कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जादुमणि सिंह का सिल्वर, सरिता देवी को दिया सफलता का पूरा श्रेय
सारांश
मुख्य बातें
ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय बॉक्सर जादुमणि सिंह ने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अनुभवी बॉक्सर सरिता देवी को दिया है। 22 वर्षीय जादुमणि ने कहा कि सरिता देवी के निरंतर मार्गदर्शन और अटूट विश्वास के बिना ग्लासगो में यह प्रदर्शन संभव नहीं होता।
फाइनल में क्या हुआ
1 अगस्त को खेले गए फाइनल मुकाबले में जादुमणि सिंह को ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के हाथों 0-5 के सर्वसम्मत फैसले से हार का सामना करना पड़ा। तीन राउंड के इस मुकाबले में जादुमणि ने डिक्सन को कड़ी टक्कर दी, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बॉक्सर की अनुशासित काउंटर-पंचिंग और सटीक स्कोरिंग शॉट्स सभी पाँचों जजों को प्रभावित करने में सफल रहे।
सरिता देवी की भूमिका
फाइनल के बाद जादुमणि ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'सरिता मैम ने बचपन से ही मुझे बहुत सपोर्ट किया है। उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया है, चाहे वह मेरी डाइट, ट्रेनिंग या एक एथलीट होने के हर पहलू के बारे में मार्गदर्शन करना हो। वह मुझसे हर दिन बात करती हैं और रोज़ाना वीडियो कॉल करती हैं। उन्होंने हमेशा मुझे सिखाया है कि खेल को कैसे अपनाना है और एक सफल बॉक्सर बनने के लिए क्या-क्या ज़रूरी है।'
जादुमणि ने आगे बताया, 'इस प्रतियोगिता के दौरान सरिता देवी का सपोर्ट और भी अहम था। उन्होंने लगातार मेरा मार्गदर्शन किया कि कैसे लड़ना है, क्या करना है और किन चीज़ों से बचना है। उन्होंने मेरे हर मुकाबले को देखा और हर फाइट के बाद ज़रूरी फीडबैक दिया। वह मुझे यह कहकर प्रेरित करती रहीं कि मैं गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटूंगा — उस भरोसे और हौसला-अफ़ज़ाई का मेरे लिए बहुत महत्व था।'
टूर्नामेंट में जादुमणि का सफर
ग्लासगो में जादुमणि का सफर शानदार रहा। राउंड ऑफ-32 में उन्होंने स्कॉटलैंड के एरन कलन को 5-0 से हराया, इसके बाद पाकिस्तान के सुमामा रहमान को भी 5-0 से मात दी। क्वार्टर फाइनल में ज़ाम्बिया के म्वेंगो म्वाले को 5-0 से पराजित किया और सेमीफाइनल में नामीबिया के फिलिप पुमुलो मुटाकेला हाओसेब को भी 5-0 से धूल चटाई। यानी फाइनल से पहले जादुमणि ने अपने चारों मुकाबले सर्वसम्मत फैसले से जीते।
आगे का लक्ष्य
गोल्ड से चूकने के बावजूद जादुमणि ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'मैं भारत के लिए मेडल जीतकर खुश हूँ, लेकिन ज़ाहिर है कि मैं गोल्ड चाहता था। यह सिल्वर मेडल मुझे और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा। अब मेरा फोकस खुद को बेहतर बनाने और एशियन गेम्स व अन्य बड़े इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में अच्छा प्रदर्शन करने पर है।' यह सिल्वर मेडल जादुमणि के करियर का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों से पहले उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई देता है।