26 अगस्त 2026
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एफसीआई जीएम आईके चौधरी का ऐलान: कथित भारत-विरोधी वीडियो की विभागीय जांच, बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव

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एफसीआई जीएम आईके चौधरी का ऐलान: कथित भारत-विरोधी वीडियो की विभागीय जांच, बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव

सारांश

एफसीआई के जीएम आईके चौधरी ने दो मोर्चों पर सख्त रुख अपनाया — एक कर्मचारी के कथित भारत-विरोधी वीडियो पर विभागीय जांच और बर्खास्तगी तक की चेतावनी, और पीडीएस गेहूं की गुणवत्ता पर आरोपों को नकारते हुए मीडिया को गोदाम में खुली जांच का न्योता।

मुख्य बातें

एफसीआई जीएम आईके चौधरी ने 26 अगस्त को जम्मू में एक महिला कर्मचारी के कथित भारत-विरोधी वीडियो पर विभागीय जांच के आदेश दिए।
जांच में वीडियो की पुष्टि होने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नौकरी से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव।
कर्मचारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाना था; कार्रवाई का आधार जाति या धर्म नहीं, बल्कि आचरण और नियम-उल्लंघन होगा।
पीडीएस गेहूं में कड़वाहट के आरोपों पर चौधरी ने कहा — गेहूं में 12–13.5% नमी सामान्य है; जिस सैंपल का संदर्भ दिया गया वह एफसीआई का संयुक्त सैंपल नहीं था।
चौधरी ने मीडिया को गोदाम में खुली गुणवत्ता जांच का प्रस्ताव दिया — गेहूं पिसवाकर रोटी बनाने और खाने की पेशकश।
अनंतनाग में रेलवे के जरिए प्रतिदिन खाद्यान्न पहुँचाया जा रहा है; एफसीआई स्टाफ कठिन परिस्थितियों में भी आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के जनरल मैनेजर आईके चौधरी ने 26 अगस्त को जम्मू में स्पष्ट किया कि संगठन की एक महिला कर्मचारी के कथित भारत-विरोधी वीडियो की पूरी विभागीय जांच कराई जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में वीडियो की प्रामाणिकता सिद्ध होती है, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नौकरी से बर्खास्तगी तक की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चौधरी ने साफ किया कि कार्रवाई का आधार कर्मचारी की जाति या धर्म नहीं, बल्कि उसका आचरण और नियमों का उल्लंघन होगा।

मुख्य घटनाक्रम

चौधरी के अनुसार, उन्हें मीडिया के माध्यम से कुछ वीडियो प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि वीडियो में दिखाई देने वाली महिला कर्मचारी वही हैं और आवाज़ भी उन्हीं की है, तो यह गंभीर और चिंताजनक मामला है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित कर्मचारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा, उनका जवाब लिया जाएगा और इसके बाद पूरे मामले की विभागीय जांच होगी।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर संवेदनशीलता पहले से अधिक है। चौधरी ने दोहराया कि एफसीआई में किसी भी कर्मचारी की पहचान नहीं, बल्कि देश और सरकारी योजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता ही मायने रखती है।

एफसीआई कर्मचारियों की भूमिका

चौधरी ने अनंतनाग का उदाहरण देते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी एफसीआई का स्टाफ खाद्यान्न आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। उनके अनुसार, अनंतनाग में रेलवे के माध्यम से प्रतिदिन खाद्यान्न पहुँचाया जा रहा है और एफसीआई कर्मचारी उसे उतारने तथा आगे की व्यवस्था में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए कर्मचारियों का समर्पण अनिवार्य है।

पीडीएस गेहूं की गुणवत्ता पर विवाद

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए कथित तौर पर खराब गुणवत्ता का गेहूं सप्लाई किए जाने की शिकायत पर भी चौधरी ने जांच की पुष्टि की। उन्होंने तकनीकी व्याख्या देते हुए बताया कि सामान्यतः गेहूं में 12 से 13.5 प्रतिशत तक नमी हो सकती है। जुलाई-अगस्त के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक नमी, गर्मी और हवा के संपर्क से गेहूं में खराब होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे आटे में कड़वाहट आने की संभावना रहती है।

चौधरी ने आटे में कड़वाहट के संभावित कारणों में चूहों से होने वाली समस्या, अल्फाटॉक्सिन, नमी, फैट कंटेंट तथा गर्मी व हवा के संपर्क का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस सैंपल का संदर्भ दिया जा रहा है, वह एफसीआई का संयुक्त रूप से लिया गया सैंपल नहीं था, इसलिए वे उसे अपना सैंपल नहीं मानते। साथ ही उन्होंने बताया कि उस सैंपल में अल्फाटॉक्सिन की मौजूदगी नहीं पाई गई।

गोदाम में खुली जांच का प्रस्ताव

खराब गेहूं के आरोपों को सिरे से नकारते हुए चौधरी ने मीडिया को अपने गोदाम में आकर गुणवत्ता की जांच करने का खुला प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सामने गोदाम से गेहूं निकाला जाएगा, उसे पिसवाया जाएगा और उससे रोटियाँ बनाकर वे स्वयं भी खाएंगे और पत्रकार भी खा सकते हैं। चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि वे इस आरोप को स्वीकार नहीं करते कि कड़वा आटा एफसीआई की वजह से मिल रहा है।

भौतिक गुणवत्ता मानकों पर उन्होंने बताया कि यदि किसी बोरे में लकड़ी के टुकड़े, खरपतवार के बीज या मिट्टी जैसी अशुद्धियाँ अधिक पाई जाती हैं, तो निर्धारित साल्वेजिंग प्रक्रिया के तहत गेहूं को साफ किया जाता है — इसे सीधे मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता का आकलन केवल एक शिकायत या वीडियो के आधार पर नहीं, बल्कि सैंपलिंग और पूरी जांच प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

आगे क्या होगा

एफसीआई प्रबंधन के अनुसार, कथित वीडियो मामले में शो-कॉज नोटिस जारी होने के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। गेहूं गुणवत्ता विवाद पर भी स्वतंत्र सैंपलिंग और जांच की बात कही गई है। दोनों मामलों में एफसीआई की आगामी कार्रवाई पर नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा जांच की गति और पारदर्शिता होगी — सरकारी विभागीय जांचें अक्सर महीनों तक खिंचती हैं और नतीजे सार्वजनिक नहीं होते। पीडीएस गेहूं की गुणवत्ता का मुद्दा केवल तकनीकी स्पष्टीकरण से नहीं सुलझेगा; जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा की विश्वसनीयता के लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सैंपलिंग और सार्वजनिक रिपोर्टिंग ज़रूरी है। मीडिया को गोदाम में बुलाने का प्रस्ताव पारदर्शिता का संकेत है, पर यह एक बार की कवायद नहीं, नियमित जवाबदेही तंत्र होनी चाहिए।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीआई कर्मचारी का कथित भारत-विरोधी वीडियो मामला क्या है?
एफसीआई की एक महिला कर्मचारी का एक वीडियो सामने आया है जिसमें कथित तौर पर भारत-विरोधी बातें कही गई हैं। जीएम आईके चौधरी ने कहा कि यदि वीडियो में दिखने वाली और आवाज़ देने वाली महिला वही कर्मचारी हैं, तो यह गंभीर मामला है और विभागीय जांच होगी।
एफसीआई कर्मचारी के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
जांच में वीडियो की पुष्टि होने पर नियमों के तहत नौकरी से बर्खास्तगी तक की कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई का आधार कर्मचारी का आचरण और नियम-उल्लंघन होगा, न कि जाति या धर्म।
पीडीएस के जरिए खराब गेहूं मिलने की शिकायत पर एफसीआई का क्या कहना है?
जीएम चौधरी ने आरोपों को अस्वीकार करते हुए कहा कि जिस सैंपल का संदर्भ दिया गया वह एफसीआई का संयुक्त सैंपल नहीं था। उन्होंने बताया कि आटे में कड़वाहट नमी, गर्मी और हवा के संपर्क से हो सकती है, और एफसीआई के गोदाम में गेहूं की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
एफसीआई ने मीडिया को गोदाम में जांच का प्रस्ताव क्यों दिया?
चौधरी ने गेहूं की गुणवत्ता पर लगे आरोपों को पारदर्शी तरीके से खारिज करने के लिए पत्रकारों को गोदाम में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सामने गेहूं पिसवाया जाएगा और रोटी बनाकर वे स्वयं भी खाएंगे।
अनंतनाग में एफसीआई की खाद्यान्न आपूर्ति की स्थिति क्या है?
चौधरी के अनुसार, अनंतनाग में रेलवे के जरिए प्रतिदिन खाद्यान्न पहुँचाया जा रहा है। एफसीआई का स्टाफ कठिन परिस्थितियों में भी अनाज उतारने और आगे की आपूर्ति व्यवस्था में लगा हुआ है।
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