भारत ने नेपाल को 31 दिसंबर 2026 तक रोज़ाना 18 घंटे बिजली देने की मंजूरी दी, 654 मेगावाट आपूर्ति का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत के बिजली मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 को नेपाल विद्युत प्राधिकरण को 31 दिसंबर 2026 तक प्रतिदिन 18 घंटे बिजली निर्यात करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। यह फैसला नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पनबिजली ढाँचे को हुए व्यापक नुकसान की पृष्ठभूमि में लिया गया है। बाढ़ से नेपाल की घरेलू बिजली उत्पादन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके चलते भारत से अतिरिक्त आपूर्ति की माँग उत्पन्न हुई।
बिजली आपूर्ति का ढाँचा
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस मंजूरी के तहत मुजफ्फरपुर-ढलकेबर 400 केवी डी/सी लाइन के माध्यम से अधिकतम 600 मेगावाट और टनकपुर-महेंद्रनगर 132 केवी एस/सी लाइन के माध्यम से अधिकतम 54 मेगावाट बिजली का निर्यात किया जाएगा। इस प्रकार कुल उपलब्ध क्षमता 654 मेगावाट तक पहुँचती है। जनवरी 2027 से आपूर्ति की मात्रा की समीक्षा दिसंबर 2026 में की जाएगी।
बाढ़ की तबाही और पृष्ठभूमि
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के अनेक कस्बों और गाँवों को तबाह कर दिया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के आँकड़ों के अनुसार, अब तक मृतकों की संख्या 1,386 तक पहुँच चुकी है और करीब 5,130 लोग अब भी लापता हैं। बरामद शवों में से 104 की पहचान कर परिजनों को सौंपा जा चुका है, जबकि 13,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया गया है और 339 लोग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
भारत की मानवीय सहायता
बिजली आपूर्ति के साथ-साथ भारत ने नेपाल के लिए व्यापक मानवीय सहायता अभियान भी तेज़ किया है। भारतीय वायुसेना के विमानों के ज़रिए राहत एवं बचाव सामग्री काठमांडू पहुँचाई गई है। इसके अतिरिक्त खोज, बचाव और फोरेंसिक अभियानों में सहायता के लिए भारतीय कर्मियों को तैनात किया गया है। भारत ने मलबे में राहत कार्य के लिए मड रेस्क्यू सूट, गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग उपकरण, इन्फ्लेटेबल वॉकवे, पोर्टेबल जनरेटर, लाइटिंग टावर और पानी निकालने वाले पंप जैसे विशेष उपकरण भेजे हैं। पीड़ितों की पहचान में मदद के लिए डीएनए किट, रिएजेंट और डीएनए प्रोफाइलिंग उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग का संदर्भ
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग वर्षों से एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय स्तंभ रहा है। बिजली मंत्रालय ने कहा कि यह मंजूरी नेपाल को मौजूदा संकट के दौर में अपनी ज़रूरतें पूरी करने में सहायक होगी और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को और सुदृढ़ करेगी। यह पहली बार नहीं है कि भारत ने प्राकृतिक आपदा के बाद नेपाल को तत्काल ऊर्जा सहायता दी हो — यह पड़ोसी-प्रथम नीति के तहत भारत की प्रतिबद्धता का एक और प्रमाण है।
आगे की राह
दिसंबर 2026 में होने वाली समीक्षा में नेपाल की पुनर्निर्मित पनबिजली क्षमता और घरेलू माँग के आधार पर जनवरी 2027 के बाद की आपूर्ति तय की जाएगी। बचाव एवं खोज अभियान अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में और बदलाव संभव है।