13 अगस्त 2026
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हल्द्वानी रैली के बाद 'शुद्धिकरण हवन' पर खड़गे का पलटवार — 'धर्म के नाम पर देश बाँटने की साज़िश'

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हल्द्वानी रैली के बाद 'शुद्धिकरण हवन' पर खड़गे का पलटवार — 'धर्म के नाम पर देश बाँटने की साज़िश'

सारांश

हल्द्वानी में कांग्रेस रैली के बाद रामलीला मैदान में 'शुद्धिकरण हवन' — और खड़गे का पलटवार। यह महज़ एक हवन का विवाद नहीं, बल्कि दलित अस्मिता, सार्वजनिक स्थलों के उपयोग और धर्म-राजनीति के गठजोड़ पर एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत है।

मुख्य बातें

8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'विजय शंखनाद' रैली के बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने 'शुद्धिकरण हवन' कराया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे धर्म के नाम पर दलितों को बाँटने की कोशिश करार दिया।
खड़गे ने कहा कि रामलीला मैदान सभी दलों की जनसभाओं के लिए उपयोग होता है — वहाँ हवन की ज़रूरत नहीं थी।
गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर खड़गे ने कहा कि 19 दिन संसद का समय बर्बाद करने के बाद अतिरिक्त समय माँगना 'शर्म की बात' है।
खड़गे ने इस आयोजन को हिंदू धर्म के भी विरुद्ध बताया, कहा कि यह जातीय विवाद भड़काने का काम करता है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 अगस्त को हुई कांग्रेस की 'विजय शंखनाद' रैली के बाद रामलीला मैदान में श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास द्वारा कराए गए 'शुद्धिकरण हवन' को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और हिंदू संगठनों पर तीखा हमला बोला है। खड़गे ने इस आयोजन को धर्म के नाम पर जातीय विभाजन की कोशिश करार दिया और कहा कि ऐसे कदम हिंदू धर्म के भी विरुद्ध हैं।

मुख्य घटनाक्रम

8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'विजय शंखनाद' रैली संपन्न हुई, जिसे खड़गे ने संबोधित किया था। रैली समाप्त होने के बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने उसी मैदान में 'शुद्धि हवन' का आयोजन किया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी।

खड़गे ने सवाल उठाया कि रामलीला मैदान सभी राजनीतिक दलों की जनसभाओं के लिए वर्षों से उपयोग होता आया है — ऐसे में वहाँ हवन की ज़रूरत क्यों पड़ी? उनका कहना था कि यह आयोजन एक सुनियोजित संदेश है जो दलितों और अन्य समुदायों को हाशिये पर धकेलने की मंशा से किया गया।

खड़गे की प्रतिक्रिया

खड़गे ने कहा, 'कांग्रेस शुरू से कहती रही है कि देश में दलितों के लिए जगह नहीं है। धर्म के नाम पर लोगों को बाँटने की कोशिश की जा रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का आयोजन सबसे पहले हिंदू धर्म के ही खिलाफ है, क्योंकि ऐसे कदम जातियों के बीच विवाद पैदा करने का काम करते हैं।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, '19 दिन संसद चला और कम से कम 25-26 दिन आपके पास थे, तो उस समय आपको यह याद नहीं आया। जब आपका एजेंडा पूरा हो गया तब आप तैयार होते हैं, सबके 19 दिन बर्बाद करने के बाद अब समय माँगते हैं — यह शर्म की बात है।'

संसद और एजेंडे पर आरोप

खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस संबंध में अन्य दलों से पहले कभी चर्चा नहीं की और अब संसद का कीमती समय नष्ट करने के बाद अतिरिक्त समय की माँग की जा रही है। उन्होंने कहा कि संसद का समय महत्वपूर्ण है और सभी दलों को साथ लेकर काम किया जाना चाहिए। सरकार के इस रवैये को उन्होंने 'शर्मनाक' बताया।

आम जनता पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक-राजनीतिक टकराव से सामाजिक सद्भाव प्रभावित होता है और आम नागरिकों में ध्रुवीकरण बढ़ता है। दलित और पिछड़े समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है।

आगे क्या

खड़गे के इन बयानों के बाद कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज़ होने के संकेत हैं। उत्तराखंड में दोनों दलों के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और मुखर हो सकता है, खासकर जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मी पहले से बढ़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें उस गहरे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में हैं जो सार्वजनिक स्थलों, दलित प्रतिनिधित्व और धर्म के प्रतीकात्मक उपयोग को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच चल रही है। खड़गे का यह बयान केवल एक हवन की प्रतिक्रिया नहीं — यह कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है जो दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को BJP के 'हिंदुत्व' एजेंडे के विरुद्ध गोलबंद करना चाहती है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में दलित मतदाताओं की संख्या निर्णायक है और दोनों दल इस वर्ग को साधने में जुटे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि रामलीला मैदान जैसे साझा सार्वजनिक स्थलों का धार्मिक-राजनीतिक उपयोग एक व्यापक और बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है — और इस पर संस्थागत जवाबदेही का सवाल अभी अनुत्तरित है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी में 'शुद्धिकरण हवन' विवाद क्या है?
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'विजय शंखनाद' रैली के बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने उसी मैदान में 'शुद्धिकरण हवन' कराया। कांग्रेस ने इसे दलितों के खिलाफ भेदभावपूर्ण और राजनीति से प्रेरित आयोजन बताया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस हवन पर क्या कहा?
खड़गे ने कहा कि यह आयोजन धर्म के नाम पर दलितों को बाँटने की कोशिश है और हिंदू धर्म के भी विरुद्ध है। उन्होंने सवाल उठाया कि रामलीला मैदान सभी दलों की जनसभाओं के लिए उपयोग होता है, तो वहाँ हवन की ज़रूरत क्यों पड़ी।
खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
खड़गे ने कहा कि संसद के 19 दिन बर्बाद करने के बाद अब अतिरिक्त समय माँगना शर्मनाक है। उनका आरोप था कि सरकार ने अपना एजेंडा पूरा होने के बाद ही अन्य दलों से बात करने की पहल की, जो संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है।
इस विवाद का उत्तराखंड की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह घटनाक्रम उत्तराखंड में कांग्रेस और BJP के बीच दलित व पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा को और तेज़ करेगा। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक-राजनीतिक टकराव से सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ता है।
श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास कौन है?
श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास एक हिंदू धार्मिक संगठन है जिसने रामलीला मैदान में 'शुद्धि हवन' का आयोजन किया। कांग्रेस ने इस संगठन के इस कदम को BJP से जोड़ते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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