कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जदुमणि सिंह ने 55 किग्रा में जीता रजत, एशियन गेम्स में स्वर्ण का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 1 अगस्त को भारतीय मुक्केबाज मंदेंगबाम जदुमणि सिंह ने पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में रजत पदक हासिल किया। स्वर्ण पदक की प्रबल उम्मीद लिए उतरे जदुमणि का यह कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला अनुभव रहा, और परिणाम ने परिवार को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया।
मुक्केबाज का संकल्प
रजत पदक जीतने के बाद जदुमणि सिंह ने कहा, 'मैंने स्वर्ण पदक जीतने के लिए इस प्रतियोगिता में अपना सब कुछ झोंक दिया, लेकिन कुछ कमियां रह गईं। मैं उन पर काम करूंगा और उन्हें दूर करूंगा। आने वाले एशियन गेम्स में मैं भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतूंगा।' उनके इस संकल्प ने परिवार और समर्थकों में नई उम्मीद जगाई है।
परिवार की प्रतिक्रिया
जदुमणि के बड़े भाई मंदेंगबाम रॉबिन्सन सिंह ने निराशा जाहिर करते हुए कहा, 'हमें लगा था कि वह स्वर्ण पदक जीतेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह बहुत निराशाजनक है। हमें लगता है कि वह आने वाले एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतेंगे।'
उनके चाचा मंडेंगबाम मिलन सिंह ने कहा, 'फाइनल टूर्नामेंट के पिछले मुकाबलों से अलग था। मुझे सच में नहीं पता कि उसने आज कैसा खेला। हम सच में बहुत दुखी हैं क्योंकि हम स्वर्ण पदक की उम्मीद कर रहे थे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह जदुमणि का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और रजत पदक भी गर्व की बात है।
पूरे मोहल्ले ने देखा मैच
जदुमणि की चाची मंडेंगबाम ओंगबी अबेम ने बताया कि परिवार और आस-पड़ोस के लोगों ने एकजुट होकर मुकाबला देखा। उन्होंने कहा, 'आज जब हमने उसका प्रदर्शन देखा तो हमें घबराहट हुई। उसका प्रदर्शन पिछले मैचों से बिल्कुल अलग था। हम आगे भी उसे अपना समर्थन देते रहेंगे।' यह भावनात्मक दृश्य इम्फाल में जदुमणि के घर के आसपास देखने को मिला।
एशियन गेम्स पर नज़र
चाचा मिलन सिंह के अनुसार, जदुमणि अब जापान में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी में जुटेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाज़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान और मज़बूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत पदक भी एशियन गेम्स की चयन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है।