2 अगस्त 2026
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अंकुश पंघाल का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड, हरियाणा के गांव भेड़िया में जश्न; कोच बोले- 'तैयारी रंग लाई'

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अंकुश पंघाल का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड, हरियाणा के गांव भेड़िया में जश्न; कोच बोले- 'तैयारी रंग लाई'

सारांश

पहले राउंड में 5-0 से पिछड़ने के बाद भी अंकुश पंघाल ने हार नहीं मानी — रणनीति, घंटों की मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर इंग्लैंड को हराकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीता। हरियाणा के छोटे से गांव भेड़िया से उठी यह कहानी भारतीय बॉक्सिंग की नई उम्मीद है।

मुख्य बातें

अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 80 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।
फाइनल के पहले राउंड में अंकुश 5-0 से पिछड़ रहे थे, लेकिन रणनीतिक वापसी से जीत दर्ज की।
कोच प्रदीप सावंत ने बताया कि अंकुश 11 साल से उनकी निगरानी में तैयारी कर रहे थे।
अंकुश सुबह 2–2.5 घंटे और शाम को 2.5–3 घंटे ट्रेनिंग करते थे।
हरियाणा के हिसार जिले के गांव भेड़िया में जश्न का माहौल; परिवार ने भव्य स्वागत की तैयारी की।
अंकुश वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड से हारे थे — इस बार उसी प्रतिद्वंद्वी को हराकर बदला चुकाया।

हरियाणा के हिसार जिले के गांव भेड़िया में 2 अगस्त 2026 को उत्सव का माहौल छा गया, जब बॉक्सर अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 80 किलोग्राम भार वर्ग में इंग्लैंड के बॉक्सर को हराकर गोल्ड मेडल जीता। इस ऐतिहासिक जीत ने भारत की मेडल तालिका में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ा और अंकुश के परिवार व पूरे गांव को गर्व से भर दिया।

मुकाबले का रोमांचक घटनाक्रम

यह जीत आसान नहीं थी। अंकुश फाइनल के पहले राउंड में 5-0 से पिछड़ गए थे, जिससे उन पर दबाव काफी बढ़ गया था। हालांकि, उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और रणनीतिक खेल के दम पर पलटवार किया। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ल्ड कप फाइनल में अंकुश इंग्लैंड के इसी प्रतिद्वंद्वी से हार चुके थे, जिससे इस बार की जीत और भी खास बन गई।

कोच प्रदीप सावंत की प्रतिक्रिया

कोच प्रदीप सावंत ने कहा, 'अंकुश का गेम मुझे 11 साल पहले ही समझ आने लगा था, और हमने पहले से प्लान कर लिया था कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ इंग्लैंड और कनाडा ही हैं जो तुम्हें ज़्यादा टफ कॉम्पिटिशन देंगे।' उन्होंने बताया कि फाइनल से एक रात पहले उन्होंने अंकुश के साथ घंटों रणनीति पर चर्चा की। सावंत ने यह भी जानकारी दी कि अंकुश सुबह दो से ढाई घंटे और शाम को ढाई से तीन घंटे ट्रेनिंग करते थे। 'उनको जितना बोला जाता था, उन्होंने उतना ही किया — उन्होंने हमेशा अपना बेस्ट दिया,' कोच ने कहा।

अंकुश पंघाल ने क्या कहा

गोल्ड जीतने के बाद अंकुश ने कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है। मैं पहला राउंड 5-0 से हार गया था, इसलिए मुझ पर किसी तरह बाउट जीतने का बहुत प्रेशर था। लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था, और यह काम कर गया।' उन्होंने बताया कि जीत के बाद उन्होंने अपने पिता और परिवार से बात की और सभी बेहद खुश हैं।

परिवार और गांव का जज़्बा

अंकुश के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा देशी खाना खिलाया और अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि अंकुश की आज फ्लाइट है और गांव में उनके स्वागत की तैयारियाँ जोरों पर हैं। अंकुश के पिता खुद कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं और बताया कि शुरुआत में अंकुश की रुचि भी कबड्डी में ही थी, बाद में वे बॉक्सिंग की ओर मुड़े। यह ऐसे समय में आया है जब हरियाणा ने कुश्ती, बॉक्सिंग और एथलेटिक्स में देश को कई चैंपियन दिए हैं।

आगे क्या

अंकुश के गांव भेड़िया लौटने पर ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत की तैयारी है। उनकी इस उपलब्धि से हरियाणा के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है। कोच सावंत के अनुसार, अंकुश का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हरियाणा की उस खेल-संस्कृति का प्रमाण है जो सीमित संसाधनों में भी विश्व स्तरीय चैंपियन तैयार करती है। वर्ल्ड कप में हार के बाद इसी प्रतिद्वंद्वी को कॉमनवेल्थ फाइनल में हराना दर्शाता है कि भारतीय बॉक्सिंग अब डेटा-आधारित रणनीति और दीर्घकालिक कोचिंग की ओर बढ़ रही है। हालांकि सवाल यह भी उठता है कि ऐसी प्रतिभाओं को सरकारी खेल अकादमियों का कितना संस्थागत समर्थन मिल रहा है — या यह सफलता अभी भी व्यक्तिगत समर्पण और कोच की निजी मेहनत पर टिकी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा मेडल जीता?
अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 80 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में इंग्लैंड के बॉक्सर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
अंकुश पंघाल कहाँ के रहने वाले हैं?
अंकुश पंघाल हरियाणा के हिसार जिले के गांव भेड़िया के रहने वाले हैं। उनके गांव में गोल्ड जीतने की खबर आते ही जश्न का माहौल बन गया।
अंकुश पंघाल के कोच कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
अंकुश के कोच प्रदीप सावंत हैं, जो पिछले 11 वर्षों से उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं। कोच ने बताया कि फाइनल से पहले घंटों रणनीति बनाई गई और अंकुश की कड़ी दैनिक ट्रेनिंग का नतीजा इस गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया।
फाइनल मुकाबले में अंकुश पंघाल पहले राउंड में पिछड़ क्यों गए थे?
अंकुश फाइनल के पहले राउंड में 5-0 से पिछड़ गए थे, जिससे उन पर दबाव काफी बढ़ गया। हालांकि उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और रणनीतिक खेल के दम पर वापसी करते हुए गोल्ड जीता।
अंकुश पंघाल बॉक्सिंग में कैसे आए?
अंकुश की शुरुआती रुचि कबड्डी में थी — उनके पिता भी कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं। बाद में अंकुश ने बॉक्सिंग को अपना करियर चुना और कोच प्रदीप सावंत की देखरेख में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
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