14 सितंबर 2026
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सत्य निकेतन इमारत ढहने के बाद MCD की कार्रवाई पर याचिका, दिल्ली हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से किया इनकार

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सत्य निकेतन इमारत ढहने के बाद MCD की कार्रवाई पर याचिका, दिल्ली हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से किया इनकार

सारांश

सत्य निकेतन में इमारत ढहने से 7 छात्रों की मौत के बाद MCD पर मलबा हटाए बिना सटी बिल्डिंग गिराने का आरोप लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार किया, मामला नियमित सूची में जाएगा — और राजधानी में असुरक्षित पीजी आवास का सवाल फिर सुर्खियों में है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को MCD की इमारत ध्वस्तीकरण प्रक्रिया पर दाखिल याचिका की तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
याचिका में आरोप: MCD ने सत्य निकेतन में मलबा हटाए और अंदर फंसे लोगों की जाँच किए बिना सटी बिल्डिंग गिरा दी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से जानकारी का स्रोत पूछा और कहा कि अधिकारियों ने तकनीकी ऑडिट किया होगा।
6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने से 7 लोगों की मौत हुई, अधिकांश छात्र।
9 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने DU कॉलेजों में हॉस्टल सुविधा की माँग वाली PIL पर केंद्र, DU और दिल्ली सरकार से जवाब माँगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को उस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सत्य निकेतन में गिरी पीजी इमारत से सटी बिल्डिंग को मलबा हटाए बिना ही ध्वस्त कर दिया। याचिकाकर्ता की आशंका थी कि दूसरी इमारत गिराने से पहले यह सुनिश्चित नहीं किया गया कि उसके अंदर कोई व्यक्ति फंसा तो नहीं है।

अदालत की प्रतिक्रिया

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से उनकी जानकारी के स्रोत के बारे में सवाल किया। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने इमारत गिराने से पूर्व निश्चित रूप से कोई तकनीकी ऑडिट किया होगा। कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को विधिवत याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि मामले को नियम के अनुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।

सत्य निकेतन हादसे की पृष्ठभूमि

6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में एक इमारत ढह गई थी, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश छात्र थे, जो उस पीजी इमारत में रह रहे थे। हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया और मलबे से कई लोगों को निकालकर अस्पताल पहुँचाया।

MCD की कार्रवाई पर सवाल

याचिका में यह आरोप केंद्रीय है कि MCD ने ध्वस्त पीजी इमारत से सटी दूसरी बिल्डिंग को बिना मलबा साफ किए और बिना यह जाँचे कि उसमें कोई व्यक्ति फंसा है या नहीं, गिरा दिया। यह ऐसे समय में आया है जब शहर में अवैध और जर्जर पीजी इमारतों की सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित आवास की कमी एक पुरानी समस्या रही है।

दिल्ली विश्वविद्यालय हॉस्टल मामले में भी हाई कोर्ट सक्रिय

इससे पहले 9 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से संबद्ध कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा की माँग को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार से जवाब माँगा। उस याचिका में तर्क दिया गया है कि छात्रों को सुरक्षित और पर्याप्त आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि उन्हें असुरक्षित निजी पीजी और हॉस्टल में रहने पर मजबूर न होना पड़े। सत्य निकेतन हादसे के संदर्भ में यह याचिका और अधिक प्रासंगिक हो गई है।

आगे की राह

सत्य निकेतन मामले में दाखिल याचिका को नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में तकनीकी ऑडिट रिकॉर्ड और बचाव अभियान की समयसीमा अदालत में निर्णायक साक्ष्य बन सकती है। सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में पीजी भवनों के नियमन और सुरक्षित छात्र आवास की माँग को नई धार दे दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्य सिद्ध हो, तो यह बचाव प्रोटोकॉल की गंभीर चूक होगी। दिल्ली में सैकड़ों अनधिकृत और जर्जर पीजी भवन संचालित हो रहे हैं, फिर भी नियामक तंत्र तब सक्रिय होता है जब दुर्घटना हो चुकी होती है। DU हॉस्टल PIL और सत्य निकेतन हादसा मिलकर एक ही प्रश्न पूछते हैं — राजधानी में छात्रों की आवास सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है?
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्य निकेतन इमारत हादसा क्या था?
6 सितंबर 2026 को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी इमारत ढह गई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश छात्र थे। NDRF, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया।
दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका किस बारे में थी?
याचिका में आरोप लगाया गया कि MCD ने सत्य निकेतन में ढही पीजी इमारत से सटी दूसरी बिल्डिंग को मलबा हटाए बिना और अंदर फंसे लोगों की जाँच किए बिना गिरा दिया। याचिकाकर्ता ने इस पर तत्काल सुनवाई की माँग की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से क्यों इनकार किया?
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से उनकी जानकारी का स्रोत पूछा और कहा कि अधिकारियों ने इमारत गिराने से पहले तकनीकी ऑडिट किया होगा। कोर्ट ने कहा कि मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय हॉस्टल PIL का इस हादसे से क्या संबंध है?
9 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने DU कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा की माँग वाली PIL पर केंद्र, DU और दिल्ली सरकार से जवाब माँगा। सत्य निकेतन हादसे के बाद यह PIL और प्रासंगिक हो गई, क्योंकि हॉस्टल सुविधा की कमी छात्रों को असुरक्षित निजी पीजी में रहने पर मजबूर करती है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सत्य निकेतन MCD ध्वस्तीकरण याचिका को नियमित न्यायिक सूची में शामिल किया जाएगा और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुनवाई होगी। MCD के तकनीकी ऑडिट रिकॉर्ड और बचाव अभियान का दस्तावेज़ीकरण अदालत में अहम साक्ष्य होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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