कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जदुमणि, अरुंधति, जैस्मिन समेत 5 भारतीय मुक्केबाज़ फाइनल में, रजत पक्का
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय मुक्केबाज़ी दल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 31 जुलाई को ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 5 फाइनल बर्थ हासिल किए। मांडेंगबाम जदुमणि सिंह, अरुंधति चौधरी और जैस्मिन लंबोरिया सहित सभी पाँचों मुक्केबाज़ों ने अपने-अपने सेमीफाइनल जीतकर कम से कम रजत पदक सुनिश्चित कर लिया है। इसके साथ ही जूडो में भी तीन भारतीय एथलीट फाइनल में पहुँचे हैं, जिससे 31 जुलाई भारत के लिए इन खेलों का अब तक का सबसे सफल दिन बन गया।
मुक्केबाज़ी: पाँचों फाइनल बर्थ का ब्यौरा
मांडेंगबाम जदुमणि सिंह ने पुरुषों की 55 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में नामीबिया के हाओसेब फिलिप पुमुलो को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से पराजित किया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में एकतरफा रहा और अब उनकी नज़रें स्वर्ण पदक पर टिकी हैं।
अरुंधति चौधरी ने महिलाओं की 70 किग्रा वर्ग में वेल्स की रोजी एक्लेस को 4-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। जैस्मिन लंबोरिया ने महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में लेसोथो की रैपेलांग मासेलेला को रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट (RSC) के ज़रिए हराया — यह जीत उनकी आक्रामक बॉक्सिंग शैली का प्रमाण है।
इससे पहले अंकुश पंघाल ने 80 किग्रा वर्ग में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से और प्रीति पवार ने महिलाओं की 54 किग्रा वर्ग में जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराकर फाइनल की राह पक्की की थी।
जूडो में भी तीन फाइनल बर्थ
मुक्केबाज़ी के अलावा भारतीय जूडो दल ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किग्रा वर्ग में स्कॉटलैंड की समर शॉ को हराकर फाइनल में जगह बनाई — उनका सामना कनाडा की हेइडी क्वैच से होगा।
हर्ष सिंह ने पुरुषों की 60 किग्रा स्पर्धा में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराया और अब उनका फाइनल मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के ही जोशुआ कैट्ज से होगा। यामिनी मौर्या ने महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेयटेनबैक को इप्पोन से पराजित कर फाइनल में स्थान पाया; उनका मुकाबला इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक से होगा।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह दिन
गौरतलब है कि एक ही दिन में मुक्केबाज़ी और जूडो मिलाकर कुल 8 फाइनल बर्थ हासिल करना भारत के लिए कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में दुर्लभ उपलब्धि है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी खेल नीति के तहत ओलंपिक और कॉमनवेल्थ पदकों की संख्या बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है। सभी 5 मुक्केबाज़ों का रजत पदक पहले ही सुनिश्चित हो चुका है, और उनका लक्ष्य इसे स्वर्ण में बदलना है।
आगे क्या
फाइनल मुकाबले आने वाले दिनों में होंगे, जिनमें सभी आठों एथलीट स्वर्ण पदक के लिए उतरेंगे। भारतीय दल का प्रदर्शन जारी रहा तो ग्लासगो 2026 भारत के लिए कॉमनवेल्थ खेलों का ऐतिहासिक संस्करण साबित हो सकता है।