रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: अंडरग्राउंड पावर हाउस तक नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम, नेपाल में 900 से अधिक मृत
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी में 900 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,000 से अधिक लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने यह जानकारी दी है। इस बीच रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड ने पुष्टि की है कि 111 मेगावाट के रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड पावर हाउस तक बचाव दल अब तक नहीं पहुंच पाया है।
सुरंग में क्यों रुकी रेस्क्यू टीम
रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड के सचिव नरनाथ न्यूपाने ने बताया कि नेपाल सेना के बचावकर्मी सुरंग के उस हिस्से तक पहुंचे जहां मार्ग केवल 1-2 फीट तक खुला था। उसके आगे सुरंग पूरी तरह बंद पाई गई। न्यूपाने के अनुसार, "वे सुरंग के खुले हिस्से तक गए। जहाँ सुरंग 1-2 फीट खुली थी, वहाँ तक पहुंचे। फिर पता चला कि आगे सुरंग बंद है। इसीलिए वहाँ जाने के लिए ड्रिलिंग समेत सभी उपकरणों की जरूरत थी। सेना यह कहकर लौट आई कि वहाँ जाना मुमकिन नहीं है।"
प्रधानमंत्री सचिवालय का बयान
नेपाल के प्रधानमंत्री सचिवालय ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि भोटेकोशी नदी में बाढ़ आने के बाद रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग की तलाशी ली गई। इंजीनियरों और ड्रोन टीम सहित नेपाल सेना के नेतृत्व वाले बचाव दल ने सुरंग के अंतिम बिंदु तक पहुंचकर ड्रोन उड़ाए, लेकिन वहाँ कोई व्यक्ति नहीं मिला। हालांकि, अंडरग्राउंड पावर हाउस तक पहुंचना अभी भी संभव नहीं हो पाया है।
उपकरणों की मांग और अगला कदम
न्यूपाने ने सरकार से अपील की है कि अपर त्रिशूली 3ए और अपर त्रिशूली 3बी परियोजनाओं में अपनाए गए बचाव तरीकों की तर्ज पर यहाँ भी आवश्यक उपकरण मंगाए जाएं और सेना को उसी प्रकार की कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। यह ऐसे समय में आया है जब बड़े पैमाने पर लापता लोगों की संख्या को लेकर परिवारों में गहरी चिंता बनी हुई है।
हेलिकॉप्टर से बचाव अभियान जारी
नेपाली सेना के अनुसार, सोमवार को दोपहर 1:30 बजे तक सेना के हेलिकॉप्टरों ने भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित 1,330 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। गौरतलब है कि रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उफान ने भारी तबाही मचाई है और पहाड़ी इलाकों में संपर्क मार्ग बाधित होने से राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। यह नेपाल की हालिया इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जा रही है।