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हरमिलन बैंस का खुलासा: भारतीय खेलों में तरक्की, पर हर एथलीट को समान सम्मान नहीं

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हरमिलन बैंस का खुलासा: भारतीय खेलों में तरक्की, पर हर एथलीट को समान सम्मान नहीं

सारांश

एशियन गेम्स में तीन पदक जीत चुकीं हरमिलन बैंस ने भारतीय खेल व्यवस्था की एक अनदेखी सच्चाई उजागर की — तरक्की तो हो रही है, पर इनाम और अवसरों में खिलाड़ियों के बीच गहरी खाई बनी हुई है।

मुख्य बातें

हरमिलन बैंस ने कहा कि भारतीय खेलों में सुधार हो रहा है, लेकिन सभी एथलीटों को समान अवसर नहीं मिलते।
पहले बड़े पदक विजेताओं को डीएसपी जैसे ऊँचे सरकारी पदों पर सीधी नियुक्ति मिलती थी, जो अब कम हो गई है।
टीम इवेंट्स में समान मेहनत करने वाले खिलाड़ियों को अलग-अलग पुरस्कार राशि मिलना निराशाजनक है।
SAI को युवा प्रतिभाओं के लिए अच्छा मंच बताया, लेकिन ज़मीनी स्तर पर छोटी अकादमियों की कमी बताई।
हरमिलन खेल से लगभग 22 वर्षों से जुड़ी हैं और आगामी सीज़न में फिट रहकर सभी टूर्नामेंट में भाग लेने की योजना है।

एशियन गेम्स में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीत चुकीं भारतीय मिडिल-डिस्टेंस रनर हरमिलन बैंस ने स्वीकार किया कि भारतीय खेल जगत में सुधार तो हो रहा है, लेकिन सभी एथलीटों को मिलने वाले अवसर और पुरस्कार अभी भी एकसमान नहीं हैं। चंडीगढ़ में दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि खेल करियर के दरवाज़े खोल सकते हैं, मगर व्यवस्था हर खिलाड़ी के साथ एक जैसा बर्ताव नहीं करती।

असमान अवसर: हरमिलन की मुख्य चिंता

हरमिलन ने कहा, 'कुछ एथलीट सफल हो जाते हैं, जबकि दूसरे अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उस स्तर की नौकरी नहीं ले पाते। अगर हम आज के पदक विजेताओं की तुलना पिछली पीढ़ियों के एथलीटों से करें, तो अब हर किसी के लिए स्थिति एक जैसी नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि पहले बड़े इवेंट्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को डीएसपी जैसे ऊँचे सरकारी पदों पर सीधी नियुक्ति मिल जाती थी, जो अब काफी कम हो गई है।

टीम इवेंट्स में पहचान का अंतर

हरमिलन ने टीम स्पर्धाओं में पुरस्कार राशि की असमानता को भी उजागर किया। रोइंग पदक विजेताओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक ही टीम में समान मेहनत करने वाले साथियों को अलग-अलग इनाम मिलना खिलाड़ियों में निराशा पैदा करता है। यह असंगति भारतीय खेल नीति की उस कमज़ोरी को उजागर करती है जिस पर लंबे समय से बहस होती रही है।

रिकवरी और पोषण पर ज़ोर

आधुनिक खेलों में शारीरिक तैयारी के बारे में हरमिलन ने कहा, 'प्रशिक्षण के बाद रिकवरी सबसे ज़रूरी हिस्सों में से एक है क्योंकि इससे तय होता है कि आप अगले सेशन में कितना अच्छा परफॉर्म कर सकते हैं। इसलिए ऐसा खाना, जो शरीर को पोषण दे, बहुत ज़रूरी है।' उन्होंने संकेत दिया कि अनेक युवा एथलीट अभी भी इस पहलू को नज़रअंदाज़ करते हैं।

SAI और छोटी अकादमियों की भूमिका

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की भूमिका को हरमिलन ने सराहा, लेकिन साथ ही ज़मीनी स्तर पर जागरूकता की कमी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, 'भारत निश्चित रूप से आगे बढ़ रहा है क्योंकि अब कई अच्छे प्लेटफॉर्म बन रहे हैं। SAI युवा एथलीटों के लिए एक बेहतरीन मंच है, लेकिन बच्चों को अभी भी नहीं पता कि उस स्तर तक कैसे पहुँचा जाए। इस कमी को पूरा करने के लिए छोटी अकादमियाँ बहुत ज़रूरी हैं।'

हरमिलन का अपना सफर और आगे की योजना

अपने खेल जीवन के बारे में हरमिलन ने बताया कि खेल उनके जीवन का हिस्सा लगभग 22 वर्षों से है — जब से वे बहुत छोटी थीं, उनके माता-पिता ने उन्हें इस दिशा में प्रेरित किया। उन्होंने गुरिंदरवीर सिंह की हालिया सफलता की भी सराहना की और कहा कि सीमित सुविधाओं के बावजूद उनका प्रदर्शन प्रेरणादायक है। आगामी सीज़न के बारे में हरमिलन ने कहा, 'मेरा मुख्य फोकस फिट रहने पर है। आगामी सभी टूर्नामेंट में हिस्सा लेना है। अगर मैं चोट से बच पाई, तो उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा।' भारतीय खेल जगत में बदलाव की यह बहस आने वाले समय में नीति-निर्माताओं के लिए एक अहम एजेंडा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

टीम स्पर्धाओं में पुरस्कार राशि की असमानता और सरकारी नौकरियों में कटौती यह दर्शाती है कि व्यवस्था अभी भी 'स्टार' एथलीट और बाकी के बीच भेद करती है। गुरिंदरवीर सिंह जैसे खिलाड़ियों की सफलता प्रेरणादायक है, लेकिन यह भी सवाल उठाती है कि सीमित संसाधनों में उभरे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संस्थागत समर्थन कब और कैसे मिलेगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरमिलन बैंस ने भारतीय एथलीटों के सम्मान में असमानता पर क्या कहा?
हरमिलन बैंस ने कहा कि कुछ एथलीट सफल होते हैं जबकि अच्छा प्रदर्शन करने वाले अन्य खिलाड़ी उसी स्तर की नौकरी नहीं पा पाते। उनके अनुसार पहले की तुलना में अब पदक विजेताओं को सरकारी पदों पर सीधी नियुक्ति के अवसर काफी कम हो गए हैं।
हरमिलन बैंस ने SAI के बारे में क्या राय दी?
उन्होंने SAI को युवा एथलीटों के लिए एक बेहतरीन मंच बताया, लेकिन साथ ही कहा कि बच्चों को अभी भी नहीं पता कि SAI तक कैसे पहुँचा जाए। इस कमी को दूर करने के लिए उन्होंने ज़मीनी स्तर पर छोटी अकादमियों की आवश्यकता पर बल दिया।
टीम इवेंट्स में पुरस्कार राशि की असमानता पर हरमिलन का क्या कहना है?
हरमिलन ने रोइंग पदक विजेताओं का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही टीम में समान मेहनत करने वाले साथियों को अलग-अलग इनाम मिलना खिलाड़ियों में निराशा पैदा करता है। उनके अनुसार यह असंगति भारतीय खेल नीति की एक बड़ी खामी है।
हरमिलन बैंस की खेल उपलब्धियाँ क्या हैं?
हरमिलन बैंस एशियन गेम्स में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीत चुकी भारतीय मिडिल-डिस्टेंस रनर हैं। वे लगभग 22 वर्षों से खेल से जुड़ी हैं और पेशेवर रूप से करीब दस वर्षों से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
हरमिलन बैंस की आगामी सीज़न की योजना क्या है?
हरमिलन ने बताया कि उनका मुख्य फोकस फिट रहने पर है और वे आगामी सभी टूर्नामेंट में हिस्सा लेना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अगर चोट से बचाव हुआ तो वे अच्छे परिणाम की उम्मीद रखती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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