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हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' पर हरीश रावत का हमला: उत्तराखंड में संविधान और कानून का अपमान हुआ

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हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' पर हरीश रावत का हमला: उत्तराखंड में संविधान और कानून का अपमान हुआ

सारांश

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर कथित 'शुद्धिकरण' को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे संविधान और कानून का अपमान करार दिया। राहुल गांधी की प्रेस वार्ता के बाद यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में तेज हो गया है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हल्द्वानी के कथित 'शुद्धिकरण' को संविधान और कानून का अपमान बताया।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को न्याय मिलेगा और एफआईआर दर्ज होगी।
रावत ने सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन पर कथित दबाव को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन बताया।
कॉमेडियन समय रैना के बिहार संबंधी बयान की निंदा की; कॉमेडी में सीमा की जरूरत बताई।
'एक देश, एक चुनाव' को BJP की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।
नेपाल बाढ़ और हिमालयी आपदाओं के लिए जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर पिघलने को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर किए गए 'शुद्धिकरण' ने देश के संविधान और कानून दोनों का अपमान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना से उत्तराखंड के लोग शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी।

हल्द्वानी घटना और राहुल गांधी की प्रेस वार्ता

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस कथित 'शुद्धिकरण' को लेकर प्रेस वार्ता की और दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को न्याय अवश्य मिलेगा तथा एफआईआर भी दर्ज होगी। रावत ने इस पर कहा कि जिस मंच से खड़गे भाषण दे रहे थे, उसका 'शुद्धिकरण' करना अशुद्ध मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने इसे उत्तराखंड की प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

सोनिया गांधी की किताब और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन पर कथित दबाव के सवाल पर रावत ने कहा कि किसी विचार से असहमत होना अलग बात है, लेकिन किसी संस्थान पर दबाव डालकर किताब का प्रकाशन रोकना या उसमें बदलाव के लिए मजबूर करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को असहमति का अधिकार है, परंतु यह अधिकार संस्थाओं पर दबाव बनाकर नहीं जताया जाना चाहिए।

समय रैना विवाद और नेपाल बाढ़ पर प्रतिक्रिया

कॉमेडियन समय रैना के शो में बिहार के लोगों पर की गई कथित टिप्पणी पर रावत ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी विशेष समुदाय या क्षेत्र का अपमानजनक तरीके से मजाक उड़ाना निंदनीय है और कॉमेडी की भी एक सीमा होनी चाहिए। नेपाल में आई बाढ़ को उन्होंने दिल दहला देने वाली त्रासदी बताया और कहा कि हिमालयी क्षेत्र में ऐसी आपदाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जिसके पीछे जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना प्रमुख कारण है। उन्होंने 2013 की उत्तराखंड आपदा और हिमाचल प्रदेश की बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो ऐसी त्रासदियाँ जारी रहेंगी।

'एक देश, एक चुनाव' और आरक्षण पर रावत का रुख

'एक देश, एक चुनाव' के प्रस्ताव पर रावत ने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है और संघवाद को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए यह एजेंडा आगे बढ़ा रही है। आरक्षण पर उन्होंने कहा कि सदियों से वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है और इसे जारी रहना चाहिए। मनुस्मृति पर राहुल गांधी के विचारों के संदर्भ में रावत ने कहा कि प्राचीन ग्रंथों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ में समझना चाहिए और वर्तमान समाज में महिला सम्मान व समानता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आगे क्या

हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' प्रकरण पर कांग्रेस की माँग है कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। राहुल गांधी के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और तीखा होने की संभावना है। उत्तराखंड में सत्तारूढ़ BJP सरकार की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को राज्य की प्रतिष्ठा और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक पदानुक्रम और संवैधानिक समानता के बीच की खाई को उजागर करता है। रावत का बयान राजनीतिक रूप से सटीक समय पर आया है, जब कांग्रेस दलित-पिछड़े वर्ग के मुद्दों को केंद्र में रखकर BJP को घेरने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि जब उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी, तब ऐसी सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए थे। 'एक देश, एक चुनाव' पर रावत की आलोचना पार्टी लाइन से इतर कोई नई दृष्टि नहीं देती — असली बहस संघवाद के संरक्षण की है, जिसे और गहराई से उठाने की जरूरत है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद क्या है?
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर उस स्थल का 'शुद्धिकरण' किया गया। कांग्रेस ने इसे संवैधानिक मूल्यों का अपमान बताते हुए दोषियों पर एफआईआर की माँग की है।
हरीश रावत ने इस घटना पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जिस मंच से खड़गे ने भाषण दिया, वहाँ 'शुद्धिकरण' करना अशुद्ध मानसिकता को दर्शाता है और यह संविधान का अपमान तथा कानून का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग इस घटना से शर्मिंदा हैं।
राहुल गांधी ने इस मामले में क्या माँग की?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को न्याय जरूर मिलेगा और इस मामले में एफआईआर भी दर्ज होगी। उन्होंने इसे एक गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बताया।
रावत ने 'एक देश, एक चुनाव' पर क्या रुख अपनाया?
हरीश रावत ने 'एक देश, एक चुनाव' के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि भारत की विविधता और संघवाद को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए यह एजेंडा आगे बढ़ा रही है।
नेपाल बाढ़ पर रावत ने क्या कहा और इसे किससे जोड़ा?
रावत ने नेपाल की बाढ़ को दिल दहला देने वाली त्रासदी बताया और इसे जलवायु परिवर्तन तथा ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 2013 की उत्तराखंड आपदा की तरह हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाएँ तब तक जारी रहेंगी जब तक प्रभावी उपाय नहीं किए जाते।
राष्ट्र प्रेस
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