नेपाल बाढ़: भोटेकोशी सुरंग बचाव के लिए भारत की 11 सदस्यीय टीम काठमांडू पहुंची, चीन की टीम भी रवाना
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने शनिवार, 29 अगस्त को काठमांडू में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय बचाव सहायता के प्रस्तावों को अस्वीकार नहीं किया है। उन्होंने उन रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि काठमांडू ने विदेशी बचाव दलों को वापस लौटा दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण कई सुरंगें बंद हो गई हैं और उनमें लोग फंसे हुए हैं। इन लोगों को बाहर निकालने के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ तकनीकी टीम शुक्रवार को काठमांडू पहुंच चुकी है। विदेश मंत्री खनल ने बताया कि चीन से भी एक विशेषज्ञ दल के शीघ्र नेपाल पहुंचने की उम्मीद है।
खनल ने अपने संबोधन में कहा, 'भोटेकोशी में बाढ़ के कारण बंद हुई सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए एक्सपर्ट की मदद मांगी गई है। सुरंग से बचाव कार्य के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक्सपर्ट टेक्निकल टीम को भेजा गया है।'
किन कामों के लिए मांगी गई विदेशी मदद
विदेश मंत्री खनल ने विस्तार से बताया कि मित्र देशों से सहायता निम्नलिखित विशेष कार्यों के लिए माँगी गई है — सुरंगों को खोलना, आपदाग्रस्त इलाकों में जीवित बचे लोगों का पता लगाना, फॉरेंसिक जाँच, डीएनए परीक्षण और शवों को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था करना। उन्होंने जोर दिया कि यह सहायता सुरक्षा एजेंसियों की परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर माँगी गई है।
भौगोलिक चुनौतियाँ बनीं बाधा
खनल ने बताया कि नेपाल का ऊबड़-खाबड़ भूगोल, संकरी घाटियाँ और अनिश्चित मौसम बड़े हेलीकॉप्टरों के संचालन को सीमित कर देते हैं, जिससे भारी उपकरण पहुँचाना अत्यंत कठिन हो जाता है। दो जिले मुख्य सड़कों और पुलों के नष्ट हो जाने के कारण बड़े पैमाने पर कट गए हैं और इन क्षेत्रों तक पहुँचने का एकमात्र व्यावहारिक माध्यम हेलीकॉप्टर ही रह गया है।
उन्होंने कहा, 'हमारी सुरक्षा एजेंसियाँ और बचाव टीमें बचाव अभियान को अच्छे से चला रही हैं। इसे और बेहतर बनाने के लिए हमने जरूरी क्षेत्रों में अपने पड़ोसियों से एक्सपर्ट की मदद माँगी है।'
मृतकों की संख्या
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के आँकड़ों के अनुसार, शनिवार शाम 4 बजे तक 675 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे। यह आपदा नेपाल के हाल के वर्षों की सबसे भीषण प्राकृतिक त्रासदियों में से एक बन गई है।
आगे क्या होगा
भारतीय तकनीकी दल के काठमांडू पहुँचने के बाद बचाव अभियान में तेजी आने की उम्मीद है। चीनी टीम के आगमन के बाद तीनों देशों के विशेषज्ञ मिलकर सुरंग बचाव, फॉरेंसिक और शव संरक्षण के कार्यों को समन्वित ढंग से अंजाम देंगे। नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता किए बिना, तकनीकी क्षमता के अंतर को पाटने के लिए माँगी गई है।