16 सितंबर 2026
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सत्य निकेतन हादसे के बाद आशीष सूद की हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक, दिल्ली में छात्र आवास सुरक्षा पर बड़ा फैसला

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सत्य निकेतन हादसे के बाद आशीष सूद की हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक, दिल्ली में छात्र आवास सुरक्षा पर बड़ा फैसला

सारांश

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने दिल्ली की छात्र आवास व्यवस्था की कमज़ोरियों को उजागर कर दिया। मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक में पीजी पंजीकरण, फायर सेफ्टी और ऑनलाइन पोर्टल जैसे ठोस कदमों पर चर्चा हुई।

मुख्य बातें

मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई।
बैठक सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद छात्र आवास सुरक्षा को लेकर बुलाई गई।
पुलिस, MCD, DDA और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की संयुक्त कमेटी बनाई गई है।
पीजी संचालकों के अनिवार्य पंजीकरण और छात्र आवास डेटा के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार हो रहे हैं।
कॉलेजों को नया कोर्स शुरू करने से पहले हॉस्टल व्यवस्था की योजना प्रस्तुत करनी होगी।
स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और छात्रों की मानसिक सुरक्षा पर भी विचार किया गया।

दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद छात्र आवास सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार ने अपनी पहल तेज़ कर दी है। मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक मंगलवार, 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित, सुलभ और बेहतर आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में कौन शामिल हुए

बैठक में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) की चेयरपर्सन, दिल्ली नगर निगम (MCD) के कमिश्नर तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे। यह बैठक उस हादसे की पृष्ठभूमि में बुलाई गई जिसने राजधानी में छात्र आवास की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

मुख्य एजेंडा और चर्चा के बिंदु

बैठक में पीजी (पेइंग गेस्ट) आवास और कोचिंग संस्थानों के संचालन को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया गया। मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पीजी सुविधाओं को नियमित करने और उनके प्रबंधन को सुधारने के लिए पुलिस, MCD, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न प्रशासनिक निकायों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त कमेटी बनाई गई है।

बैठक में स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी, छात्रों की मानसिक सुरक्षा और सामान्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रमुखता से उठाया गया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल नए हॉस्टल बनाना पर्याप्त नहीं है — मौजूदा पीजी सुविधाओं की सुरक्षा, रखरखाव और नियमों के पालन को भी सुनिश्चित करना ज़रूरी है।

पोर्टल और नियामक ढाँचे की योजना

छात्र आवास से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में पीजी संचालकों का अनिवार्य पंजीकरण और छात्र आवास से जुड़े डेटा को केंद्रीय रूप से संकलित करने पर जोर दिया गया है। सूद ने कहा कि सरकार एक ऐसा नियामक ढाँचा तैयार कर रही है जिसमें छात्रों की सुरक्षा के साथ-साथ भोजन, किराये और अन्य ज़रूरी सुविधाओं से जुड़े पहलुओं को भी व्यवस्थित किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में पीजी और छात्र आवास की अनियमितता एक लंबे समय से चिंता का विषय रही है।

कॉलेजों के लिए नई शर्त

बैठक में यह भी सुझाव उभरा कि कोई भी कॉलेज नया कोर्स शुरू करने से पहले छात्रों के हॉस्टल और आवास व्यवस्था पर स्पष्ट योजना प्रस्तुत करे। गौरतलब है कि दिल्ली में हर साल देशभर से लाखों छात्र उच्च शिक्षा और कोचिंग के लिए आते हैं, लेकिन उनके लिए नियमित और सुरक्षित आवास की कमी एक पुरानी समस्या बनी हुई है।

आगे की दिशा

मंत्री आशीष सूद ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेवा-केंद्रित कार्यक्रमों के ज़रिये लोगों तक पहुँचने का प्रयास जारी रहेगा। हाई-पावर्ड कमेटी की अगली बैठक में पोर्टल के प्रारूप और नियामक दिशानिर्देशों के मसौदे पर चर्चा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली में पीजी और छात्र आवास की अनियमितता दशकों पुरानी समस्या है जिस पर अनेक समितियाँ पहले भी बन चुकी हैं। असली कसौटी यह होगी कि पोर्टल और नियामक ढाँचा सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर कितनी तेज़ी से लागू होता है। पीजी संचालकों के पंजीकरण और निरीक्षण तंत्र के बिना कोई भी नीति खोखली रहेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह एक राजनीतिक परीक्षा भी है — क्योंकि दिल्ली में पढ़ने आने वाले लाखों छात्रों के परिवार पूरे देश में हैं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है, जिसकी पहली बैठक 16 सितंबर 2026 को हुई। इस बैठक में पीजी आवास का नियमन, ऑनलाइन पोर्टल और फायर-स्ट्रक्चरल सेफ्टी जैसे उपायों पर चर्चा की गई।
दिल्ली में पीजी आवास को नियमित करने की नई व्यवस्था क्या होगी?
प्रस्तावित व्यवस्था में पीजी संचालकों का अनिवार्य पंजीकरण और छात्र आवास डेटा संकलन के लिए ऑनलाइन पोर्टल शामिल हैं। पुलिस, MCD, DDA और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की संयुक्त कमेटी इसकी निगरानी करेगी।
हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हुए?
बैठक में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, NDMC की चेयरपर्सन, MCD के कमिश्नर और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
क्या कॉलेजों के लिए नए कोर्स शुरू करने पर कोई नई शर्त लगाई जाएगी?
बैठक में यह सुझाव उभरा कि कॉलेजों को नया कोर्स शुरू करने से पहले छात्रों के हॉस्टल और आवास व्यवस्था पर स्पष्ट योजना प्रस्तुत करनी होगी। इस प्रस्ताव पर आगे की बैठकों में विस्तृत चर्चा होनी बाकी है।
छात्र आवास सुरक्षा के लिए किन पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है?
बैठक में स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी, छात्रों की मानसिक सुरक्षा, भोजन, किराया और सामान्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्राथमिकता दी गई। सरकार एक समग्र नियामक ढाँचा तैयार करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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