कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जूडो और मुक्केबाजी में 5 भारतीय फाइनल में, स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदारी
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो के मैदानों पर भारत का परचम लहरा रहा है। 31 जुलाई 2026 को जूडो और मुक्केबाजी में कुल 5 भारतीय एथलीट अपने-अपने भार वर्गों के फाइनल में जगह बनाने में सफल रहे। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए स्वयं ग्लासगो में मौजूद हैं और उन्होंने विश्वास जताया है कि ये एथलीट देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटेंगे।
हर्ष संघवी का खिलाड़ियों को संदेश
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा, 'जूडोका के सेमीफाइनल में हमारे खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई है। मुझे भरोसा है कि हमारे खिलाड़ी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतेंगे।' उन्होंने विशेष रूप से सिद्दी समुदाय से आने वाले गुजरात के एक छोटे गांव के खिलाड़ी रोहित का ज़िक्र किया, जो इस स्तर तक पहुँचने में कामयाब रहे — भले ही उनका मैच करीबी मुकाबले में हार से समाप्त हुआ। संघवी ने कहा, 'वह दोगुने पक्के इरादे और दोगुने अभ्यास के साथ वापस आएंगे और भविष्य में निश्चित रूप से देश के लिए पदक जीतेंगे।'
जूडो: तीन भारतीय फाइनल में
अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की समर शॉ को पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में उनका सामना कनाडा की हेइडी क्वैच से होगा। हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा इवेंट के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहाँ उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलियाई जोशुआ कैट्ज से होगा। यामिनी मौर्या ने महिलाओं की 57 किग्रा भार वर्ग में दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेयटेनबैक को इप्पोन से हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में यामिनी का मुकाबला इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक से होगा।
मुक्केबाजी: दो और फाइनलिस्ट
अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा भार वर्ग में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर फाइनल में जगह पक्की की। महिला वर्ग में प्रीति पवार ने 54 किग्रा सेमीफाइनल में जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में उनका सामना कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो से होगा।
भारत की पदक उम्मीदें
यह ऐसे समय में आया है जब भारत कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी पदक तालिका को मज़बूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि जूडो और मुक्केबाजी परंपरागत रूप से भारत के लिए मज़बूत स्तंभ रहे हैं। पाँच फाइनल में एक साथ भारतीय उपस्थिति इस संस्करण में टीम के प्रदर्शन को उल्लेखनीय बनाती है। आने वाले घंटों में इन फाइनल के नतीजे भारत की समग्र पदक गणना को निर्णायक रूप से प्रभावित करेंगे।