कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: यामिनी मौर्या का संकल्प — 'भारत को गर्व दिलाने के लिए पूरी ताकत लगाऊंगी'
सारांश
मुख्य बातें
यामिनी मौर्या, एफआईएसयू वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका, ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 28 वर्षीया इस खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना ली है और अब राष्ट्रमंडल खेलों में पदक की दावेदार के रूप में उतर रही हैं।
यामिनी की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ
यामिनी ने अफ्रीकन ओपन और एशियन ओपन दोनों में स्वर्ण पदक जीते हैं, जिससे वह महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में भारत की शीर्ष जूडोका में शुमार हो गई हैं। एफआईएसयू वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका बनने का उनका रिकॉर्ड इस सफर की नींव है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जूडो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना रहा है और यामिनी जैसी खिलाड़ियाँ इस खेल को नई पहचान दिला रही हैं।
मुकाबले से पहले यामिनी का मंत्र
अपने इवेंट से पहले यामिनी ने कहा, 'जूडो में, आप बहुत आगे की नहीं सोच सकते क्योंकि हर बाउट अलग होता है। मेरा फोकस हमेशा मेरे सामने वाले मैच पर होता है और हमने ट्रेनिंग में जिस पर काम किया है, उसे करने पर। तैयारी अच्छी रही है, और मैं आत्मविश्वास महसूस कर रही हूं। अब यह शांत रहने, मैट पर सही फैसले लेने और हर मुकाबले में अपना श्रेष्ठ देने के बारे में है।'
उन्होंने यह भी कहा, 'मजबूत अंतरराष्ट्रीय विपक्षी के खिलाफ मुकाबला करने से आपको हर बार कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। आप समझते हैं कि आपको कहाँ सुधार करने की जरूरत है और दबाव में क्या काम करता है। उन अनुभवों ने मुझे एक बेहतर एथलीट बनने में मदद की है। मैं कॉमनवेल्थ गेम्स में खुद को फिर से टेस्ट करने के लिए उत्साहित हूं।'
इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट की भूमिका
यामिनी ने इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट में मिली सुविधाओं का विशेष उल्लेख किया। उनके अनुसार, 'न्यूट्रिशन और फिजियोथेरेपी से लेकर रिकवरी और ट्रेनिंग तक, हमारे आस-पास एक बहुत अच्छा सपोर्ट सिस्टम है, इसलिए मैं पूरी तरह से जूडो पर फोकस कर सकती हूं। अलग-अलग खेलों के एथलीट के साथ कैंपस में रहना, जो सभी एक ही सपने का पीछा कर रहे हैं, यह भी बहुत प्रेरित करने वाला है।'
गौरतलब है कि एकीकृत खेल अकादमियों की यह अवधारणा भारतीय खेलों में तेजी से प्रासंगिक होती जा रही है, जहाँ विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर एथलीटों को प्रशिक्षण में मदद कर रहा है।
देश के लिए खेलने का जज्बा
भारत की जर्सी पहनने के जज्बे पर यामिनी ने कहा, 'भारत की जर्सी पहनना हमेशा गर्व की बात होती है। हर एथलीट देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है। मैं भी अलग नहीं हूं। मैं हर बाउट में आत्मविश्वास के साथ जाऊंगी, अपनी पूरी ताकत और स्किल लगाऊंगी और भारत को गर्व महसूस कराने की कोशिश करूंगी।'
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में यामिनी का प्रदर्शन न केवल उनके करियर के लिए, बल्कि भारतीय जूडो के भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।