अंकुश पंघाल का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड, 80 किग्रा फाइनल में इंग्लैंड के शिट्टू को 4-1 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन 80 किलोग्राम मुक्केबाजी वर्ग में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को 4-1 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ग्लासगो, स्कॉटलैंड में खेले गए इस फाइनल मुकाबले के साथ भारतीय मुक्केबाजी टीम ने उस दिन कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण शामिल रहे।
मुख्य मुकाबला: 0-5 से पिछड़कर चैंपियन बने
फाइनल का पहला बाउट अंकुश के लिए आसान नहीं रहा — वे शुरुआत में 0-5 से पीछे हो गए थे। हालाँकि, इसके बाद उन्होंने रणनीति में बदलाव किया और राउंड दर राउंड वापसी करते हुए अंततः 4-1 के स्कोर से जीत दर्ज की। अंकुश ने जीत के बाद कहा, 'गोल्ड मेडल जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है, हालांकि पहले बाउट में 0-5 से पीछे हो गया था, तो दबाव आ गया था कि कैसे भी करके बाउट लेनी है। बस खुद के ऊपर विश्वास रखा और सब हो गया।'
कोच प्रदीप सावंत की रणनीति
अंकुश के कोच प्रदीप सावंत ने बताया कि यह जीत अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित रणनीति का परिणाम थी। उन्होंने कहा, 'अंकुश जब 11 साल के थे तब से मेरे पास आने लगे थे। हमने पहले से ही प्लानिंग कर रखी थी कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ इंग्लैंड और कनाडा ही हैं, जो हमको ज्यादा टक्कर देंगे।' गौरतलब है कि वर्ल्ड कप के फाइनल में अंकुश इसी इंग्लैंड के बॉक्सर से हार चुके थे, जिसने इस बार की तैयारी को और अधिक लक्षित बना दिया।
सावंत ने आगे बताया, 'हमने इंग्लैंड के बॉक्सर के खिलाफ इस बार पूरी तैयारी की थी कि कैसे उन्हें हराना है। मैंने शनिवार को अंकुश से घंटों बात की और हमने यह तय किया कि राउंड दर राउंड हमको अपने प्लान में बदलाव करना है। अंकुश प्लान के अनुसार ही खेले और वह चैंपियन बनने में सफल रहे।'
भारत की मेडल टैली में उछाल
इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने 2 अगस्त को एक ही दिन में 16 पदक जीते। इस प्रदर्शन के बाद भारत मेडल टैली में 10वें स्थान से उछलकर चौथे स्थान पर आ गया। कुल मिलाकर भारत ने अब तक 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक अर्जित किए हैं।
अंकुश का समर्पण और आगे की राह
अंकुश पंघाल ने यह पदक अपने परिवार और कोच प्रदीप सावंत को समर्पित किया। उन्होंने कहा, 'परिवार से बात हुई थी और सभी काफी खुश हैं। मैं अपना यह मेडल परिवार और अपने कोच को समर्पित करना चाहता हूँ।' इस जीत के बाद अंकुश का आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्होंने एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन का संकल्प लिया है — यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि आने वाली बड़ी चुनौतियों की तैयारी का पहला पड़ाव है।