कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता मनोज कुमार ने बीएफआई के नए मूल्यांकन नियम पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 13 मई। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके मुक्केबाज मनोज कुमार ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के नए एथलीट मूल्यांकन नियम की पारदर्शिता और समावेशन पर सवाल उठाए हैं। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2026 एशियन गेम्स के लिए मुक्केबाजों के चयन में लागू होने वाली नई प्रणाली में अनुभवी खिलाड़ियों को निरीक्षक या मॉनिटर के रूप में शामिल न किए जाने पर कुमार ने चिंता व्यक्त की है।
मनोज कुमार की आलोचना
मनोज कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूरी चयन प्रक्रिया केवल हेड कोच, जज और फेडरेशन तक सीमित है। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व अर्जुन अवॉर्डी, द्रोणाचार्य अवॉर्डी, ओलंपियन और सीनियर खिलाड़ियों को ऑब्जर्वर या चयन मॉनिटर के तौर पर क्यों शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विजेंदर सिंह (ओलंपिक कांस्य पदक विजेता) और अखिल कुमार (कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता) जैसे अनुभवी नामों की मौजूदगी से यह प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी हो सकती थी।
नए मूल्यांकन नियम की व्याख्या
बीएफआई ने 13 से 15 मई तक एनएस एनआईएस पटियाला में आयोजित होने वाले एलीट नेशनल कैंपर्स के लिए एक संशोधित मूल्यांकन प्रणाली की घोषणा की है। नई प्रणाली '5-जज स्कोरिंग सिस्टम' पर आधारित है, जिसे बेहतर परिणामों के लिए डिज़ाइन किया गया है। हर स्पैरिंग बाउट के समाप्त होने के तुरंत बाद स्कोर की घोषणा की जाएगी, जो अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी प्रतियोगिताओं में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के अनुरूप है।
पुराने नियमों को रद्द करना
बीएफआई ने स्पष्ट किया है कि पहले अपनाया गया मार्किंग सिस्टम मौजूदा मूल्यांकन में लागू नहीं होगा। रविवार को किए गए स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग टेस्ट को रद्द कर दिया जाएगा। स्पोर्ट्स साइंस टेस्ट, भार प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अटेंडेंस में पहले प्राप्त स्कोर वापस ले लिए जाएंगे।
बीएफआई की आधिकारिक स्थिति
बीएफआई सचिव प्रमोद कुमार ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मुक्केबाजों का चयन 13 से 15 मई तक एनएस एनआईएस में चल रहे एलीट नेशनल कैंपर्स के दौरान नए नियमों के आधार पर किया जाएगा। यह संशोधन प्रक्रिया को अधिक मानकीकृत बनाने का प्रयास है।
भारतीय मुक्केबाज़ी में पारदर्शिता की माँग
मनोज कुमार की आलोचना भारतीय खेल प्रशासन में एक व्यापक चिंता को प्रतिबिंबित करती है — चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और अनुभवी खिलाड़ियों की भागीदारी। उनका तर्क है कि जब पारदर्शिता और खिलाड़ियों के भरोसे की बात आती है, तो पूर्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनों को निरीक्षक के रूप में शामिल किया जाना चाहिए था, जो प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाता।