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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारतीय मुक्केबाजों के 7 स्वर्ण पदक, BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने बताई सफलता की वजह

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारतीय मुक्केबाजों के 7 स्वर्ण पदक, BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने बताई सफलता की वजह

सारांश

ग्लासगो 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में रिकॉर्ड 7 स्वर्ण पदक जीते। BFI अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार यह एथलीट-फर्स्ट नीति और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूरी का नतीजा है — और यह सिर्फ शुरुआत है।

मुख्य बातें

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीते — किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने 'एथलीट-फर्स्ट नीति' और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूरी को सफलता का मुख्य कारण बताया।
स्वर्ण पदक विजेताओं में प्रीति, साक्षी, जैस्मीन, प्रिया, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल शामिल।
लवलीना बोरगोहेन, जदुमणि सिंह और नरेंद्र ने रजत पदक जीते।
यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 के स्वर्ण पदकों की संख्या से अधिक है।
सिंह के अनुसार भारत की मज़बूत बेंच स्ट्रेंथ देश को एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में भी बड़े परिणाम दिलाने में सक्षम है।

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा है कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के ऐतिहासिक सात स्वर्ण पदक जीतने के पीछे 'एथलीट-फर्स्ट' नीति और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूरी की रणनीति प्रमुख कारण रही है। 2 अगस्त 2026 को आयोजित BFI की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मज़बूत बेंच स्ट्रेंथ देश को एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में भी बड़े परिणाम देने में सक्षम बनाएगी।

ऐतिहासिक प्रदर्शन: एक कॉमनवेल्थ में सर्वाधिक स्वर्ण

भारत ने ग्लासगो 2026 में मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीते — जो किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग स्पर्धा में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यह आँकड़ा बर्मिंघम 2022 के स्वर्ण पदकों की संख्या से भी अधिक है। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में भारतीय मुक्केबाजों ने दबदबा बनाए रखा।

किसने जीते स्वर्ण और रजत पदक

स्वर्ण पदक विजेताओं में प्रीति (54 किग्रा), साक्षी (51 किग्रा), जैस्मीन (57 किग्रा), प्रिया (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) शामिल रहे। जदुमणि सिंह (55 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), और नरेंद्र (90+ किग्रा) ने रजत पदक अपने नाम किए।

सचिन सिवाच ने पुरुषों के 60 किग्रा फाइनल में नामीबिया के ट्रायगेन मोर्नी नेडेवेलो को 3-2 के विभाजित निर्णय से हराया। अरुंधति चौधरी ने महिलाओं के 70 किग्रा फाइनल में इंग्लैंड की चैंटेल रीड को एकमत से पराजित किया। जैस्मीन ने 57 किग्रा वर्ग में बर्मिंघम 2022 की चैंपियन नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को 5-0 से मात दी।

साक्षी ने 51 किग्रा फाइनल में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को 5-0 से हराया — तेज़ फुटवर्क, सटीक कॉम्बिनेशन और मज़बूत डिफेंस के दम पर पूरे मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। प्रिया ने 60 किग्रा में कनाडा की मैरी-बाथौल अल-अहमदीह को 4-1 से और प्रीति ने 54 किग्रा में कनाडा की एस.एस. डेलगाडो को 5-0 से हराया।

अजय सिंह ने बताई सफलता की रणनीति

BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हमारी सफलता की वजह एथलीट-फर्स्ट नीति और राजनीति को इससे जितना हो सके दूर रखने की कोशिश करना है। उन्हें अच्छा माहौल देना भारत की सफलता का मुख्य कारण रहा है। मुझे लगता है कि एथलीटों के अंदर सफलता की भूख है — वे वैश्विक मंचों पर अच्छा करने के लिए इतने उत्सुक हैं। यह उनकी कड़ी मेहनत, कोशिश और लगन है जो इसे मुमकिन बनाती है।'

उन्होंने आगे कहा, 'हमें उन्हें दुनिया की सबसे अच्छी चैंपियनशिप और सबसे अच्छी तैयारी देनी होगी जो हम दे सकते हैं। किसी भी चीज़ की कमी नहीं होनी चाहिए। हमने टीम को — महिलाओं और पुरुषों दोनों को — भरोसा दिलाया है कि उनके पास दुनिया की हर चीज़ सबसे अच्छी होगी। उस सपोर्ट का नतीजा दिख रहा है।'

आगे का रास्ता: एशियन गेम्स और ओलंपिक्स

सिंह ने भारतीय मुक्केबाजी की गहरी बेंच स्ट्रेंथ की ओर इशारा करते हुए कहा कि देश के पास फर्स्ट-लाइन टीम के अलावा नंबर दो, तीन और चार स्तर के खिलाड़ी भी उत्कृष्ट हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाजी ओलंपिक 2028 की तैयारी के निर्णायक दौर में है। गौरतलब है कि यह भारत की बॉक्सिंग में लगातार बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है — और यह प्रदर्शन आने वाले मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स में और भी ऊँचे लक्ष्यों की नींव रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि BFI की 'एथलीट-फर्स्ट' नीति ओलंपिक चक्र की कठिन परीक्षाओं में भी कायम रहती है या नहीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतिस्पर्धा का स्तर ओलंपिक से भिन्न होता है — यूरोप, लैटिन अमेरिका और क्यूबा जैसे पारंपरिक बॉक्सिंग महाशक्तियाँ इस मंच पर अनुपस्थित रहती हैं। लवलीना बोरगोहेन जैसी ओलंपिक पदक विजेता का रजत पर रुकना यह संकेत देता है कि शीर्ष स्तर पर अभी भी अंतर है। BFI के लिए असली परीक्षा 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक होगी — जहाँ स्वर्ण की चमक को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने मुक्केबाजी में कितने पदक जीते?
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीते। यह किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने भारत की सफलता का क्या कारण बताया?
BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने 'एथलीट-फर्स्ट' नीति और खेल को राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रखने को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि एथलीटों को विश्व-स्तरीय सुविधाएँ और माहौल देना भारत की सफलता की बुनियाद है।
भारत के लिए स्वर्ण पदक किन मुक्केबाजों ने जीते?
प्रीति (54 किग्रा), साक्षी (51 किग्रा), जैस्मीन (57 किग्रा), प्रिया (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते। जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र ने रजत पदक हासिल किए।
क्या यह बर्मिंघम 2022 से बेहतर प्रदर्शन है?
हाँ, ग्लासगो 2026 में जीते गए 7 स्वर्ण पदक बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या से अधिक हैं। यह भारतीय मुक्केबाजी के लिए एक नया कीर्तिमान है।
भारतीय मुक्केबाजी का अगला लक्ष्य क्या है?
BFI अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार भारत की नज़र अब एशियन गेम्स और 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक पर है। उन्होंने कहा कि भारत के पास मज़बूत बेंच स्ट्रेंथ है जो इन बड़े मंचों पर भी शानदार प्रदर्शन सुनिश्चित करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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