29 अगस्त 2026
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त्रिशूली-3 'ए' सुरंग बचाव अभियान: नेपाली सेना के 82 जवान तैनात, भारतीय टीम भी पहुँची

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त्रिशूली-3 'ए' सुरंग बचाव अभियान: नेपाली सेना के 82 जवान तैनात, भारतीय टीम भी पहुँची

सारांश

नेपाल के रसुवा जिले में त्रिशूली-3 'ए' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए 82 सुरक्षाकर्मी दो दिनों से डटे हैं। खराब मौसम बाधा बन रहा है, लेकिन भारतीय बचाव दल के पहुँचने से अभियान को नई ताकत मिली है।

मुख्य बातें

त्रिशूली-3 'ए' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों का बचाव अभियान 29 अगस्त को तेज किया गया।
नेपाली सेना के 62 जवानों सहित कुल 82 सुरक्षाकर्मी शुक्रवार रात से लगातार अभियान में जुटे हैं।
भारतीय बचाव टीम त्रिशूली पहुँची; चिलिमे और लांगटांग का हवाई सर्वेक्षण किया।
इलाके में खराब मौसम और दुर्गम भूगोल बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
नेपाल PMO ने एक्स पर बचाव अभियान की तस्वीरें और अपडेट साझा किए।

नेपाल के रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3 'ए' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बचाने का अभियान 29 अगस्त, शनिवार को और तेज हो गया। पिछले दो दिनों से जारी इस बचाव कार्य में अब नेपाली सेना के 62 जवानों सहित नेपाल सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के कुल 82 कर्मियों की संयुक्त टीम लगातार मोर्चे पर डटी हुई है। शनिवार सुबह से सुरंग के प्रवेश द्वार को खोलने के लिए मलबा हटाने और खुदाई का काम युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

बचाव अभियान की स्थिति

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपडेट जारी करते हुए बताया कि सुरंग के भीतर लोगों के फंसे होने की सूचना मिलते ही बचाव कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रवेश मार्ग को खोलने के लिए सुरक्षा बलों की टीम को तत्काल मौके पर तैनात किया गया। शुक्रवार रात से ही संयुक्त टीम बिना रुके अभियान में जुटी हुई है।

PMO ने बचाव दल की कोशिशों को दर्शाती तस्वीरें भी साझा कीं। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के मुहाने की खुदाई और तलाशी अभियान को और गति देने के प्रयास जारी हैं।

खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती

PMO के बयान में स्पष्ट किया गया कि इलाके में प्रतिकूल मौसम लगातार बचाव कार्य में बाधा बन रहा है। अधिकारियों ने कहा, 'इलाके में खराब मौसम लगातार चुनौती बना हुआ है। प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण सुरंग तक पहुंचने और मलबा हटाने के अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।' पहाड़ी और दुर्गम भूगोल ने भारी उपकरण पहुँचाने में भी अतिरिक्त कठिनाई पैदा की है।

भारतीय बचाव दल की भूमिका

बचाव अभियान को अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिल रहा है। भारत से पहुँची विशेष बचाव टीम त्रिशूली पहुँच चुकी है। भारतीय दल ने हेलीकॉप्टर के जरिए चिलिमे और लांगटांग इलाकों का प्रारंभिक हवाई सर्वेक्षण किया है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय टीम स्थिति का पूरा आकलन करने के बाद आवश्यकतानुसार आगे के बचाव अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होगी।

नेपाली अधिकारियों और भारतीय टीम के बीच समन्वय स्थापित कर सुरंग में फंसे लोगों तक पहुँचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं। गौरतलब है कि यह परियोजना रसुवा जिले के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ मानसून के दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रहता है।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार मलबा हटाने का काम तेज गति से जारी है और सुरंग का प्रवेश द्वार खुलते ही अंदर फंसे लोगों तक पहुँचने की कोशिश की जाएगी। नेपाल-भारत की संयुक्त बचाव टीम मौसम के हालात पर भी लगातार नज़र रखे हुए है। बचाव अभियान की सफलता काफी हद तक अगले कुछ घंटों में मौसम के सुधरने पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रोटोकॉल पर्याप्त हैं। मुख्यधारा की कवरेज बचाव की नाटकीयता पर केंद्रित है, जबकि यह पूछा जाना चाहिए कि सुरंग में फंसाव की स्थिति कैसे बनी और जवाबदेही किसकी है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिशूली-3 'ए' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में क्या हुआ?
नेपाल के रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3 'ए' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में कुछ लोग फंस गए, जिसके बाद 27 अगस्त से बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबा और खराब मौसम के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार अवरुद्ध हो गया था।
बचाव अभियान में कितने जवान शामिल हैं?
नेपाली सेना के 62 जवानों सहित नेपाल सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के कुल 82 कर्मियों की संयुक्त टीम शुक्रवार रात से लगातार बचाव अभियान में जुटी हुई है।
भारतीय बचाव दल की इस अभियान में क्या भूमिका है?
भारत से पहुँची विशेष बचाव टीम त्रिशूली पहुँच चुकी है और उसने हेलीकॉप्टर के जरिए चिलिमे व लांगटांग इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया है। स्थिति का आकलन करने के बाद भारतीय दल आगे के बचाव अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होगा।
बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
नेपाल PMO के अनुसार, इलाके में खराब मौसम लगातार बचाव अभियान में बाधा बन रहा है। प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सुरंग तक पहुँचना और मलबा हटाना दोनों काम मुश्किल हो रहे हैं।
त्रिशूली-3 'ए' जलविद्युत परियोजना कहाँ स्थित है?
यह परियोजना नेपाल के रसुवा जिले में स्थित है, जो काठमांडू से उत्तर की ओर पहाड़ी क्षेत्र में है। यह इलाका मानसून के दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ के लिए संवेदनशील माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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