28 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीमा कालीरमन का एशियन गेम्स में बड़ा लक्ष्य: 'कांस्य से ऊपर उठना है, पदक का रंग बदलूंगी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीमा कालीरमन का एशियन गेम्स में बड़ा लक्ष्य: 'कांस्य से ऊपर उठना है, पदक का रंग बदलूंगी'

सारांश

आर्थराइटिस से 50 किग्रा तक गिरा वजन, चार साल का बेटा दूर, और साथ में पीएचडी — फिर भी सीमा कालीरमन ने ग्लासगो में 58.65 मीटर फेंककर कांस्य जीता। अब निशाना एशियन गेम्स में पदक का रंग बदलना है।

मुख्य बातें

सीमा कालीरमन ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डिस्कस थ्रो में 58.65 मीटर के थ्रो से कांस्य पदक जीता।
अगला लक्ष्य जापान में होने वाले एशियन गेम्स में पदक का रंग बदलना है।
2022 में बेटे के जन्म के बाद आर्थराइटिस से वजन 80-85 किग्रा से घटकर 50-55 किग्रा हो गया था; पति-कोच रविंदर की ट्रेनिंग से वापसी हुई।
पीएचडी शोध का विषय है — 'एथलीटों की परफॉर्मेंस पर इमेजिनरी और पॉजिटिव सेल्फ-टॉक ट्रेनिंग का असर' ; इसे वह खुद पर भी लागू करती हैं।
चार साल का बेटा भिवानी में दादा-दादी के साथ रहता है; ट्रेनिंग के दौरान कभी-कभी पटियाला आकर 2-3 दिन मिलता है।

डिस्कस थ्रो एथलीट सीमा कालीरमन ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 58.65 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतने के बाद अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया है — जापान में होने वाले एशियन गेम्स में पदक का रंग बदलना। आर्थराइटिस से उबरकर, पीएचडी करते हुए और चार साल के बेटे से दूर रहकर यह उपलब्धि हासिल करने वाली सीमा का सफर खेल जगत में प्रेरणा की एक अनूठी मिसाल बन चुका है।

कॉमनवेल्थ में मानसिक दृढ़ता की जीत

सीमा ने बताया कि ग्लासगो में उनका पहला थ्रो नेट से टकरा गया, लेकिन उन्होंने घबराने की बजाय खुद को यह याद दिलाया कि उनके पास अभी पाँच थ्रो बाकी हैं। उनका दूसरा थ्रो लगभग 57 मीटर तक गया, और तीसरे प्रयास में उन्होंने 58.65 मीटर का थ्रो फेंककर पदक पक्का किया। उन्होंने कहा, "अगर मैं मानसिक रूप से तैयार नहीं होती, तो मैं अपने दूसरे थ्रो भी अच्छे से नहीं कर पाती।"

पीएचडी और खेल: एक साथ दो मोर्चे

सीमा इस समय पीएचडी कर रही हैं और उनके शोध का विषय है — 'एथलीटों की परफॉर्मेंस पर इमेजिनरी और पॉजिटिव सेल्फ-टॉक ट्रेनिंग का असर'। उल्लेखनीय है कि वह यही तकनीक मैदान पर खुद भी आज़माती हैं। उन्होंने कहा, "मैं इसे खुद पर लागू कर रही हूं, और इससे मुझे अच्छे परिणाम मिले हैं, इसमें कॉमनवेल्थ भी शामिल है।" शनिवार-रविवार और अन्य आराम के दिनों का उपयोग वह अपनी पीएचडी के लिए करती हैं, ताकि खेल की तैयारी प्रभावित न हो।

आर्थराइटिस से वापसी: पति-कोच रविंदर का साथ

2022 में बेटे के जन्म के बाद सीमा को आर्थराइटिस ने जकड़ लिया। उनका वजन 80-85 किग्रा से घटकर 50-55 किग्रा हो गया। डॉक्टरों ने स्टेरॉयड लेने की सलाह दी, लेकिन उनके पति और कोच रविंदर ने उन्हें मसल्स ट्रेनिंग के ज़रिए ठीक होने का रास्ता दिखाया। सीमा ने बताया, "मेरे पति ने मुझसे कहा कि हम प्रैक्टिस और ट्रेनिंग करेंगे, जिससे मुझे मसल्स बनाने में मदद मिलेगी और इससे आर्थराइटिस का दर्द काफी कम हो सकता है।" आज आर्थराइटिस का दर्द स्थायी नहीं रहा, हालांकि वह कभी-कभी लौट आता है।

खान-पान और सतर्कता

हाल के सिल्वर कॉन्टिनेंटल टूर के दौरान सीमा के हाथों और पैरों में सूजन आ गई थी। कुछ दिनों की जाँच के बाद उन्हें कारण पता चला और उन्होंने उस खाद्य पदार्थ को छोड़ दिया। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि क्या खाना है और क्या नहीं।" यह सतर्कता उनके प्रदर्शन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

माँ, शोधकर्ता और एथलीट: तीन भूमिकाओं का संतुलन

सीमा का चार साल का बेटा भिवानी में दादा-दादी के साथ रहता है और कभी-कभी उनसे मिलने पटियाला आता है, जहाँ वह 2-3 दिन रुककर वापस चला जाता है। सीमा ने स्वीकार किया कि ट्रेनिंग के कारण बेटे से दूर रहना भावनात्मक रूप से कठिन है, लेकिन परिवार के सहयोग ने यह संतुलन संभव बनाया है। एशियन गेम्स में बेहतर पदक की उनकी प्रतिबद्धता इस पूरे संघर्ष को और अर्थपूर्ण बना देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस प्रणाली की परीक्षा है जो महिला एथलीटों को मातृत्व के बाद प्रायः हाशिए पर धकेल देती है। उनका पीएचडी विषय — पॉजिटिव सेल्फ-टॉक और परफॉर्मेंस — महज़ शैक्षणिक नहीं, बल्कि उनकी अपनी जीवन-रणनीति है, जो खेल मनोविज्ञान को व्यावहारिक धरातल पर साबित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय एथलेटिक्स में मानसिक स्वास्थ्य और खिलाड़ियों के पुनर्वास की चर्चा बढ़ रही है। सवाल यह है कि क्या भारतीय खेल संस्थाएँ ऐसे एथलीटों के लिए संरचनात्मक सहयोग — चाइल्डकेयर, मेडिकल फॉलो-अप, शोध अनुदान — तैयार कर पाएंगी, या यह सब व्यक्तिगत इच्छाशक्ति पर ही निर्भर रहेगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीमा कालीरमन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कितने मीटर का थ्रो फेंककर पदक जीता?
सीमा कालीरमन ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर का थ्रो फेंककर डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीता। उनका पहला थ्रो नेट से टकरा गया था और दूसरा लगभग 57 मीटर तक गया था।
सीमा कालीरमन का एशियन गेम्स में क्या लक्ष्य है?
सीमा कालीरमन जापान में होने वाले एशियन गेम्स में कांस्य से बेहतर पदक जीतना चाहती हैं — यानी पदक का रंग बदलना उनका अगला बड़ा लक्ष्य है। कॉमनवेल्थ में कांस्य जीतने के बाद उन्होंने यह प्रतिबद्धता दोहराई है।
सीमा कालीरमन को आर्थराइटिस कब और कैसे हुआ, और वे कैसे ठीक हुईं?
2022 में बेटे के जन्म के बाद सीमा को आर्थराइटिस हो गया, जिससे उनका वजन 80-85 किग्रा से घटकर 50-55 किग्रा रह गया। डॉक्टरों ने स्टेरॉयड की सलाह दी, लेकिन उनके पति और कोच रविंदर ने मसल्स ट्रेनिंग के ज़रिए उन्हें ठीक किया; अब दर्द स्थायी नहीं रहा।
सीमा कालीरमन की पीएचडी किस विषय पर है?
सीमा कालीरमन का पीएचडी शोध 'एथलीटों की परफॉर्मेंस पर इमेजिनरी और पॉजिटिव सेल्फ-टॉक ट्रेनिंग का असर' विषय पर है। वह इसी तकनीक को मैदान पर खुद पर भी लागू करती हैं और कॉमनवेल्थ पदक को इसका प्रत्यक्ष परिणाम मानती हैं।
सीमा कालीरमन माँ, एथलीट और शोधकर्ता की भूमिकाएँ एक साथ कैसे निभाती हैं?
सीमा का चार साल का बेटा भिवानी में दादा-दादी के साथ रहता है और कभी-कभी पटियाला आकर 2-3 दिन मिलता है। शनिवार-रविवार और आराम के दिनों में वह पीएचडी पर काम करती हैं, जबकि बाकी समय ट्रेनिंग को समर्पित रहता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 4 सप्ताह पहले
  6. 4 सप्ताह पहले
  7. 4 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले