26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति: भूमि उपयोग परिवर्तन नियमों में चुनिंदा ढील, सितंबर मध्य तक होगी जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति: भूमि उपयोग परिवर्तन नियमों में चुनिंदा ढील, सितंबर मध्य तक होगी जारी

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार सितंबर मध्य तक नई औद्योगिक नीति लाने की तैयारी में है। भूमि उपयोग परिवर्तन नियमों में चुनिंदा ढील और बर्गा भूमि अधिग्रहण को सरल बनाने का प्रस्ताव है — लेकिन आदिवासी भूमि का अनसुलझा सवाल नीति की सबसे बड़ी सीमा बना हुआ है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार सितंबर 2026 के मध्य तक नई औद्योगिक नीति जारी करने की तैयारी में है।
नीति में भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज कन्वर्जन) नियमों में चुनिंदा ढील का प्रस्ताव — जलाशय या तालाब वाली जमीन पर प्रक्रिया होगी सरल।
यह छूट केवल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज क्षेत्र तक सीमित; रियल एस्टेट को लाभ नहीं।
बर्गा भूमि के अधिग्रहण के नियम सरल होंगे; मुआवजा जमीन मालिक और बंटाईदार के बीच बराबर-बराबर।
आदिवासी भूमि हस्तांतरण का मुद्दा अनसुलझा; सरकार के पास अभी कोई समाधान नहीं।

पश्चिम बंगाल सरकार सितंबर 2026 के मध्य तक नई औद्योगिक नीति जारी करने की तैयारी में है, जिसमें उद्योग स्थापित करने के लिए कानूनी रूप से खरीदी गई जमीन पर भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज कन्वर्जन) नियमों में चुनिंदा ढील देने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। राज्य सचिवालय नबन्ना के सूत्रों के अनुसार, यह कदम निवेशकों और कंपनियों को मौजूदा कानूनी जटिलताओं से राहत दिलाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

मुख्य प्रावधान: क्या बदलेगा

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि अक्सर किसी औद्योगिक परियोजना के लिए एकमुश्त बड़ी जमीन खरीदी जाती है, लेकिन बाद में उसके एक हिस्से में जलाशय या तालाब मौजूद होने का पता चलता है। वर्तमान नियमों के तहत ऐसे जलाशयों का औद्योगिक उपयोग के लिए भूमि उपयोग बदलना एक लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया है। प्रस्तावित ढील लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।

गौरतलब है कि यह छूट केवल विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा (सर्विसेज) क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों तक सीमित रखे जाने का प्रस्ताव है। रियल एस्टेट क्षेत्र को इस छूट का लाभ मिलने की संभावना नहीं है, जो इस नीति की एक महत्वपूर्ण सीमा रेखा है।

बर्गा भूमि अधिग्रहण: नए प्रावधान

नई नीति में बर्गा भूमि के अधिग्रहण के नियम भी सरल किए जाने का प्रस्ताव है। बर्गा भूमि वह जमीन होती है जिसे बंटाईदारों (शेयरक्रॉपर्स) के नाम पट्टे के जरिए हस्तांतरित किया गया हो और जहाँ खेती की उपज का तय हिस्सा जमींदार को दिया जाता हो।

प्रस्ताव के अनुसार, यदि बर्गा भूमि लंबे समय तक अनुपयोगी पड़ी रहती है, तो राज्य सरकार उसका अधिग्रहण कर सकेगी। अधिग्रहण की राशि मौजूदा बाजार मूल्य या उससे कुछ अधिक दर पर दी जाएगी और यह रकम जमीन मालिक तथा संबंधित बंटाईदार के बीच बराबर-बराबर बाँटी जाएगी — दोनों पक्षों का मुआवजे पर समान अधिकार होगा।

आदिवासी भूमि: अब भी बड़ी चुनौती

अधिकारी ने स्वीकार किया कि सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी भूमि के अधिग्रहण को लेकर बनी हुई है। मौजूदा कानून के तहत आदिवासी भूमि किसी गैर-आदिवासी समुदाय को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। इसके चलते कई जिलों में सरकार औद्योगिक परियोजनाओं के लिए ऐसी जमीन नहीं ले सकती और आदिवासी भूमि मालिक चाहकर भी उसे बेच नहीं सकते।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस समस्या का समाधान फिलहाल सरकार के पास नहीं है और इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।

आगे क्या होगा

नई औद्योगिक नीति के सितंबर 2026 के मध्य तक जारी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि उपयोग परिवर्तन में ढील से राज्य में अटकी कई परियोजनाओं को गति मिल सकती है, बशर्ते क्रियान्वयन पारदर्शी हो। आदिवासी भूमि का मुद्दा अनसुलझा रहने से नीति की व्यापकता पर सवाल बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह निवेशकों का भरोसा बहाल करने में कामयाब होगी। आदिवासी भूमि का अनसुलझा मुद्दा नीति की सबसे बड़ी कमज़ोरी है — कई औद्योगिक जिलों में यही भूमि बड़े हिस्से में है। बर्गा भूमि अधिग्रहण के प्रावधान राजनीतिक रूप से नाजुक हैं और इनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता न रही तो नई नीति पुरानी समस्याओं को नए रूप में दोहरा सकती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति में भूमि उपयोग परिवर्तन नियमों में क्या बदलाव होगा?
प्रस्तावित नीति के तहत उद्योग के लिए खरीदी गई जमीन पर जलाशय या तालाब होने पर भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया सरल की जाएगी। यह छूट केवल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज क्षेत्र की इकाइयों को मिलेगी, रियल एस्टेट को नहीं।
नई औद्योगिक नीति कब जारी होगी?
नबन्ना सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार सितंबर 2026 के मध्य तक नई औद्योगिक नीति जारी करने की तैयारी में है। हालाँकि अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
बर्गा भूमि क्या होती है और नई नीति में इसके लिए क्या प्रावधान है?
बर्गा भूमि वह जमीन होती है जो बंटाईदारों (शेयरक्रॉपर्स) के नाम पट्टे पर हस्तांतरित होती है। नई नीति में प्रस्ताव है कि लंबे समय से अनुपयोगी बर्गा भूमि का राज्य सरकार अधिग्रहण कर सकेगी और मुआवजा जमीन मालिक व बंटाईदार के बीच बराबर-बराबर बाँटा जाएगा।
आदिवासी भूमि के मामले में नई नीति क्या कर सकती है?
आदिवासी भूमि हस्तांतरण मौजूदा कानून के तहत गैर-आदिवासी समुदाय को नहीं हो सकता। सरकार ने स्वीकार किया है कि इस समस्या का कोई समाधान अभी उसके पास नहीं है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इस नीति से किसे फायदा होगा और किसे नहीं?
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज क्षेत्र के निवेशकों और कंपनियों को भूमि उपयोग परिवर्तन में राहत मिलेगी। रियल एस्टेट क्षेत्र इस छूट से बाहर रहेगा और आदिवासी भूमि से जुड़े क्षेत्रों में स्थिति पहले जैसी बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले