स्वप्ना बर्मन का संन्यास: एशियन गेम्स हेप्टाथलॉन स्वर्ण विजेता ने चोटों के चलते छोड़ा मैदान
सारांश
मुख्य बातें
भारत की ऐतिहासिक हेप्टाथलीट स्वप्ना बर्मन ने 31 जुलाई 2026 को एथलेटिक्स से संन्यास की घोषणा की। 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी रहीं स्वप्ना ने लगातार चोटों को अपने इस कठिन फैसले की वजह बताया। 29 वर्षीया इस एथलीट ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट के ज़रिए अपने करियर को विदाई दी।
क्या कहा स्वप्ना ने
स्वप्ना ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक है। एथलेटिक्स मेरे लिए सिर्फ एक खेल से कहीं ज्यादा रहा है — यह मेरी पहचान, मेरा जुनून, मेरा सपना और अनगिनत त्याग, संघर्ष, आंसुओं और कभी न भूलने वाली यादों से भरा एक सफर रहा है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'इतने वर्षों में मुझे कई चोटें लगी हैं, जिनमें स्लिप्ड डिस्क और घुटने की चोटें शामिल हैं। मैंने दर्द से लड़ने और आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन अब मेरा शरीर पहले की तरह मेरा साथ नहीं दे रहा।'
स्वप्ना ने विदाई संदेश में कहा, 'मैं एथलेटिक्स को शुक्रगुजार दिल और उन यादों के साथ छोड़ रही हूं जिन्हें मैं हमेशा संजो कर रखूंगी। एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट और अर्जुन अवॉर्डी होना एक सम्मान है जिसे मैं हमेशा गर्व के साथ रखूंगी।'
स्वर्णिम करियर का सफर
स्वप्ना बर्मन 2017 में तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं जब उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन स्वर्ण पदक जीता। इसके अगले ही वर्ष 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने इतिहास रच दिया — जबड़े की गंभीर चोट के बावजूद स्वर्ण पदक जीतकर वे एशियन गेम्स हेप्टाथलॉन में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय बनीं।
यह ऐसे समय में आया जब भारतीय एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था। स्वप्ना की इस जीत ने देश में मल्टी-इवेंट एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई।
चोटों से जूझते हुए भी पदक
चोटों के निरंतर दबाव के बावजूद स्वप्ना ने हार नहीं मानी। उन्होंने 2019 और 2023 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीते। 2023 एशियन इंडोर चैंपियनशिप में पेंटाथलॉन में भी उन्होंने रजत हासिल किया। हांगझोऊ 2023 एशियन गेम्स में वे चौथे स्थान पर रहीं।
उनका अंतिम प्रतिस्पर्धी मुकाबला बेंगलुरु में आयोजित 2025 नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप था, जहाँ उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
सम्मान और विरासत
स्वप्ना को 2019 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा गया था। गौरतलब है कि उनका करियर न केवल पदकों से, बल्कि असाधारण संघर्षशीलता से भी परिभाषित होता है — जबड़े की चोट के साथ एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतना उनके अदम्य साहस का प्रतीक है।
आगे क्या
स्वप्ना ने अपने भविष्य की योजनाओं का अभी खुलासा नहीं किया है, लेकिन भारतीय एथलेटिक्स जगत में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। भारतीय मल्टी-इवेंट एथलेटिक्स में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।