BWF के 3x15 स्कोरिंग सिस्टम पर विमल कुमार का बड़ा हमला — 'यह इवोल्यूशन नहीं, डाइल्यूशन है'
सारांश
Key Takeaways
- पूर्व भारतीय बैडमिंटन कोच विमल कुमार ने BWF के नए 3x15 स्कोरिंग सिस्टम को बैडमिंटन के लिए हानिकारक बताया।
- नया फॉर्मेट जनवरी 2027 से लागू होगा और इसे 198-43 वोटों से मंजूरी मिली।
- नए सिस्टम में मैच 15 अंक तक खेले जाएंगे; बराबरी पर 21 अंक तक जा सकते हैं।
- विमल कुमार ने इसे 'इवोल्यूशन नहीं, डाइल्यूशन' करार देते हुए कहा कि खेल की आत्मा खतरे में है।
- कुमार ने विश्व चैंपियनशिप में पुरस्कार राशि की कमी और अंपायरिंग रिव्यू सिस्टम का अभाव भी उठाया।
- BWF ने डेनमार्क के हॉर्सेंस में वार्षिक बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2025 — पूर्व भारतीय बैडमिंटन कोच विमल कुमार ने बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) के नए 3x15 स्कोरिंग सिस्टम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह बदलाव बैडमिंटन को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर करेगा। जनवरी 2027 से लागू होने वाले इस नए फॉर्मेट को 198-43 वोटों से मंजूरी दी गई, जो आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से कहीं अधिक है।
विमल कुमार की मुख्य आपत्तियां
विमल कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा, "BWF के स्कोरिंग सिस्टम में बदलाव के फैसले से मैं बेहद निराश हूं।" उनका कहना था कि मौजूदा 3x21 फॉर्मेट ने सभी खेल शैलियों में — विशेषकर पुरुष एकल और महिला एकल में — समान अवसर सुनिश्चित किए थे।
कुमार ने यह भी रेखांकित किया कि नए फॉर्मेट में प्रभावी रूप से 18 अंक हटाए जा रहे हैं, जो असल में एक पूरे गेम के बराबर है। उनके अनुसार इससे स्किल, मानसिक मजबूती, शारीरिक लचीलापन और फिटनेस — जो बैडमिंटन की असली पहचान हैं — की परीक्षा का मौका कम हो जाएगा।
BWF के तर्क और नया फॉर्मेट
डेनमार्क के हॉर्सेंस में आयोजित BWF की वार्षिक आम बैठक में यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ। नए ढांचे के तहत मैच 15 अंक तक बेस्ट-ऑफ-थ्री गेम के रूप में खेले जाएंगे। हालांकि, यदि स्कोर बराबर रहा, तो खेल 21 अंक तक जा सकता है।
BWF का मानना है कि इस बदलाव से मैच छोटे, तेज और दर्शकों के लिए अधिक रोमांचक बनेंगे। फेडरेशन ने यह फैसला कुछ टूर्नामेंट में एक साल से अधिक समय तक परीक्षण के बाद लिया है।
विमल कुमार की गहरी चिंताएं — सिर्फ स्कोरिंग नहीं
स्कोरिंग सिस्टम से परे, विमल कुमार ने बैडमिंटन की कुछ और बुनियादी समस्याओं पर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार विश्व चैंपियनशिप में पुरस्कार राशि अपर्याप्त है, एकल स्पर्धाओं में इनाम सीमित हैं और अंपायरिंग निर्णयों के लिए कोई रिव्यू सिस्टम मौजूद नहीं है।
उन्होंने कहा, "बैडमिंटन को दुनिया के सबसे कठिन खेलों में से एक माना जाता है। 90 मिनट के एकल मैच में लगभग एक घंटे का शटल खेल में हो सकता है — जो कई लंबे खेलों से भी अधिक है।" उनका सवाल था कि अगर बदलाव जरूरी ही था, तो इसे चुनिंदा डबल्स फॉर्मेट में क्यों नहीं लागू किया गया?
विश्लेषण — खेल के व्यावसायीकरण बनाम परंपरा का टकराव
यह विवाद केवल अंकों की संख्या का नहीं है — यह बैडमिंटन की आत्मा और उसके भविष्य की दिशा का सवाल है। BWF का यह कदम उसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें खेलों को टेलीविजन रेटिंग और OTT प्लेटफॉर्म के अनुकूल बनाया जा रहा है — चाहे क्रिकेट में T20 हो, टेनिस में टाई-ब्रेक हो या अब बैडमिंटन में 3x15।
गौरतलब है कि एशिया — विशेषकर भारत, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और दक्षिण कोरिया — बैडमिंटन के सबसे बड़े बाजार हैं, जहां दर्शक लंबे और तकनीकी मैचों की सराहना करते हैं। ऐसे में यह बदलाव उन्हीं दर्शकों को अलग कर सकता है जो इस खेल की रीढ़ हैं।
विमल कुमार की यह चेतावनी भी महत्वपूर्ण है कि खिलाड़ियों की राय शायद ही सुनी जाती है। जब तक एथलीट केंद्र में नहीं होंगे, ऐसे फैसले खेल को आगे नहीं ले जा सकते।
आगे क्या होगा
नया 3x15 स्कोरिंग सिस्टम जनवरी 2027 से आधिकारिक रूप से लागू होगा। इससे पहले BWF और अधिक टूर्नामेंट में इसका परीक्षण कर सकता है। खिलाड़ी संगठनों और पूर्व दिग्गजों की आपत्तियों को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या BWF किसी संशोधन पर विचार करता है या नहीं।