कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 जूडो: यामिनी मौर्य का रजत, अस्मिता-हर्ष का ऐतिहासिक स्वर्ण
सारांश
मुख्य बातें
ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 31 जुलाई को जूडो ने भारत को एक यादगार दिन दिया — अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीते, जबकि यामिनी मौर्य ने महिलाओं की 57 किग्रा स्पर्धा के फाइनल में रजत पदक हासिल किया। एक ही दिन में जूडो में 3 पदक जीतकर भारत ने इस खेल में अपनी बढ़ती वैश्विक ताकत का स्पष्ट संदेश दिया।
यामिनी मौर्य का रजत पदक
महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में यामिनी मौर्य का सामना इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक से था। यामिनी को इस निर्णायक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हालाँकि, फाइनल तक पहुँचना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि रही, और यह पदक दिन के भारतीय जूडो अभियान का तीसरा था।
अस्मिता डे का ऐतिहासिक स्वर्ण
यामिनी के फाइनल से पहले अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किग्रा वर्ग में इतिहास रच दिया। फाइनल में उन्होंने कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 के रोमांचक मुकाबले में हराया। अस्मिता ने आखिरी चरण में असाधारण धैर्य और रणनीतिक अनुशासन का परिचय देते हुए यह स्वर्ण पदक अपने नाम किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में यह भारत का पहला स्वर्ण पदक था — एक ऐसी उपलब्धि जो दशकों की प्रतीक्षा के बाद मिली।
हर्ष सिंह: पुरुष जूडो में पहला स्वर्ण
23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को पराजित कर स्वर्ण पदक जीता। मुकाबले में कैट्ज ने शुरुआत में कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन हर्ष ने 41 सेकंड शेष रहते एक शानदार वाजा-अरी — जूडो की दूसरी सर्वोच्च स्कोरिंग तकनीक — से निर्णायक बढ़त बनाई। इसके बाद उन्होंने शेष समय में मज़बूत बचाव करते हुए जीत सुनिश्चित की। इस स्वर्ण के साथ हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए।
भारतीय जूडो का बढ़ता दबदबा
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जूडो संघ ने पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और एक्सपोज़र पर विशेष ध्यान दिया है। अस्मिता और हर्ष के स्वर्ण पदक, और यामिनी का रजत — तीनों मिलकर वैश्विक मंच पर भारतीय जूडो की नई पहचान स्थापित करते हैं। ग्लासगो में एक ही दिन में तीन पदक जीतना भारतीय जूडो के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।
आगे क्या
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के जूडो दल का यह प्रदर्शन आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से युवा जूडोकाओं में प्रेरणा का संचार होगा और देश में इस खेल की लोकप्रियता बढ़ेगी।