29 अगस्त 2026
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जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 57 किग्रा में जीता स्वर्ण, भिवानी की 'लिटिल क्यूबा' से उठी चैंपियन

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जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 57 किग्रा में जीता स्वर्ण, भिवानी की 'लिटिल क्यूबा' से उठी चैंपियन

सारांश

भिवानी की 'लिटिल क्यूबा' में लड़कों के साथ अभ्यास से शुरू हुआ जैस्मिन लंबोरिया का सफर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के स्वर्ण तक पहुँचा। 25 साल की इस मुक्केबाज ने समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी और अब ओलंपिक पदक की दावेदार बन चुकी हैं।

मुख्य बातें

जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 57 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
भारतीय मुक्केबाजी टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रिकॉर्ड 7 स्वर्ण पदक जीते।
जैस्मिन का जन्म 30 अगस्त 2001 को भिवानी, हरियाणा में हुआ; उन्होंने लैंबोरिया बॉक्सिंग अकादमी में लड़कों के साथ प्रशिक्षण लिया।
2025 में अस्ताना में विश्व बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक जीतकर वैश्विक पहचान बनाई।
चाचा संदीप और परविंदर — दोनों राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज — ने उनका मार्गदर्शन किया।
आगामी एशियन गेम्स और ओलंपिक में पदक की प्रबल उम्मीद।

जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 57 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय महिला मुक्केबाजी में एक नया अध्याय लिखा। भिवानी, हरियाणा की इस मुक्केबाज ने भारतीय टीम के ऐतिहासिक 7 स्वर्ण पदकों के अभियान में अहम भूमिका निभाई — जो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

भिवानी से रिंग तक का सफर

30 अगस्त 2001 को जन्मी जैस्मिन का बचपन उस शहर में बीता जिसे 'लिटिल क्यूबा' कहा जाता है — भिवानी, जो दशकों से भारतीय मुक्केबाजी का गढ़ रहा है। मुक्केबाजी के इस माहौल में पली-बढ़ी जैस्मिन के लिए रिंग की ओर कदम बढ़ाना स्वाभाविक था, लेकिन परिवार और समाज की रूढ़िवादी सोच ने शुरुआत में राह आसान नहीं होने दी।

एक बार परिजनों का विश्वास जीतने के बाद जैस्मिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके चाचा संदीप और परविंदर — दोनों राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज — ने बाद में उनका मार्गदर्शन किया और उनके करियर को नई दिशा दी।

लड़कों के साथ अभ्यास ने बनाई पहचान

जब जैस्मिन ने लैंबोरिया बॉक्सिंग अकादमी, भिवानी में प्रशिक्षण शुरू किया, उस समय अकादमी में कोई अन्य महिला मुक्केबाज नहीं थी। विकल्प न होने की स्थिति में उन्होंने लड़कों के साथ अभ्यास किया — एक ऐसा अनुभव जिसने उनकी तकनीक को धार दी और आत्मविश्वास को अटूट बनाया। यह वही कठोर प्रशिक्षण था जो आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय रिंग में उनकी पहचान बना।

मुख्य उपलब्धियाँ और पदक यात्रा

जैस्मिन ने 2021 में दुबई में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर दस्तक दी। उसी वर्ष एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल किया। 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 60 किग्रा लाइटवेट वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया।

2025 में अस्ताना में आयोजित विश्व बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित की। और अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण — उनके करियर की सबसे ताज़ा और चमकदार उपलब्धि।

आगे क्या — एशियन गेम्स और ओलंपिक की राह

29 अगस्त 2026 को 25 वर्ष की हो रही जैस्मिन अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण दौर में हैं। खेल विशेषज्ञों और प्रशंसकों की नज़र अब आगामी एशियन गेम्स और ओलंपिक पर है, जहाँ उनसे पदक की प्रबल उम्मीद लगाई जा रही है। भिवानी की यह मुक्केबाज भारतीय महिला मुक्केबाजी की नई उम्मीद बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यवस्था को चुनौती देने की है जो लड़कियों को रिंग से दूर रखती है। भिवानी जैसे मुक्केबाजी के गढ़ में भी महिला मुक्केबाज के लिए अलग प्रशिक्षण सुविधा न होना बताता है कि ढाँचागत समर्थन अभी भी पुरुष-केंद्रित है। यह भी विचारणीय है कि जब तक कोई अंतरराष्ट्रीय पदक न आए, महिला मुक्केबाजों को वह संस्थागत समर्थन नहीं मिलता जो उनके पुरुष समकक्षों को मिलता है। जैस्मिन की सफलता इस खाई को उजागर करती है — और माँग करती है कि अगली चैंपियन को लड़कों के साथ अभ्यास करने की मजबूरी न हो।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
जैस्मिन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 57 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता। यह भारतीय टीम के रिकॉर्ड 7 स्वर्ण पदकों में से एक था।
जैस्मिन लंबोरिया कहाँ की हैं और उनका प्रशिक्षण कहाँ हुआ?
जैस्मिन लंबोरिया का जन्म 30 अगस्त 2001 को भिवानी, हरियाणा में हुआ। उन्होंने भिवानी की लैंबोरिया बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया, जहाँ शुरुआत में कोई महिला मुक्केबाज न होने के कारण उन्होंने लड़कों के साथ अभ्यास किया।
जैस्मिन लंबोरिया के करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
जैस्मिन ने 2021 में दुबई एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य, 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 60 किग्रा में कांस्य, 2025 में अस्ताना विश्व बॉक्सिंग कप में स्वर्ण और 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में 57 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता है।
जैस्मिन लंबोरिया को परिवार से किसका समर्थन मिला?
जैस्मिन को उनके चाचा संदीप और परविंदर का समर्थन मिला, जो दोनों राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज रहे हैं। शुरुआत में परिवार और समाज की रूढ़िवादी सोच से जूझना पड़ा, लेकिन विश्वास जीतने के बाद उन्हें घर से पूरा सहयोग मिला।
जैस्मिन लंबोरिया से आगे किन प्रतियोगिताओं में पदक की उम्मीद है?
25 वर्षीय जैस्मिन अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं और आगामी एशियन गेम्स तथा ओलंपिक में उनसे पदक की प्रबल उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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