31 जुलाई 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अस्मिता डे ने जूडो 48 किग्रा में जीता भारत का पहला स्वर्ण, हर्ष सिंह ने भी किया कमाल

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अस्मिता डे ने जूडो 48 किग्रा में जीता भारत का पहला स्वर्ण, हर्ष सिंह ने भी किया कमाल

सारांश

ग्लासगो में भारतीय जूडो ने इतिहास रच दिया — एक ही दिन में दो स्वर्ण। अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ खेलों में जूडो का पहला भारतीय स्वर्ण जीता, फिर हर्ष सिंह ने वाजा-अरी से ऑस्ट्रेलिया को हराया। यह सिर्फ पदक नहीं, भारतीय जूडो के नए युग की दस्तक है।

मुख्य बातें

अस्मिता डे ने 31 जुलाई 2026 को ग्लासगो में महिला 48 किग्रा जूडो फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराया।
यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का जूडो में पहला स्वर्ण पदक है।
हर्ष सिंह (23 वर्ष) ने पुरुष 60 किग्रा में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराकर दूसरा स्वर्ण जीता।
हर्ष ने 41 सेकंड शेष रहते वाजा-अरी तकनीक से निर्णायक बढ़त बनाई।
अस्मिता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यूपी पुलिस में नौकरी देने के लिए आभार जताया।

अस्मिता डे ने 31 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के लिए जूडो का पहला स्वर्ण पदक जीता। महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में उन्होंने कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। डे ने यह पदक उन सभी को समर्पित किया जो उनके साथ हर कदम पर खड़े रहे।

फाइनल के अहम पल

रोमांच से भरे फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे ने असाधारण संयम का परिचय दिया। उन्होंने सटीक रणनीति और मज़बूत रक्षात्मक खेल के दम पर हेइडी क्वैच को पूरी तरह नियंत्रण में रखा और 2-1 के स्कोर से जीत दर्ज की। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके सफर की सबसे बड़ी और यादगार जीत रही।

अस्मिता का संदेश — 'यह पदक मेरा नहीं, साथ देने वालों का है'

जीत के तुरंत बाद अस्मिता डे ने कहा, 'मैं स्वर्ण पदक जीतकर बहुत खुश हूँ। यह उन सभी के लिए है जिन्होंने मेरा साथ दिया।' उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया, जिन्होंने उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी दी। यह बयान खेल और सरकारी सहयोग के बीच के उस महत्वपूर्ण रिश्ते को रेखांकित करता है जो एक एथलीट की तैयारी में निर्णायक भूमिका निभाता है।

हर्ष सिंह का भी ऐतिहासिक स्वर्ण

अस्मिता की जीत के ठीक बाद हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराकर स्वर्ण पदक जीता। 23 वर्षीय हर्ष को शुरुआत में कड़ी चुनौती मिली, लेकिन उन्होंने 41 सेकंड शेष रहते एक शानदार वाजा-अरी — जूडो की दूसरी सर्वोच्च स्कोरिंग तकनीक — का प्रयोग किया और बचे हुए चार मिनट में अभेद्य बचाव के साथ जीत सुनिश्चित की।

भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन

एक ही दिन में जूडो में दो स्वर्ण पदक — यह भारतीय जूडो के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है। गौरतलब है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दशकों के इतिहास में भारत ने इस खेल में पहली बार स्वर्ण का स्वाद चखा है। यह प्रदर्शन भारतीय जूडो की बढ़ती ताकत और संरचनात्मक विकास का प्रमाण है।

आगे क्या

इन दोनों जीत से भारत के कुल पदक तालिका में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अस्मिता डे और हर्ष सिंह की यह सफलता आने वाले एशियाई और ओलंपिक चक्र के लिए भारतीय जूडो की संभावनाओं को नई ऊँचाई पर ले जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो गैर-क्रिकेट खेलों में भारतीय एथलीटों की सबसे बड़ी बाधा रही है। एक ही दिन में दो जूडो स्वर्ण यह भी बताते हैं कि भारतीय जूडो अब 'भाग्यशाली पदक' की श्रेणी से निकलकर व्यवस्थित उत्कृष्टता की ओर बढ़ रहा है — पेरिस 2028 के लिए यह संकेत उत्साहजनक है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता?
अस्मिता डे ने 31 जुलाई 2026 को ग्लासगो में महिलाओं के 48 किग्रा जूडो वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराया और कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली जूडोका बनीं।
हर्ष सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कैसे जीत हासिल की?
23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा जूडो फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराया। 41 सेकंड शेष रहते उन्होंने वाजा-अरी तकनीक — जूडो की दूसरी सर्वोच्च स्कोरिंग तकनीक — से निर्णायक बढ़त बनाई और मज़बूत बचाव के साथ स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
अस्मिता डे ने योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद क्यों दिया?
अस्मिता डे को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर यूपी पुलिस में नौकरी दी गई थी। जीत के बाद उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, यह कहते हुए कि यह नौकरी उनकी खेल यात्रा में बड़ा सहारा रही।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का जूडो में यह पहला स्वर्ण क्यों खास है?
कॉमनवेल्थ गेम्स के दशकों के इतिहास में भारत ने इससे पहले जूडो में कोई स्वर्ण पदक नहीं जीता था। 31 जुलाई 2026 को एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक — अस्मिता डे और हर्ष सिंह द्वारा — भारतीय जूडो के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है।
वाजा-अरी जूडो तकनीक क्या होती है?
वाजा-अरी जूडो में दूसरी सबसे ज़्यादा स्कोर देने वाली तकनीक है, जो इप्पोन (पूर्ण अंक) से ठीक नीचे होती है। हर्ष सिंह ने इसी तकनीक का उपयोग कर फाइनल में निर्णायक बढ़त हासिल की और स्वर्ण पदक जीता।
राष्ट्र प्रेस
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