हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' हवन: कांग्रेस बोली — संविधान और दलित गरिमा का अपमान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित तौर पर आयोजित 'शुद्धिकरण' हवन ने एक तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। 13 अगस्त 2026 को कांग्रेस सांसदों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे दलित समुदाय के प्रति भेदभाव, संवैधानिक समानता के सिद्धांत का उल्लंघन और राष्ट्रीय गरिमा पर आघात बताया। सांसदों ने दोषियों पर कानूनी कार्रवाई और उत्तराखंड सरकार से स्पष्टीकरण की माँग की है।
घटना का विवरण और राजनीतिक पृष्ठभूमि
कांग्रेस के आरोपों के अनुसार, जिस मैदान में खड़गे और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने जनसभा को संबोधित किया, उसी स्थान पर रैली समाप्त होने के बाद कथित तौर पर 'शुद्धिकरण' हवन कराया गया। खड़गे दलित समुदाय से आते हैं और राज्यसभा में विपक्ष के नेता का संवैधानिक पद धारण करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत भेदभाव के विरुद्ध कानूनी और सामाजिक बहस पहले से तेज है।
कांग्रेस सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि 75 वर्षों के संवैधानिक शासन के बावजूद ऐसी घटनाएँ होना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पद पर आसीन व्यक्ति की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' किया जाना गंभीर मामला है। रवि ने माँग की कि दोषियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई हो और उन्हें जेल भेजा जाए।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने इस घटना को 'शर्मनाक' करार देते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय से आने वाले कांग्रेस अध्यक्ष की सभा के बाद उसी स्थान पर 'शुद्धिकरण' कराया जाना अत्यंत अपमानजनक है और मुख्यमंत्री को इस पर सार्वजनिक रूप से बोलना चाहिए।
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर तिरंगा यात्रा और राष्ट्रवाद की बात की जाती है, दूसरी ओर संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार का कथित उल्लंघन किया जा रहा है। शैलजा ने कहा कि उत्तराखंड को ऐसी सोच और मानसिकता से 'शुद्धिकरण' की जरूरत है, और यदि कार्रवाई नहीं होती तो यह राज्य सरकार की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
संसद में विपक्ष का व्यापक हमला
हल्द्वानी विवाद के साथ-साथ संसद सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव भी जारी रहा। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार पर महंगाई, रिकॉर्ड बेरोज़गारी, नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, ई-20 ईंधन और हरियाणा में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन जैसे अहम मुद्दों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि संसद में जनता के सवाल नहीं उठाए जाएंगे, तो विपक्ष इन्हें कहाँ ले जाएगा।
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को सदन में बार-बार बोलने का अवसर मिलता है, जबकि गृह मंत्री सदन में उपस्थित नहीं रहते। उन्होंने कथित डोनेशन घोटाले से प्रभावित लोगों और जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं को लेकर संसद के भीतर माफी माँगने की माँग की। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने पर सरकार पर छात्रों के मुद्दों और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से जुड़े सवालों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
क्या होगा आगे
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को संसद और सड़क — दोनों स्तरों पर उठाती रहेगी। दोषियों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की माँग की जा रही है। उत्तराखंड सरकार की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जो विपक्ष के लिए एक अतिरिक्त राजनीतिक मुद्दा बन गई है।