की संभावना नहीं है, जो इस नीति की एक महत्वपूर्ण सीमा रेखा है।
बर्गा भूमि अधिग्रहण: नए प्रावधान
नई नीति में बर्गा भूमि के अधिग्रहण के नियम भी सरल किए जाने का प्रस्ताव है। बर्गा भूमि वह जमीन होती है जिसे बंटाईदारों (शेयरक्रॉपर्स) के नाम पट्टे के जरिए हस्तांतरित किया गया हो और जहाँ खेती की उपज का तय हिस्सा जमींदार को दिया जाता हो।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि बर्गा भूमि लंबे समय तक अनुपयोगी पड़ी रहती है, तो राज्य सरकार उसका अधिग्रहण कर सकेगी। अधिग्रहण की राशि मौजूदा बाजार मूल्य या उससे कुछ अधिक दर पर दी जाएगी और यह रकम जमीन मालिक तथा संबंधित बंटाईदार के बीच बराबर-बराबर बाँटी जाएगी — दोनों पक्षों का मुआवजे पर समान अधिकार होगा।
आदिवासी भूमि: अब भी बड़ी चुनौती
अधिकारी ने स्वीकार किया कि सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी भूमि के अधिग्रहण को लेकर बनी हुई है। मौजूदा कानून के तहत आदिवासी भूमि किसी गैर-आदिवासी समुदाय को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। इसके चलते कई जिलों में सरकार औद्योगिक परियोजनाओं के लिए ऐसी जमीन नहीं ले सकती और आदिवासी भूमि मालिक चाहकर भी उसे बेच नहीं सकते।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस समस्या का समाधान फिलहाल सरकार के पास नहीं है और इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
नई औद्योगिक नीति के सितंबर 2026 के मध्य तक जारी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि उपयोग परिवर्तन में ढील से राज्य में अटकी कई परियोजनाओं को गति मिल सकती है, बशर्ते क्रियान्वयन पारदर्शी हो। आदिवासी भूमि का मुद्दा अनसुलझा रहने से नीति की व्यापकता पर सवाल बना रहेगा।