31 जुलाई 2026
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स्वप्ना बर्मन का संन्यास: एशियन गेम्स हेप्टाथलॉन स्वर्ण विजेता ने चोटों के चलते छोड़ा मैदान

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स्वप्ना बर्मन का संन्यास: एशियन गेम्स हेप्टाथलॉन स्वर्ण विजेता ने चोटों के चलते छोड़ा मैदान

सारांश

जबड़े की चोट के साथ एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली स्वप्ना बर्मन ने 31 जुलाई को एथलेटिक्स को अलविदा कहा। स्लिप्ड डिस्क और घुटने की लगातार चोटों ने उनके करियर पर विराम लगाया। भारतीय मल्टी-इवेंट एथलेटिक्स का एक स्वर्णिम अध्याय बंद हुआ।

मुख्य बातें

स्वप्ना बर्मन ने 31 जुलाई 2026 को एथलेटिक्स से संन्यास की घोषणा की।
वे 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय हैं।
स्लिप्ड डिस्क और घुटने की चोटें संन्यास की मुख्य वजह बताई गईं।
2019 और 2023 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक; 2023 एशियन इंडोर चैंपियनशिप में पेंटाथलॉन रजत।
अंतिम मुकाबला बेंगलुरु 2025 नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में, जहाँ तीसरा स्थान मिला।
2019 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित; संन्यास के समय आयु 29 वर्ष ।

भारत की ऐतिहासिक हेप्टाथलीट स्वप्ना बर्मन ने 31 जुलाई 2026 को एथलेटिक्स से संन्यास की घोषणा की। 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी रहीं स्वप्ना ने लगातार चोटों को अपने इस कठिन फैसले की वजह बताया। 29 वर्षीया इस एथलीट ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट के ज़रिए अपने करियर को विदाई दी।

क्या कहा स्वप्ना ने

स्वप्ना ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक है। एथलेटिक्स मेरे लिए सिर्फ एक खेल से कहीं ज्यादा रहा है — यह मेरी पहचान, मेरा जुनून, मेरा सपना और अनगिनत त्याग, संघर्ष, आंसुओं और कभी न भूलने वाली यादों से भरा एक सफर रहा है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'इतने वर्षों में मुझे कई चोटें लगी हैं, जिनमें स्लिप्ड डिस्क और घुटने की चोटें शामिल हैं। मैंने दर्द से लड़ने और आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन अब मेरा शरीर पहले की तरह मेरा साथ नहीं दे रहा।'

स्वप्ना ने विदाई संदेश में कहा, 'मैं एथलेटिक्स को शुक्रगुजार दिल और उन यादों के साथ छोड़ रही हूं जिन्हें मैं हमेशा संजो कर रखूंगी। एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट और अर्जुन अवॉर्डी होना एक सम्मान है जिसे मैं हमेशा गर्व के साथ रखूंगी।'

स्वर्णिम करियर का सफर

स्वप्ना बर्मन 2017 में तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं जब उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन स्वर्ण पदक जीता। इसके अगले ही वर्ष 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने इतिहास रच दिया — जबड़े की गंभीर चोट के बावजूद स्वर्ण पदक जीतकर वे एशियन गेम्स हेप्टाथलॉन में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय बनीं।

यह ऐसे समय में आया जब भारतीय एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था। स्वप्ना की इस जीत ने देश में मल्टी-इवेंट एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई।

चोटों से जूझते हुए भी पदक

चोटों के निरंतर दबाव के बावजूद स्वप्ना ने हार नहीं मानी। उन्होंने 2019 और 2023 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीते। 2023 एशियन इंडोर चैंपियनशिप में पेंटाथलॉन में भी उन्होंने रजत हासिल किया। हांगझोऊ 2023 एशियन गेम्स में वे चौथे स्थान पर रहीं।

उनका अंतिम प्रतिस्पर्धी मुकाबला बेंगलुरु में आयोजित 2025 नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप था, जहाँ उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

सम्मान और विरासत

स्वप्ना को 2019 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा गया था। गौरतलब है कि उनका करियर न केवल पदकों से, बल्कि असाधारण संघर्षशीलता से भी परिभाषित होता है — जबड़े की चोट के साथ एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतना उनके अदम्य साहस का प्रतीक है।

आगे क्या

स्वप्ना ने अपने भविष्य की योजनाओं का अभी खुलासा नहीं किया है, लेकिन भारतीय एथलेटिक्स जगत में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। भारतीय मल्टी-इवेंट एथलेटिक्स में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्हें उचित पुनर्वास और चिकित्सा सहायता समय पर मिली। भारतीय खेल अवसंरचना में मल्टी-इवेंट एथलीटों के लिए दीर्घकालिक चोट प्रबंधन की कमी एक बार फिर रेखांकित होती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वप्ना बर्मन ने संन्यास क्यों लिया?
स्वप्ना बर्मन ने लगातार चोटों — विशेष रूप से स्लिप्ड डिस्क और घुटने की चोटों — के कारण एथलेटिक्स से संन्यास लिया। उन्होंने कहा कि उनका शरीर अब पहले की तरह साथ नहीं दे रहा और यह करियर का अगला अध्याय शुरू करने का समय है।
स्वप्ना बर्मन की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
स्वप्ना बर्मन की सबसे बड़ी उपलब्धि 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन स्वर्ण पदक जीतना रही, जिससे वे यह कारनामा करने वाली पहली भारतीय बनीं। खास बात यह थी कि उन्होंने जबड़े की चोट के बावजूद यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।
स्वप्ना बर्मन को कौन-से पुरस्कार मिले हैं?
स्वप्ना बर्मन को 2019 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्होंने 2017 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप, 2019 और 2023 एशियन चैंपियनशिप में भी पदक जीते।
स्वप्ना बर्मन का आखिरी मुकाबला कौन-सा था?
स्वप्ना बर्मन का अंतिम प्रतिस्पर्धी मुकाबला बेंगलुरु में आयोजित 2025 नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप था, जहाँ उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
हेप्टाथलॉन में भारत की स्थिति अब कैसी है?
स्वप्ना बर्मन के संन्यास के बाद भारतीय मल्टी-इवेंट एथलेटिक्स को एक बड़ा शून्य झेलना पड़ेगा। वे 2017 से 2025 तक इस विधा में भारत का सबसे बड़ा चेहरा रहीं और उनके जाने से अगली पीढ़ी के एथलीटों पर जिम्मेदारी आ गई है।
राष्ट्र प्रेस
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