58 की उम्र में बिमला बनवाला का दौड़ का जुनून: 100 से अधिक रेस, अब दिल्ली हाफ मैराथन की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
रोहतक की 58 वर्षीय बिमला बनवाला उन धावकों में शामिल हैं जो उम्र को महज़ एक संख्या मानती हैं। दिल्ली हाफ मैराथन में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहीं बिमला ने 2020 में कोरोना महामारी के दौरान दौड़ना शुरू किया था और तब से अब तक 100 से अधिक रेस पूरी कर चुकी हैं। फिटनेस के इरादे से शुरू हुआ यह सफर आज उनकी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
दौड़ की शुरुआत और आँकड़े
बिमला ने शुरुआत में खुद को सक्रिय रखने के लिए दौड़ना अपनाया, लेकिन जल्द ही यह एक गहरे जुनून में तब्दील हो गया। अब तक वह 50 से अधिक हाफ मैराथन, 5 फुल मैराथन, 10 किलोमीटर और कई अन्य लंबी दूरी की रेस पूरी कर चुकी हैं। वह प्रतिवर्ष करीब 10 इवेंट्स में हिस्सा लेती हैं।
बिमला के शब्दों में, "मैंने 2020 में दौड़ना शुरू किया था, तब से यह मेरी ज़िंदगी का एक बहुत अहम हिस्सा बन गया है। मुझे मैराथन रेस में दौड़ना पसंद है। दौड़ने के बाद मुझे अच्छा लगता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और मेरा मन तरोताज़ा रहता है।"
प्रमुख इवेंट्स और प्रोकैम स्लैम
प्रोकैम इंटरनेशनल के बड़े आयोजनों में नियमित रूप से भाग लेने वाली बिमला ने प्रोकैम स्लैम भी पूरा किया है। उन्होंने दिल्ली हाफ मैराथन, टाटा मुंबई मैराथन, टाटा स्टील वर्ल्ड 25 किलोमीटर कोलकाता और टीसीएस वर्ल्ड 10 किलोमीटर बेंगलुरु जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में हिस्सा लिया है।
पति के साथ 'पावर कपल' की पहचान
बिमला के पति चंद्रपाल बनवाला भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ते हैं। यह जोड़ा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में आयोजित रेस प्रतियोगिताओं के लिए एक साथ यात्रा करता है। दौड़ने के प्रति साझा जुनून ने उन्हें रनिंग कम्युनिटी में 'पावर कपल' की पहचान दिलाई है।
चंद्रपाल बनवाला एक पूर्व सैनिक हैं, जो 1987 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। सेवा के दौरान कुश्ती जैसे खेलों से उनका परिचय हुआ, जबकि कोरोना महामारी के बाद दौड़ना उनका प्रमुख शौक बन गया। तब से वह कई मैराथन और अल्ट्रा-मैराथन पूरी कर चुके हैं और कई बार पोडियम पर भी जगह बना चुके हैं।
चंद्रपाल कहते हैं, "मुझे दौड़ने का इतना जुनून है कि इसके अलावा कुछ और नहीं दिखता। दौड़ना मेरी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है। सेहत के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं है।"
फिटनेस और मानसिक ताज़गी का ज़रिया
बिमला के लिए यह सफर केवल फिनिश लाइन पार करने तक सीमित नहीं है। यह उनके लिए शारीरिक फिटनेस, मानसिक ताज़गी और सकारात्मकता का एक सतत स्रोत बन चुका है। 58 वर्ष की आयु में भी वह हर इवेंट को एक मंज़िल नहीं, बल्कि दौड़ते रहने और सक्रिय जीवन जीने के अवसर के रूप में देखती हैं।
दिल्ली हाफ मैराथन के साथ राजधानी की सड़कों पर धावक एक बार फिर लौट रहे हैं, और बिमला 100 से अधिक रेस के अनुभव के साथ शुरुआती लाइन पर खड़ी होंगी — यह साबित करते हुए कि उम्र दौड़ के जुनून की राह नहीं रोक सकती।