3 अगस्त 2026
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CWG 2026: जूडो में पहला गोल्ड, मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण — 5 कारण जो भारत के लिए ग्लासगो को बनाते हैं यादगार

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CWG 2026: जूडो में पहला गोल्ड, मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण — 5 कारण जो भारत के लिए ग्लासगो को बनाते हैं यादगार

सारांश

रेसलिंग, बैडमिंटन और हॉकी के बिना भी भारत ने ग्लासगो में 39 पदक जीते। जूडो में पहला गोल्ड, मुक्केबाजी में रिकॉर्ड 7 स्वर्ण, मीराबाई की हैट्रिक, गुलवीर का ऐतिहासिक दोहरा पदक और शर्मिला का 20 साल बाद पैरा गोल्ड — CWG 2026 भारतीय खेलों का एक नया अध्याय है।

मुख्य बातें

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन 3 अगस्त को ग्लासगो, स्कॉटलैंड में हुआ; भारत ने कुल 39 पदक जीते।
भारतीय मुक्केबाजों ने रिकॉर्ड 7 स्वर्ण सहित 10 पदक जीते — किसी एक संस्करण में मुक्केबाजी का सर्वोच्च प्रदर्शन।
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में पहली बार CWG गोल्ड दिलाया; कुल 4 जूडो पदक मिले।
मीराबाई चानू ने 48 किग्रा में 190 किलो उठाकर लगातार तीसरी बार CWG गोल्ड जीता।
गुलवीर सिंह एक ही CWG संस्करण में ट्रैक एंड फील्ड में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने ( 10,000 मी.
पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने शॉट पुट F57 में 9.81 मीटर थ्रो से गोल्ड जीता, पैरा एथलेटिक्स में 20 साल का सूखा खत्म किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 3 अगस्त को ग्लासगो, स्कॉटलैंड में भव्य समापन समारोह के साथ पर्दा गिरा और भारत ने कुल 39 पदक जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। रेसलिंग, बैडमिंटन और हॉकी जैसे परंपरागत रूप से मज़बूत खेलों की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय दल ने ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। यहाँ वे पाँच कारण हैं जो इस संस्करण को भारतीय खेल इतिहास में विशेष स्थान दिलाते हैं।

मुक्केबाजी में भारत की सर्वश्रेष्ठ पदक तालिका

भारतीय मुक्केबाजों ने ग्लासगो में अपना अब तक का सर्वोत्तम प्रदर्शन किया। भारत ने मुक्केबाजी में कुल 10 पदक जीते, जिनमें रिकॉर्ड 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं — यह किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स संस्करण में मुक्केबाजी में भारत का अब तक का सर्वाधिक स्वर्ण है। भारतीय महिला मुक्केबाजों ने 5 गोल्ड और 1 सिल्वर जीतकर अभियान की अगुवाई की, जबकि पुरुष मुक्केबाजों ने 2 गोल्ड और 2 सिल्वर अपने नाम किए। गौरतलब है कि यह पहला अवसर है जब भारतीय मुक्केबाजी दल ने एक ही संस्करण में सात स्वर्ण पदक का आँकड़ा छुआ।

जूडो में ऐतिहासिक स्वर्ण — पहली बार

कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार भारत ने जूडो में स्वर्ण पदक जीता। अस्मिता डे और हर्ष सिंह दोनों ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया और भारतीय जूडो को नई ऊँचाई दी। यामिनी मौर्य ने रजत पदक और उन्नति शर्मा ने कांस्य पदक जीता। कुल मिलाकर भारत ने जूडो में 4 पदक हासिल किए — जो इस खेल में देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

मीराबाई चानू की गोल्ड हैट्रिक

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता और लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने की हैट्रिक पूरी की। वह इस संस्करण में भारत की सबसे बड़ी पदक दावेदारों में से एक मानी जा रही थीं और उन्होंने देश की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए यह उपलब्धि हासिल की।

गुलवीर सिंह — ट्रैक एंड फील्ड में दोहरे पदक का इतिहास

लॉन्ग डिस्टेंस धावक गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में इतिहास रचा। उन्होंने पहले पुरुषों की 10,000 मीटर फाइनल में रजत पदक जीता और फिर 5,000 मीटर में कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह वह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स संस्करण में ट्रैक एंड फील्ड में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने — एक ऐसी उपलब्धि जो भारतीय एथलेटिक्स के लिए नए द्वार खोलती है।

शर्मिला धनखड़ — 20 साल का सूखा खत्म

पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक जीता और पैरा एथलेटिक्स में भारत का 20 साल का इंतजार खत्म किया। वह CWG 2026 में पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी रहीं। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारतीय पैरा खेल वैश्विक मंच पर तेज़ी से पहचान बना रहे हैं। आगामी अंतरराष्ट्रीय पैरा प्रतियोगिताओं में भारत की इन उपलब्धियों की गूँज सुनाई देने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे उस संदर्भ में देखना ज़रूरी है जिसमें रेसलिंग, बैडमिंटन और हॉकी — भारत के पारंपरिक पदक स्रोत — इस संस्करण में शामिल ही नहीं थे। जूडो और ट्रैक एंड फील्ड में नई उपलब्धियाँ बताती हैं कि भारतीय खेल का आधार चौड़ा हो रहा है, जो उत्साहजनक है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब ये खेल ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर दिखेंगे — जहाँ प्रतिस्पर्धा का स्तर CWG से कहीं ऊँचा होता है। मीराबाई चानू की हैट्रिक और शर्मिला धनखड़ की वापसी व्यक्तिगत उत्कृष्टता के प्रमाण हैं, पर भारतीय खेल तंत्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये सफलताएँ अकेले सितारों तक सीमित न रहें।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CWG 2026 में भारत ने कुल कितने पदक जीते?
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 39 पदक जीते। यह उपलब्धि तब हासिल हुई जब रेसलिंग, बैडमिंटन और हॉकी जैसे परंपरागत रूप से मज़बूत खेल इस संस्करण में शामिल नहीं थे।
CWG 2026 में भारत ने जूडो में गोल्ड कैसे जीता?
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने ग्लासगो में स्वर्ण पदक जीते, जो कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का जूडो में पहला गोल्ड था। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जीता, जिससे भारत ने जूडो में कुल 4 पदक हासिल किए।
मीराबाई चानू की गोल्ड हैट्रिक क्या है?
मीराबाई चानू ने CWG 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता। यह लगातार तीसरी बार था जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता, जिससे उन्होंने हैट्रिक पूरी की।
गुलवीर सिंह ने CWG 2026 में क्या इतिहास रचा?
गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता। इस तरह वह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स संस्करण में ट्रैक एंड फील्ड में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
शर्मिला धनखड़ ने CWG 2026 में क्या उपलब्धि हासिल की?
पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने शॉट पुट F57 में 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में भारत का 20 साल का इंतजार खत्म किया और CWG 2026 में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
राष्ट्र प्रेस
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